आर्टेमिस-2 अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की सतह के गड्ढों को प्रियजनों के नाम देने का प्रस्ताव रखा
आर्टेमिस-2 अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की सतह के गड्ढों को प्रियजनों के नाम देने का प्रस्ताव रखा
ह्यूस्टन, नौ अप्रैल (एपी) चंद्रमा से पृथ्वी की ओर लौट रहे आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने अपोलो मिशनों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए चंद्रमा की सतह के दो गड्ढों के नाम अपने प्रियजनों के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है।
कमांडर रीड वाइजमैन और उनके दल ने एक छोटे, अपेक्षाकृत नए गड्ढे का नाम अपने कैप्सूल ‘इंटीग्रिटी’ के नाम पर तथा दूसरे का नाम उनकी दिवंगत पत्नी कैरोल के नाम पर रखने की अनुमति मांगी। यह अनुरोध कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन ने सोमवार को चंद्रमा की परिक्रमा से ठीक पहले किया। वाइजमैन भावुक होने के कारण उस समय कुछ नहीं बोल सके।
पेशे से नर्स कैरोल वाइजमैन का 2020 में कैंसर से निधन हो गया था।
वाइजमैन ने बुधवार रात अंतरिक्ष से कहा, “व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए यह मिशन का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण क्षण था।”
साल1968 में अपोलो-8 मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री जिम लॉवेल ने अपनी पत्नी के नाम पर चंद्रमा की एक प्रमुख चोटी का नाम ‘माउंट मैरिलिन’ रखा था। यह मानव की पहली चंद्रमा यात्रा थी।
आर्टेमिस-2 मिशन के तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री 1972 में अपोलो-17 के बाद चंद्रमा तक पहुंचने वाले पहले यात्री हैं।
वाइजमैन के प्रस्ताव ने मिशन कंट्रोल में मौजूद वैज्ञानिकों को कुछ समय के लिए निशब्द कर दिया। नासा के चंद्र वैज्ञानिक रयान वॉटकिन्स ने कहा, “यह बेहद भावुक क्षण था। वहां सबकी आंखें नम हो गईं।”
मिशन कंट्रोल की प्रमुख वैज्ञानिक केल्सी यंग ने प्रक्षेपण से पहले अंतरिक्ष यात्रियों के साथ मिलकर इन अपेक्षाकृत नए और चमकीले गड्ढों का चयन किया था, जिन्हें अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के करीब पहुंचने पर देखा।
वाइजमैन ने बताया कि उनके साथियों ने यह विचार प्रक्षेपण से कुछ दिन पहले रखा था, लेकिन उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह भावुकता के कारण इस पर बोल नहीं पाएंगे।
प्रस्तावित ‘कैरोल क्रेटर’ चंद्रमा के निकट और दूरस्थ हिस्सों की सीमा पर स्थित है और कभी-कभी पृथ्वी से दिखाई देता है, जबकि ‘इंटीग्रिटी क्रेटर’ पूरी तरह चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से में स्थित है।
यह प्रस्ताव उस समय आया जब अंतरिक्ष यात्रियों ने गहरे अंतरिक्ष में यात्रा की दूरी के मामले में अपोलो-13 का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस दौरान सभी चारों अंतरिक्ष यात्री एक-दूसरे से गले मिले।
मिशन कंट्रोल ने लगभग एक मिनट की चुप्पी के बाद वाइजमैन के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए “इंटीग्रिटी और कैरोल क्रेटर, बेहद साफ और स्पष्ट’’ कहा।
पृथ्वी पर लौटने के बाद दल इन नामों को औपचारिक मंजूरी के लिए अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ को भेजेगा। 2017 में ‘माउंट मैरिलिन’ को आधिकारिक मान्यता मिलने में लगभग पांच दशक लगे थे।
संघ के अधिकारी रामासामी वेणुगोपाल ने कहा कि सामान्य प्रक्रिया के तहत इन नामों पर लगभग एक महीने में निर्णय लिया जा सकता है।
संघ की स्वीकृत सूची में पहले से 81 चंद्र स्थल ऐसे हैं, जिनका नाम अंतरिक्ष यात्रियों के नाम पर रखा गया है, हालांकि अपोलो युग के कुछ अनौपचारिक नामों को मंजूरी नहीं मिल सकी थी।
एपी मनीषा वैभव
वैभव

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