होटल या ढाबे पर जाते ही हम अक्सर 'तंदूरी रोटी' का ऑर्डर देते हैं, जबकि घर पर रोज़ 'तवे की रोटी' खाते हैं। लेकिन स्वाद के चक्कर में क्या आप अपनी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं? आइए जानते हैं न्यूट्रिशन और डाइजेशन के मामले में कौन सी रोटी है असली विनर!
पेट के लिए कौन सी है हल्की? तवे की रोटी गेहूं के आटे से बनती है और हल्की आंच पर सिकती है, जिससे यह आसानी से पच जाती है। वहीं तंदूरी रोटी में अक्सर मैदा या मैदे-आटे का मिक्सचर होता है, जो आंतों में जाकर चिपक सकता है और कब्ज पैदा करता है।
कैलोरी का खेल एक नॉर्मल साइज की तवे की रोटी में लगभग 70-80 कैलोरी होती है। इसके विपरीत, एक तंदूरी रोटी में (बिना बटर के भी) 110-150 कैलोरी होती है, क्योंकि यह मोटी और आकार में बड़ी होती है। अगर आप बटर तंदूरी खाते हैं, तो कैलोरी डबल हो जाती है!
एडवांस्ड ग्लाइकेशन' का खतरा तंदूर में रोटी को बहुत तेज तापमान पर कोयले या लकड़ी की आंच पर पकाया जाता है। ज्यादा जलने या काला होने पर इसमें AGEs बनते हैं, जो शरीर में सूजन और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
न्यूट्रिएंट्स और फाइबर घर की तवे की रोटी में चोकर (Bran) और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल रखता है। तंदूरी रोटी में रिफाइंड फ्लोर (मैदा) का इस्तेमाल होने की वजह से इसका फाइबर खत्म हो जाता है और यह तुरंत ब्लड शुगर स्पाइक करती है।
किसे चुनें? तवे की होल-वीट रोटी आपकी डेली डाइट के लिए बेस्ट और सुरक्षित विकल्प है। तंदूरी रोटी का स्वाद कभी-कभार पार्टी में लेना ठीक है, लेकिन इसे रोज खाने से पाचन तंत्र और लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है।