चीन के शासन के तहत हांगकांग को आये 25 साल हो गये |

चीन के शासन के तहत हांगकांग को आये 25 साल हो गये

चीन के शासन के तहत हांगकांग को आये 25 साल हो गये

: , July 1, 2022 / 05:04 PM IST

हांगकांग, एक जुलाई (एपी) ब्रिटेन द्वारा हांगकांग को चीनी शासन को सौंपे जाने के शुक्रवार को 25 साल हो गए। इससे संबंधित घटनाक्रम इस प्रकार है:-

चीन ने वादा किया था कि यह क्षेत्र ‘ एक देश और दो प्रणालियों’ के तहत 50 साल तक अपनी नागरिक, आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता को बहाल रख सकेगा। हालांकि, हाल के वर्षों में बीजिंग ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और एकत्र होने के अधिकार को काफी सीमित कर दिया है और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राजनीतिक विरोध को खत्म कर दिया है।

1841: चिंग राजवंश ने पहले अफीम युद्ध में हार के बाद हांगकांग द्वीप को ब्रिटेन को सौंप दिया। इसके बाद उस पर अगले साल से ब्रिटेन का शासन शुरू हो गया और उसने चाय से लेकर चीनी मिट्टी के बर्तन तक के व्यापार को बढ़ाने में मदद की जबकि चीन का नेतृत्व आंतरिक संघर्षों और घरेलू बाजार में विदेशी पहुंच की बढ़ती मांग से निपटता रहा।

1860: दूसरे अफीम युद्ध के बाद चिंग राजवंश ने हांगकांग द्वीप के सामने स्थित पर्वीतय क्षेत्र कौलून भी ब्रिटेन को सौंप दिया।

1898: ब्रिटेन ने चीन से कौलून के आसपास के बड़े हिस्से को चीन से 99 साल या 1997 तक के लिए पट्टे पर लिया। यह ग्रामीण इलाका था लेकिन मुख्य भूमि चीन के गड़बड़ी पैदा करने से एक बचाव क्षेत्र मुहैया कराता था और उपनिवेश के लिए आर्थिक व्यवहार्यता भी उपलब्ध कराता था। पट्टे के तहत हांगकांग को चीनी शासन को लौटाने का समय भी तय किया गया।

1941-1945: जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति तक हांगकांग पर कब्जा बरकरार रखा। ब्रिटिश, चीनी और मित्र राष्ट्रों की सेनाओं ने तीन हफ्ते तक मुकाबला किया लेकिन उन्हें बाद में आत्मसमर्पण करना पड़ा। जापान द्वारा युद्ध के समय में किए गए अत्याचार कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रवादी अपील में मुख्य विषय रहा।

1984: ब्रिटेन ‘एक देश, दो प्रणालियों’ की रूपरेखा के तहत चीन को 1997 में हांगकांग सौंपने को राज़ी हो गया। इस रूपरेखा के तहत शहर की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था 50 साल तक कायम रहने की बात कही गई। चीन-ब्रिटेन का संयुक्त समझौता संयुक्त राष्ट्र में पंजीकृत है। हालांकि बीजिंग का अब कहना है कि यह अमान्य हो गया है और वह अन्य देशों द्वारा की जाने वाली किसी भी प्रकार की आलोचना को खारिज करता है और इसे अपने अंदरूनी मामले में हस्तक्षेप बताता है।

1997: हांगकांग एक समारोह में चीन की सरकार को सौंप दिया जाता है। इस समारोह में ब्रिटेन के राजुकमार चार्ल्स और चीन के राष्ट्रपति जियांग ज़ेमीन ने शिरकत की। इसके कुछ घंटे के बाद ही चीन की पीपल्स लिबेशन आर्मी के सैनिक शहर में घुस गये जो औपनिवेशिक शासन के अंत का सार्वजनिक प्रदर्शन था।

2003: चीन को सौंपे जाने के बाद हांगकांग में सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ और हजारों लोगों ने प्रस्तावित राष्ट्रीय सुरक्षा विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया। यह विधेयक चीन की सरकार के खिलाफ विद्रोह को अपराध करार देता था। हालांकि इसे वापस ले लिया गया और इसे नागरिक संगठनों की जीत मानी गई।

2014: हांगकांग के नेता के प्रत्यक्ष चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने 79 दिन तक सरकार के मुख्यालय की घेराबंदी की लेकिन उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिली। प्रदर्शनों में युवा पीढ़ी के कार्यकर्ता शामिल थे जो चीनी नेतृत्व की बढ़ती दखलअंदाज़ी के खिलाफ ज्यादा आज़ादी की मांग कर रहे थे।

2017: चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग हांगकांग को चीन की हुकूमत को सौंपने के 20 साल पूरे होने के मौके पर शहर में आए। इस दौरान दिए भाषण में उन्होंने कहा कि बीजिंग कोई भी विरोध स्वीकार नहीं करेगा। लंबे वक्त तक लोक सेवक रहीं और बीजिंग की करीबी कैरी लाम हांगकांग की मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त की गईं और उनकी कोशिश शहर के अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र के दर्जे को बनाए रखते हुए चीन की मर्जी को लागू करने की थी।

2019: हांगकांग में फिर से प्रदर्शन भड़के। इस बार एक विधेयक को लेकर प्रदर्शन हुए जिसमें स्थानीय लोगों और शहर में रहने वाले लोगों को मुकदमे की सुनवाई के लिए मुख्य भूमि चीन भेजे जाने का प्रावधान किया गया था। विधेयक को वापस ले लिया गया जबकि प्रदर्शन जारी रहे और इनमें ज्यादा छात्र और युवा थे जो प्रतिनिधित्व और मौकों की कमी की वजह से निराश थे।

2020: प्रदर्शनकारियों, विपक्षी नेताओं और स्वतंत्र मीडिया पर भारी कार्रवाई के बाद चीन की संसद ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर दिया जिसके तहत, सरकार की आलोचना करने वाले हज़ारों लोगों को जेल भेज दिया गया जबकि अन्य ने विदेश में शरण मांगी या वे चुप हो गए।

2022: पूर्व सुरक्षा प्रमुख जॉन ली हांगकांग के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी बने। उनके चुनाव को दिखावा माना गया क्योंकि चुनाव में सिर्फ वही एकमात्र उम्मीदवार थे। ली हांगकांग और चीन के उन अधिकारियों में शामिल हैं जिनपर अमेरिका और यूरोपीय देशों ने मानवाधिकारों के हनन को लेकर वीज़ा प्रतिबंध लगा रखे हैं।

एपी नोमान सुभाष

सुभाष

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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