सावन का महीना अत्यंत पवित्र होता है, जो शिव भक्तों के लिए बहुत विशेष है।
इस महीने में व्रत और खानपान से जुड़े नियमों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
बेलपत्र अर्पित करें
शिव जी को तीन पत्तियों वाला बेलपत्र बेहद प्रिय है। साफ बेलपत्र श्रद्धा से चढ़ाने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
ऐसा करने से न केवल शिवजी की कृपा प्राप्त होती है बल्कि स्वास्थ्य पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
सावन में क्या खाएं और क्या नहीं?
सावन में खानपान के इन नियमों का पालन करने से धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ फल मिलता है और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा सकता है।
मांसाहार से दूरी
सावन में मांस, अंडा, मदिरा और तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह मन की शुद्धि और भक्ति के लिए उचित माना जाता है।
प्याज-लहसुन भी न खाएं
लोक मान्यताओं के अनुसार सावन में प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इन्हें तामसिक माना जाता है।
दूध-दही के सेवन से बचें
मान्यता है कि श्रावण मास में कच्चा दूध भगवान शिव को अर्पित किया जाता है, इसलिए कई लोग इस दौरान दूध और दही का सेवन नहीं करते।
कढ़ी और पत्तेदार सब्जियां क्यों नहीं?
बरसात के मौसम में कढ़ी पचने में भारी हो सकती है और पत्तेदार सब्जियों में बैक्टीरिया होने की आशंका अधिक रहती है।
सावन में बैंगन न खाने की मान्यता
श्रावण मास में बैंगन का सेवन कई परंपराओं में वर्जित माना जाता है। इसे धार्मिक और मौसमी कारणों से टालने की सलाह दी जाती है।
सोमवार व्रत के नियम
व्रत के दिन गेहूं, चावल, मैदा, बेसन और दाल का सेवन न करने की मान्यता है।
साधारण नमक नहीं, सेंधा नमक
सावन सोमवार व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है।
सावन में सात्विक भोजन अपनाएं
सावन में सात्विक भोजन, संयम और भगवान शिव की भक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी बदलाव से पहले डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।