(केजेएम वर्मा)
बीजिंग, नौ जून (भाषा) चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मंगलवार को उत्तर कोरिया की अपनी यात्रा संपन्न की और कहा कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए किम जोंग उन के साथ एक महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंचे हैं।
उत्तर कोरिया, चीन का रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है।
सोमवार को प्योंगयांग में भव्य स्वागत किये जाने के बाद, शी ने उत्तर कोरिया के नेता किम को चीन के ‘‘अटूट’’ समर्थन का आश्वासन दिया, जिन्होंने हाल के वर्षों में रूस के साथ संबंधों को प्रगाढ़ किया है, जिससे बीजिंग काफी असहज हो गया है।
शी की दो दिवसीय यह यात्रा 2019 के बाद उत्तर कोरिया की उनकी पहली यात्रा थी और इस वर्ष शी चिनफिंग की यह पहली विदेश यात्रा भी है।
दोनों रणनीतिक सहयोगियों के बीच किसी ठोस समझौते की कोई घोषणा नहीं हुई और चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण पर किसी भी वार्ता से संबंधित सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
उत्तर कोरिया, जिसने 2006 से कई परमाणु परीक्षण किए हैं, सार्वजनिक रूप से खुद को परमाणु-आयुध से लैस देश बताता है, लेकिन बीजिंग कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु हथियारों के विरोध में है और परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन करता है।
शी की यात्रा से पहले, किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने सरकारी समाचार एजेंसी ‘केसीएनए’ के माध्यम से कहा था कि उत्तर कोरिया कभी भी खुद के परमाणु-सशस्त्र होने का दर्जा नहीं छोड़ेगा और अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करना जारी रखेगा।
उन्होंने उन खबरों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि शी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच, अमेरिकी नेता की हालिया बीजिंग यात्रा के दौरान हुई बातचीत में प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण का मुद्दा उठा था।
उत्तर कोरिया की शी की यात्रा के परिणामों पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने संकेत दिया कि कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण पर बीजिंग के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
परमाणु निरस्त्रीकरण से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, ‘‘चीन कोरियाई प्रायद्वीप के मुद्दे पर अपनी स्थिति और नीति में निरंतरता और स्थिरता बनाए हुए है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चीन कूटनीति, कानून प्रवर्तन, सैन्य और अन्य क्षेत्रों में उत्तर कोरिया के साथ आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए तैयार है, ताकि हमारे द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए ज्ञान और शक्ति का साझा उपयोग किया जा सके।’’
उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर शी और किम के बीच हुई किसी भी चर्चा का सरकारी मीडिया ने स्पष्ट रूप से कोई उल्लेख नहीं किया है।
हालिया खबरों के अनुसार, चीन और उत्तर कोरिया के बीच संबंध अविश्वास के कारण असहज स्थिति में पहुंच गए हैं क्योंकि किम के नेतृत्व में प्योंगयांग मॉस्को के करीब आ रहा है और उसने यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में रूस की ओर से लड़ने के लिए अपने सैनिकों को भी भेजा है।
शी की यात्रा को बीजिंग द्वारा अपने महत्वपूर्ण सहयोगी को फिर से विश्वास में लेने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जो अपने परमाणु कार्यक्रम पर संयुक्त राष्ट्र के कड़े प्रतिबंधों के मद्देनजर पेट्रोलियम और खाद्य सामग्री की बुनियादी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर है।
किम ने अपनी ओर से कहा कि शी की यात्रा पूरी तरह सफल रही, जिससे विश्व को यह सकारात्मक संदेश गया कि उत्तर कोरिया और चीन अपने मैत्रीपूर्ण सहयोग को और मजबूत कर रहे हैं, और इसने विभिन्न पक्षों का व्यापक ध्यान आकर्षित किया।
मंगलवार को शी ने उत्तर कोरिया की अपनी राजकीय यात्रा संपन्न की और बीजिंग लौट आए।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की रिपोर्ट के अनुसार, किम और उनकी पत्नी, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उनकी पत्नी को विदा करने हवाई अड्डा गए तथा उनके सम्मान में एक भव्य विदाई समारोह आयोजित किया।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश