कांगो में इबोला के 550 मरीजों में से 101 लोगों की मौत
कांगो में इबोला के 550 मरीजों में से 101 लोगों की मौत
बुनिया (कांगो), नौ जून (एपी) पूर्वी कांगो में इबोला का प्रकोप घोषित होने के एक महीने से भी कम समय में इसके संक्रमण के कारण 101 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
आक्रोशित निवासियों द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले, कुछ स्थानीय लोगों के बीच संशय और संवेदनशील क्षेत्रों में सशस्त्र संघर्ष, इबोला के प्रकोप को रोकने के प्रयासों के लिए लगातार चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
पूर्वी कांगो में 15 मई को इबोला के प्रकोप की घोषणा की गई थी।
सोमवार देर शाम जारी अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार, अब तक इबोला वायरस के संक्रमण के कुल 550 मरीजों की पुष्टि हुई है। इनमें से 101 लोगों की मौत हो गई और 19 मरीज ठीक हो गए हैं।
यह प्रकोप मुख्य रूप से कांगो के पूर्वी प्रांत इटुरी में केंद्रित है, जहां कुल मामलों के 90 प्रतिशत से अधिक मामले सामने आये हैं। कुछ मामले उत्तर किवु और दक्षिण किवु प्रांतों में भी सामने आए हैं और यह वायरस सीमा पार कर युगांडा तक फैल चुका है।
हालांकि, कांगो में इबोला संक्रमण के मामलों की संख्या अधिक होने का अनुमान है क्योंकि प्रकोप की पुष्टि हफ्तों देरी से हुई और संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने की दर, जिसमें हाल के दिनों में सुधार हुआ है, अभी भी 64 प्रतिशत है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार को कहा कि पिछले 24 घंटों में केवल 137 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 35 में संक्रमण की पुष्टि हुई।
अधिकारियों के अनुसार, यह नया प्रकोप दुर्लभ बुंदीबुग्यो वायरस स्ट्रेन के कारण है, जिसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। वायरस का यह उपस्वरूप ज़ैरे वायरस से अलग है, जो कांगो में पहले हुए अधिकांश प्रकोपों के लिए जिम्मेदार रहा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि जांच क्षमता बढ़ने और पहले से एकत्र नमूनों की जांच शुरू होने के कारण मामलों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है।
अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्य कर्मियों को कई बार हमलों का सामना करना पड़ा है और सशस्त्र विद्रोही समूहों की मौजूदगी के कारण वे कई क्षेत्रों तक पहुंच नहीं पा रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि संघर्ष के कारण राहत कार्य बाधित हो रहा है, निगरानी और प्रतिक्रिया गतिविधियां प्रभावित हैं तथा संक्रमण के अनियंत्रित प्रसार का खतरा बढ़ गया है।
डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ऐसी परिस्थितियां इस बात को दर्शाती हैं कि स्थानीय समुदायों और नेताओं के साथ मिलकर काम करना कितना आवश्यक है।
एपी सुभाष पवनेश
पवनेश

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