पूर्वोत्तर क्षेत्र से 250 भारतीय यहूदी इजराइल पहुंचे

पूर्वोत्तर क्षेत्र से 250 भारतीय यहूदी इजराइल पहुंचे

पूर्वोत्तर क्षेत्र से 250 भारतीय यहूदी इजराइल पहुंचे
Modified Date: April 24, 2026 / 09:56 pm IST
Published Date: April 24, 2026 9:56 pm IST

(हरेन्द्र मिश्रा)

यरूशलम, 24 अप्रैल (भाषा) इजराइल सरकार की पिछले साल घोषित पहल के तहत पूर्वोत्तर भारत से लगभग 250 यहूदी यहां पहुंचे।

पिछले साल नवंबर में सरकार ने अगले पांच वर्षों में इजराइल में आव्रजन के लिए हजारों यहूदियों को धन मुहैया कराने का वादा किया था, जिसके तहत बीने मनेशे समुदाय का पहला समूह बृहस्पतिवार को इजराइल पहुंचा।

बीने मनेशे समुदाय मणिपुर और मिजोरम के कुछ हिस्सों में रहता है। समुदाय का दावा है कि उनका वंश बाइबिल में उल्लेखित मनेशे कबीले से है। यह समुदाय 1990 के दशक से धीरे-धीरे इजराइल पहुंच रहा है। पिछले तीन दशकों में समुदाय के लगभग 4,000 सदस्य इजराइल आ चुके हैं और लगभग 6,000 अन्य सदस्य इजराइल आने का इंतजार कर रहे हैं।

इजराइल सरकार 2026 के दौरान ‘ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन’ के तहत 1,200 और लोगों को इजराइल लाने की योजना बना रही है।

अनिवासियों और इजराइल लौटने वालों की सहायता करने वाले अलिया और इंटीग्रेशन मंत्रालय के अनुसार अगले दो हफ्तों में दो अतिरिक्त उड़ान निर्धारित की गई हैं।

इस पूरी पुनर्वास योजना के लिए लगभग नौ करोड़ शेकेल (तीन करोड़ अमेरिकी डॉलर) का बजट निर्धारित किया गया है।

अतीत में बीने मनेशे के यहूदी होने को लेकर काफी बहस हो चुकी है। 2005 में सेफारदी समुदाय के मुख्य रब्बी श्लोमो अमर ने उन्हें ‘इजराइल के वंशज’ के रूप में मान्यता दी, जिससे उनके आव्रजन का रास्ता साफ हुआ।

समुदाय का दावा है कि वे मनेशे कबीले से हैं, जो 2,700 साल पहले निर्वासित किए गए 10 कबीलों में से एक था।

बीने मनेशे समुदाय के सदस्यों के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने सदियों तक फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन तक पलायन किया और कुछ यहूदी धार्मिक प्रथाओं जैसे खतना का पालन करते रहे।

एक यहूदी एजेंसी ने कहा कि भारत में मिशनरी उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित कर चुके थे, और उन्हें इजराइल नागरिक बनने के लिए धर्मांतरण प्रक्रिया से गुजरना होगा।

भाषा जोहेब माधव

माधव


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