तुर्की और सीरिया में भूकंप ने मचाई तबाही, 8,000 से ज्यादा लोगों की मौत…
तुर्की और सीरिया में भूकंप ने मचाई तबाही : Earthquake wreaks havoc in Turkey and Syria, killing more than 8,000 people
earthquake in afghanistan
नई दिल्ली । तुर्किये और सीरिया में आये विनाशकारी भूकंप के बाद बचावकर्मी हजारों ध्वस्त इमारतों के मलबे के नीचे दबे शवों को बाहर निकाल रहे हैं। हालांकि, मलबे में फंसे किसी व्यक्ति के जीवित मिलने के बाद इस कवायद में कुछ रूकावट पड़ जाती है। दोनों देशों में अब तक 8,000 से ज्यादा लोगों की मौत होने की पुष्टि की गई है।तुर्किये की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने कहा कि मलबे से और शव बरामद होने के बाद देश में भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 6,234 हो गयी है। पड़ोसी देश सीरिया के आंकड़े भी शामिल कर लें तो दोनों देशों में 8,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।आपदा प्रभावित क्षेत्र में सरकार से और अधिक मदद की गुहार के बीच राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन सोमवार को आये भूकंप का केन्द्र रहे पजारकिक और आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हाते प्रांत का दौरा करने वाले हैं।
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तुर्किये में फिलहाल करीब 60,000 बचावकर्मी भूकंप प्रभावित क्षेत्र में बचाव कार्य कर रहे हैं, लेकिन आपदा से प्रभावित इलाके का क्षेत्रफल इतना बड़ा है कि कई लोगों को अब भी सहायता का इंतजार है।दक्षिण-पूर्वी तुर्किये और उत्तरी सीरिया में 7.8 तीव्रता का भूकंप आने के दो दिन बाद भूकंप के अधिकेन्द्र से बहुत दूर स्थित कहरमानमरास शहर में ढही एक इमारत के मलबे से आरिफ खान नाम के तीन साल के बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।आरिफ के शरीर का निचला हिस्सा कंक्रीट के ‘स्लैब’ के नीचे दबा हुआ था और वह एक मुड़ी हुई सरिया में फंसा हुआ था। बचावकर्मियों ने ठंड से बचाव के लिए उसे मोटे कंबलों से ढंका और फिर बेहद सावधानी से सरिया काटकर उसे बाहर निकाला।
अपने बेटे से कुछ देर पहले ही मलबे से बाहर निकाले गए एर्तुग्रुल किसी अपने बच्चे को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाले जाते और उसे एम्बुलेंस में ले जाते हुए देखकर रो पड़े।आरिफ को मलबे से बाहर निकालने के लिए चलाये गये अभियान का पूरे देश में सीधा प्रसारण किया गया, और उसे बाहर निकाले जाने के बाद एक तुर्किये के एक टीवी चैनल के पत्रकार ने कहा, ‘‘फिलहाल, कहरमानमरास में उम्मीद की किरण का दूसरा नाम आरिफ खान है।’’इसके कुछ ही घंटों बाद बचाव दल ने अदियामान शहर में 10 वर्षीय बेतुल इदिस को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला।हालांकि, विनाशकारी भूकंप के कारण बड़े पैमाने पर हुई तबाही के दो दिन बाद भी लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाले जाने जैसी घटनाएं बहुत कम हैं। मलबे में ज्यादातर शव ही मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, कड़ाके की सर्दी और लगातार महसूस हो रहे हल्के झटकों (आफटर शॉक) ने बचाव कार्य को और मुश्किल बना दिया है।
वहीं, पड़ोसी देश सीरिया में हालात और भी खराब हैं। पिछले 12 साल से गृह युद्ध और शरणार्थी संकट से जूझ रहे देश में तमाम ऐसे शहर और कस्बे भी भूकंप से प्रभावित हुए हैं जो संघर्ष के दौरान सरकार और विद्रोहियों द्वारा छोड़ दिये गए हैं। ऐसे शहरों/कस्बों में तो मदद की गुहार लगाते-लगाते लोगों की आवाज थक चुकी है।भूकंप से हुई तबाही के बाद, दोपहर में जब लोग सड़कों पर बाहर निकले तो उन्होंने देखा कि एक ढही हुई आवासीय इमारत में एक नवजात बच्ची पड़ी पड़ी हुई है और वह अपनी मृत मां से नाड़ी के जरिये जुड़ी हुई थी। बच्ची की रिश्तेदार ने बताया कि भूकंप में इस बच्ची के परिवार के सभी सदस्यों की मौत हो गई है।

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