Gun से Glamour तक! कोसा सिल्क में रैंप पर उतरीं पूर्व महिला माओवादी, दिखी जिंदगी की नई तस्वीर 

हिंसा और माओवाद का रास्ता छोड़कर शांति और विकास का मार्ग चुनने वाली आत्मसमर्पित बेटियों ने आत्मविश्वास के साथ रैंप पर वॉक कर नए जीवन का संदेश दिया।

बंदूकों का साया छोड़ थमा हाथ में हुनर

कोसा सिल्क में बिखेरी अपनी चमक

सुकमा पुनर्वास केंद्र से आईं 9 बेटियां

हिंसा और डर का रास्ता हमेशा के लिए पीछे छोड़ चुकी पूर्व महिला माओवादी जब छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क में सजीं, तो उनकी आंखों में नए भविष्य का सपना और चेहरे पर बेमिसाल गर्व था!

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में जब इन बेटियों के कदम पड़े, तो दर्शकों का हुजूम खड़े होकर तालियां बजाने लगा।

हाथों में कभी जो हथियार हुआ करते थे, आज उन्हीं हाथों ने छत्तीसगढ़ के बुनकरों के हुनर को दुनिया के सामने लाकर एक नया अध्याय लिख दिया है।