विश्वविद्यालय ऑनलाइन मूल्यांकन पर टिके रहे तो धोखाधड़ी रोकने के लिए कुछ करना होगा |

विश्वविद्यालय ऑनलाइन मूल्यांकन पर टिके रहे तो धोखाधड़ी रोकने के लिए कुछ करना होगा

विश्वविद्यालय ऑनलाइन मूल्यांकन पर टिके रहे तो धोखाधड़ी रोकने के लिए कुछ करना होगा

: , July 4, 2022 / 12:56 PM IST

मीना झा, पाठ्यक्रम समन्वयक, सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), सीक्यू विश्वविद्यालय, आस्ट्रेलिया

रॉकहैंपटन (ऑस्ट्रेलिया), चार जुलाई (द कन्वरसेशन) पिछले दो वर्ष के कोविड व्यवधानों के बाद अब जबकि स्कूल, कॉलेजों में सामान्य पढ़ाई दोबारा शुरू हो गई है, हमारे शोध से पता चलता है कि कम से कम कुछ ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय पूरी तरह से ऑनलाइन मूल्यांकन जारी रखने का इरादा रखते हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें लगता है कि ऑनलाइन धोखा देना आसान है। ऐसे भी कुछ सबूत हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई के चलन में आने के साथ इसमें वृद्धि हुई है।

फिर भी, 41 ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों को कवर करने वाले हमारे शोध में, इन समस्याओं का मुकाबला करने के लिए उनकी अकादमिक ईमानदारी नीतियों (जो सभी पाठ्यक्रमों पर लागू होती हैं) और प्रथाओं (जो अलग विषय के लिए अलग हो सकती हैं) में बदलाव के बहुत कम सबूत मिले हैं। हमारी विशेष रुचि कंप्यूटिंग पाठ्यक्रमों में थी।

ऑनलाइन परीक्षा के दौरान छात्रों की स्वचालित रूप से निगरानी करने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग, जिसे रिमोट प्रॉक्टरिंग के रूप में जाना जाता है, का प्रचलन बढ़ रहा है। सहज रूप से, इस तकनीक में धोखाधड़ी का पता लगाने के फायदे हैं। हालांकि, कई लोगों ने इन प्रणालियों की नैतिकता और प्रभावकारिता दोनों के बारे में चिंता जताई है।

शिक्षकों को अगर सिर्फ अपने छात्रों को शिक्षा प्रदान करना हो तो उनका जीवन कितना आसान होगा, लेकिन वे अपने छात्रों का आकलन करने के लिए बाध्य हैं। यह शिक्षा प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग है।

दुर्भाग्य से, कुछ लोग शिक्षा के बजाय मूल्यांकन के परिणामों को अंतिम लक्ष्य के रूप में देखते हैं।

नौकरी के लिए आवेदन करते समय छात्र इन परिणामों पर भरोसा करते हैं। नियोक्ता उन्हीं परिणामों पर भरोसा करते हैं जो उन्हें यह तय करने में मदद करते हैं कि कौन से स्नातकों को रोजगार देना है। जब इतना सब दॉव पर लगा हो तो, हमेशा ऐसे छात्र होंगे जो धोखा देने का विकल्प चुनते हैं।

कोविड ने आकलन प्रणाली में जल्दबाजी में बदलाव के लिए मजबूर किया

महामारी ने विश्वविद्यालयों को मूल्यांकन सहित कई प्रथाओं पर जल्दबाजी में पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। एक बड़ी चुनौती यह थी कि जब ये ऑनलाइन हो गए तो परीक्षा जैसे मूल्यांकन कार्यों की निगरानी कैसे की जाए।

शिक्षकों और शोधकर्ताओं ने बाद में अकादमिक कदाचार की घटनाओं में वृद्धि की सूचना दी है। अकादमिक कदाचार में धोखाधड़ी, नकल, मिलीभगत और गलत या नकली डेटा तैयार करना शामिल है।

हमारे विश्वविद्यालयों को अकादमिक ईमानदारी की रक्षा के लिए नीतियों और प्रथाओं को स्थापित करने की आवश्यकता है। इन नीतियों में धोखाधड़ी और अन्य कदाचार के जोखिम को कम करने के लिए अच्छी आदतों और कार्यों के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए। यूनीवर्सिटीज आस्ट्रेलिया ने सर्वोत्तम आदतों के सिद्धांतों को रेखांकित किया है।

हमारी शोध परियोजना ने कोविड के परिणामस्वरूप मूल्यांकन प्रथाओं में परिवर्तन का पता लगाया। हम यह देखना चाहते थे कि अकादमिक कदाचार को रोकने में ये कितने प्रभावी हो सकते हैं। हमने 41 ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में अकादमिक ईमानदारी नीतियों और प्रक्रियाओं की जांच की, जो कंप्यूटिंग पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं, इन विश्वविद्यालयों में अग्रणी कंप्यूटिंग शिक्षकों का साक्षात्कार किया और कंप्यूटिंग शिक्षाविदों का सर्वेक्षण किया।

अध्ययन में क्या मिला?

हमें इस बात के बहुत कम सबूत मिले हैं कि शैक्षणिक ईमानदारी नीतियां और प्रक्रियाएं स्पष्ट रूप से कोविड की वजह से पैदा हुई परिस्थितियों में प्रभावी हैं।

41 विश्वविद्यालयों में से 38 कंप्यूटिंग पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा प्रदान करते हैं। चार अपने अधिकांश कंप्यूटिंग पाठ्यक्रम ऑनलाइन/दूरस्थ मोड में प्रदान करते हैं। केवल एक ऑनलाइन/दूरस्थ मोड में कोई कंप्यूटिंग पाठ्यक्रम प्रदान नहीं करता है।

लेकिन देश भर में केवल पांच विश्वविद्यालय अपनी नीतियों में ऑनलाइन परीक्षा की संभावना को स्वीकार करते हैं। इन पांचों में भी ऑनलाइन और आमने-सामने मूल्यांकन कार्यों के बीच कोई नीतिगत अंतर नहीं है।

ऐसा प्रतीत होता है कि सामान्य शैक्षणिक अखंडता को नियंत्रित करने वाले नियम और कानून ऑनलाइन कार्यों सहित सभी मूल्यांकन कार्यों पर समान रूप से लागू होते हैं।

हमारे कुछ उत्तरदाताओं ने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान नीतियां प्रभावी नहीं हैं। एक विशेष चिंता एक छात्र के खिलाफ कदाचार का मामला तैयार करने में लगने वाला समय और प्रयास है।

एक अकादमिक ने कहा: “नकल के भारी सबूतों के बावजूद, छात्र जो भी बहाना देता है, उस पर अपने आप विश्वास कर लिया जाता है। साथ ही, छात्रों का दावा है कि कम सजा पाने के लिए उन्होंने अकादमिक इंटेग्रिटी मॉड्यूल में हिस्सा नहीं लिया है। यह हैरानी की बात है कि एक साल में तीन छात्रों ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि नकल करना क्या है […] फिर भी उन्हें सिर्फ चेतावनी दी गई और कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।’ कोविड ने छात्रों की जरूरतों और अपेक्षाओं को बदल दिया है। शोध बताते हैं कि कई छात्र अब ऑनलाइन पढ़ाई करना पसंद करते हैं। विश्वविद्यालयों को छात्रों की अधिक लचीलेपन की आवश्यकता पर विचार करना चाहिए, जिसमें ऑनलाइन परीक्षा की पेशकश भी शामिल है।

फिर भी, हमारे कई उत्तरदाताओं ने मूल्यांकन ऑनलाइन होने पर धोखाधड़ी और अन्य ईमानदारी उल्लंघनों में वृद्धि देखी। कुछ ने कहा कि यह छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों के कारण हो सकता है। एक अकादमिक ने कहा:

ऑनलाइन परीक्षा और परीक्षण एक बड़ी चुनौती थी। छात्रों ने कभी-कभी शिकायत की कि उनके लैपटॉप खराब हो गए, या उनका इंटरनेट कनेक्शन परीक्षण के दौरान बीच में ही टूट गया। ऐसे मामलों ने प्रश्नों के एक नए सेट को विकसित करने की आवश्यकता सामने आई।

ऑनलाइन शिक्षा की तरफ तत्काल मुड़ने की मजबूरी ने मूल्यांकन व्यवस्था में पर्याप्त बदलाव करने के लिए, वैसे भी, बहुत कम समय छोड़ा। पाठ्यक्रम जो व्यक्तिगत रूप से पर्यवेक्षित इन-क्लास परीक्षणों और अंतिम परीक्षाओं पर निर्भर थे, उनके साथ जारी रहे, बस व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण छोड़ दिया। कुछ मामलों में, 24-घंटे की परीक्षाओं ने दो या तीन-घंटे की परीक्षाओं की जगह ले ली, या छोटी परीक्षाएँ लंबी विंडो में आयोजित की गईं।

विश्वविद्यालयों में कक्षाएं फिर से शुरू होने के साथ, क्या विश्वविद्यालय पूर्व मूल्यांकन प्रणाली बहाल करेंगे, जिसमें इन-पर्सन टेस्ट और परीक्षा शामिल है? हमारे कुछ उत्तरदाताओं ने संकेत दिया कि उनके विश्वविद्यालय पूरी तरह से ऑनलाइन मूल्यांकन के साथ जारी रखने का इरादा रखते हैं। हमें किसी ने नहीं बताया कि उनके विश्वविद्यालय इन परिस्थितियों में अकादमिक ईमानदारी की बेहतर सुरक्षा के लिए अपनी नीतियों या प्रक्रियाओं में संशोधन कर रहे हैं।

द कन्वरसेशन एकता एकता

एकता

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

#HarGharTiranga