सूरत में झुग्गियां ढहाए जाने के 10 दिन बाद भी नहीं पता चला कौन है इसका जिम्मेदार, जांच के आदेश

सूरत में झुग्गियां ढहाए जाने के 10 दिन बाद भी नहीं पता चला कौन है इसका जिम्मेदार, जांच के आदेश

सूरत में झुग्गियां ढहाए जाने के 10 दिन बाद भी नहीं पता चला कौन है इसका जिम्मेदार, जांच के आदेश
Modified Date: June 9, 2026 / 10:38 pm IST
Published Date: June 9, 2026 10:38 pm IST

सूरत, नौ जून (भाषा) गुजरात के सूरत शहर में लगभग 80 झुग्गियों को तोड़े जाने के 10 दिन से अधिक समय बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि यह कार्रवाई किसने की। नगर निगम ने इस कार्रवाई में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है, जबकि स्थानीय निवासियों ने कार्रवाई को अवैध बताते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

सूरत नगर निगम (एसएमसी) ने इन झुग्गियों को ढहाने के मामले में जांच के आदेश दिए हैं।

विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई सत्तारूढ़ भाजपा के कहने पर एक बिल्डर के फायदे के लिए की गई, जो इस जमीन पर एक नयी परियोजना शुरू करना चाहता है। पार्टी ने मामले में कुछ “भ्रष्ट” अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत का भी आरोप लगाया है।

एसएमसी के उपमहापौर सुधाकर चौधरी ने मंगलवार को कहा कि नगर आयुक्त एन. नागराजन ने 30 मई को सूरत के वेद दरवाजा क्षेत्र में स्थित नासिरनगर झुग्गी बस्ती में हुई तोड़फोड़ की जांच के आदेश दिए हैं।

चौधरी ने कहा, “हमने इस मुद्दे पर नगर आयुक्त के साथ औपचारिक चर्चा की है। उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं और भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

एसएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष राजन पटेल ने कहा कि नगर निगम को इस तोड़फोड़ की जानकारी मीडिया में आईं खबरों के जरिए मिली थी।

उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि झुग्गियों को ढहाने में नगर निगम की कोई भूमिका नहीं थी।

पटेल ने कहा, “मुझे इस तोड़फोड़ की जानकारी मीडिया से मिली। हमारी ओर से की गई प्रारंभिक जांच में पता चला कि इसमें एसएमसी की कोई भूमिका नहीं थी। उस दिन हमारे अधिकारी पुलिस सुरक्षा के बीच केवल सड़क के सीमांकन के लिए वहां गए थे। यह जांच का विषय है कि तोड़फोड़ किसने की।”

पटेल ने कहा कि उन्होंने नगर आयुक्त से इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

उन्होंने कहा, “मैंने नगर आयुक्त से जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”

नासिरनगर के एक निवासी ने सोमवार को गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर तोड़फोड़ अभियान को चुनौती दी और आरोप लगाया कि ‘कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।’

एक अन्य निवासी ने भी तोड़फोड़ पर रोक लगाने की मांग करते हुए दीवानी आवेदन दाखिल किया है। हालांकि अभी उसकी झुग्गी नहीं तोड़ी गई है।

याचिका के अनुसार, 30 मई को पुलिस सुरक्षा के बीच लगभग 80 झुग्गियां ढहा दी गईं, जिससे कई परिवार एक ही रात में बेघर हो गए।

कांग्रेस नेता और पूर्व पार्षद असलम साइकिलवाला ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई भाजपा के कहने पर एक ऐसे बिल्डर के लाभ के लिए की गई जो इस जमीन पर नयी परियोजना शुरू कराना चाहता है।

साइकिलवाला के अनुसार, झुग्गी बस्ती की 111 झुग्गियों में से 84 को 30 मई को ढहा दिया गया। उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकांश झुगिगयां 40 से 50 वर्ष पुरानी हैं और सभी निवासी एसएमसी को संपत्ति कर देते हैं।

हालांकि, नगर निगम का कहना है कि उसने यह तोड़फोड़ नहीं कराई।

साइकिलवाला ने आरोप लगाया, “जब हम अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने पुलिस के पास गए, तो पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया और कहा कि यह कार्रवाई एसएमसी ने की है। स्थानीय निवासियों ने मुझे बताया कि जब झुग्गियां ढहाई जा रही थीं, तब नगर निगम के कुछ अधिकारी भी वहां मौजूद थे।”

साइकिलवाला ने दावा किया कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन आंशिक रूप से एसएमसी और आंशिक रूप से एक पारसी परिवार की है।

उन्होंने आरोप लगाया, “तोड़फोड़ शुरू होने से पहले लोगों को झुग्गियां खाली करने के लिए केवल एक घंटे का समय दिया गया था।”

उन्होंने कहा, “कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना इन झुग्गियों को अवैध तरीके से गिराया गया। यह साफ है कि भाजपा से जुड़े एक बिल्डर को फायदा पहुंचाने के लिए कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और पुलिस की इसमें भूमिका थी।”

भाषा जोहेब पवनेश

पवनेश


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