पर्यावरणीय अपराध बोध : बच्चे पैदा करने से घबरा रहे हैं लोग |

पर्यावरणीय अपराध बोध : बच्चे पैदा करने से घबरा रहे हैं लोग

पर्यावरणीय अपराध बोध : बच्चे पैदा करने से घबरा रहे हैं लोग

: , September 23, 2022 / 04:17 PM IST

(फेलिक्स पिंकर्ट, यूनिवर्सिटैट वीन और मार्टिन स्टिकर, एथिक्स में लेक्चरर, ब्रिस्टल विश्वविद्यालय)

ब्रिस्टल, 23 सितम्बर (द कन्वरसेशन) जलवायु नैतिकता को लेकर चल रही चर्चा में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या उच्च आय वाले देशों के निवासी नैतिक रूप से कम बच्चे पैदा करने के लिए बाध्य हैं? भविष्य की जनसंख्या वृद्धि के उच्च प्रत्याशित कार्बन प्रभाव के कारण, कुछ जलवायु नैतिकतावादी कुछ अनिवार्य जनसंख्या इंजीनियरिंग नीतियों की हिमायत कर रहे हैं।

इस बहस ने बड़े पैमाने पर जनता का ध्यान आकर्षित किया है, जिससे परिवार नियोजन जलवायु परिवर्तन की रोकथाम में एक प्रमुख मुद्दा बन गया है।

अधिकांश बहस ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी से 2009 में प्रकाशित एक प्रभावशाली अमेरिकी अध्ययन द्वारा रेखांकित की गई है। अध्ययन का आधार यह है कि एक व्यक्ति अपने वंशजों के कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है और उसपर इसका भार है। एक दादा-दादी अपने पोते-पोतियों के उत्सर्जन के एक चौथाई के लिए जिम्मेदार होते हैं, और इसी तरह यह सिलसिला आगे बढ़ता जाता है।

एक बच्चा होने से, कई पीढ़ियों तक निरंतर प्रजनन का चक्र शुरू हो जाता है। भावी पीढ़ियों के उत्सर्जन को उनके पूर्वजों की कार्बन विरासत में शामिल किया गया है।

बच्चों का कार्बन प्रभाव

इस तर्क के आधार पर, लेखकों ने पाया कि एक बच्चा होने से प्रत्येक माता-पिता की कार्बन विरासत में 9,441 टन कार्बन डाइऑक्साइड जुड़ जाता है। यह उनके अपने जीवनकाल के कार्बन उत्सर्जन के पांच गुना से अधिक के बराबर है। इसलिए कम प्रजनन से संभावित बचत नाटकीय है।

यह परिणाम आम तौर पर अकादमिक बहस और लोकप्रिय चर्चा दोनों में अंकित मूल्य पर लिया जाता है, जबकि इसके विवरण और मान्यताओं की शायद ही कभी जांच की जाती है। फिर भी परिणाम इस धारणा पर निर्भर है कि सभी भावी पीढ़ियां 2005 के स्तर पर अनिश्चित काल के लिए उत्सर्जन करेंगी, एक ऐसी धारणा जो अब ज्यादा बड़ी दिखाई देती है।

उदाहरण के लिए, 2005-2019 के बीच, कोविड महामारी से पहले तक, यूएस प्रति व्यक्ति उत्सर्जन में 21% की गिरावट आई। और भविष्य में इनके और गिरने की संभावना है।

बड़े सार्वजनिक निवेश कार्बन तटस्थता की ओर संक्रमण को तेज कर रहे हैं। हाल ही में यूएस इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए 369 अरब अमेरिकी डॉलर का आवंटन किया।

नेट जीरो भी कई देशों में कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य बन गया है। उदाहरण के लिए, यूरोपीय जलवायु कानून 2050 तक पूरे यूरोपीय संघ में शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखता है।

बच्चों के कार्बन प्रभाव पर पुनर्विचार

इन प्रयासों को ध्यान में रखते हुए, अध्ययन को रेखांकित करने वाली केंद्रीय मान्यताओं पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है।

उसी तर्क का उपयोग करते हुए जिससे प्रजनन के लिए बड़े कार्बन प्रभाव के आंकड़े मिले, हम इसके बजाय सुझाव देते हैं कि आज एक बच्चा होना पर्यावरण की दृष्टि से बहुत कम हानिकारक हो सकता है, जितना कि व्यापक रूप से माना जाता है।

यदि उच्च प्रति व्यक्ति उत्सर्जक देश 2050 तक शुद्ध शून्य प्राप्त करते हैं, तो 2022 में इनमें से किसी एक देश में जन्म लेने वाला बच्चा केवल 28 वर्ष की आयु तक उत्सर्जन उत्पन्न करेगा।

2050 के बाद, वे और उनके वंशज अतिरिक्त उत्सर्जन करना बंद कर देंगे। इसलिए उनके जीवनकाल के उत्सर्जन को जोड़ने से बहुत कम कार्बन विरासत प्राप्त होती है।

यह मानते हुए कि उत्सर्जन 2050 तक रैखिक रूप से शून्य हो जाता है, और यह कि बच्चा उस समय में प्रजनन नहीं करता है, 2022 में पैदा हुआ बच्चा प्रत्येक माता-पिता के जीवनकाल में कार्बन उत्सर्जन के सात साल जोड़ देगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि 2050 तक के 28 बरस में, एक रैखिक कमी को औसत (14 वर्ष) की कुल मात्रा के आधे के रूप में मॉडल किया जा सकता है, जिसमें प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चे के आधे कार्बन योगदान (सात वर्ष) के लिए जिम्मेदार होते हैं। बाद की पीढ़ियां शून्य उत्सर्जन करती हैं।

इस संभावित परिदृश्य और स्वीकृत ‘निरंतर उत्सर्जन’ परिदृश्य के बीच का अंतर स्पष्ट है। फिर भी यह बहुत कम परिणाम अभी भी बच्चा होने के कार्बन प्रभाव से और भी कम हो सकते है।

यह आंकड़ा मानता है कि एक बच्चा अपने निवास के देश की प्रति व्यक्ति दर पर अतिरिक्त उत्सर्जन का कारण होगा। हालांकि, बच्चे आमतौर पर वयस्कों की तुलना में कम उच्च-उत्सर्जन गतिविधियों में संलग्न होते हैं। वे अपने माता-पिता के साथ एक घर साझा करते हैं, और 2050 से पहले की अधिकांश अवधि के लिए अपनी कार नहीं चलाएंगे या काम पर नहीं जाएंगे।

विशेष रूप से निकट भविष्य में, जहां प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अपने उच्चतम स्तर पर है, एक बच्चा अपने देश के प्रति व्यक्ति औसत की तुलना में बहुत कम उत्सर्जन का कारण होगा।

शुद्ध शून्य प्रतिबद्धताओं को पूरा किया जाना चाहिए

शुद्ध शून्य की खोज उच्च प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वाले देशों में बच्चे के जन्म के जलवायु प्रभाव को बहुत कम कर सकती है। हालाँकि, यह इस प्रतिबद्धता की पूर्ति पर निर्भर है।

नेट जीरो की दिशा में प्रगति रुक ​​रही है, कई देशों में मौजूदा जलवायु नीति अपने वादों से पीछे है।

शुद्ध शून्य रणनीति होने के बावजूद, कार्बन तटस्थता की दिशा में यूके की प्रगति सीमित रही है। 2021 में यूके के उत्सर्जन में 4% की वृद्धि हुई क्योंकि अर्थव्यवस्था महामारी से उबरने लगी – और कई अन्य उच्च प्रति व्यक्ति उत्सर्जक देश एक समान स्थिति में हैं। प्रधान मंत्री लिज़ ट्रस की कैबिनेट नियुक्तियों ने ब्रिटेन की जलवायु लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता पर भी संदेह जताया है।

इसलिए 2008 के अध्ययन के हमारे पुनर्मूल्यांकन के बावजूद, कार्बन प्रभाव में जोरदार कटौती करना अभी दूर है।

एक समाज के रूप में, खुद को एक विश्वसनीय नेट जीरो पथ पर रखना हमारे बस में है। इसका अर्थ यह मानने की लोकप्रिय प्रवृत्ति को खारिज करना भी है कि जलवायु परिवर्तन को संस्थागत और संरचनात्मक परिवर्तन के बजाय व्यक्तिगत जीवन शैली समायोजन द्वारा संबोधित किया जाना चाहिए। अगर नेट जीरो हासिल कर लिया जाए तो पर्यावरण के अपराधबोध से ग्रसित हुए बिना बच्चे पैदा करना संभव होगा।

द कन्वरसेशन एकता एकता

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)