कजाकिस्तान: विरोध प्रदर्शनों से रक्तपात तक पहुंची स्थिति

कजाकिस्तान: विरोध प्रदर्शनों से रक्तपात तक पहुंची स्थिति

Edited By: , January 15, 2022 / 04:38 PM IST

अल्माटी, 15 जनवरी (एपी) कजाकिस्तान में नए साल के सप्ताहांत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुए, जिनमें शामिल लोगों ने ईंधन की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि की निंदा की। ये प्रदर्शन मध्य एशियाई राष्ट्र के पश्चिमी भाग से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों तक तेजी से फैल गए और विरोध प्रदर्शनों की चिनगारी अंततः देश के सबसे बड़े शहर अल्माटी तक भी पहुंच गई।

एक हफ्ते के अंदर घटनाक्रम तेजी से बदला ।अल्माटी में हथियारबंद लोगों के समूह दिखाई दिए, जिनमें से कुछ को बिना नंबर प्लेट वाली कारों में सवार देखा गया या उनके चेहरे ढके हुए थे। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों का कहना है कि इन लोगों ने सरकारी इमारतों पर धावा बोलने का आग्रह करना शुरू कर दिया, उन्हें हथियार देने का वादा किया।

जल्द ही पुलिस के साथ संघर्ष शुरू हो गया और पांच जनवरी की रात तक अल्माटी में अफरातफरी मच गई। सिटी हॉल जल रहा था और कार, बसों तथा दुकानों को लूट लिया गया। इसके साथ ही राष्ट्रपति आवास पर धावा बोलने का प्रयास किया गया। सड़कों पर गोलियों की आवाज सुनाई दी, इंटरनेट बंद कर दिया गया, और यहां तक ​​कि हवाई अड्डे पर भी कुछ समय के लिए कब्जा कर लिया गया।

राष्ट्रपति कसीम-जोमार्त तोकायेव ने कहा है कि अशांति के लिए ‘आतंकवादी’ जिम्मेदार हैं जिन्हें विदेशी प्रशिक्षण और समर्थन प्राप्त है।

लेकिन उन घटनाओं के लगभग दो सप्ताह बाद, जिनमें बड़ी संख्या में मौतें हुईं और लगभग 16,000 गिरफ्तारियां हुईं, सरकार ने बाहरी संलिप्तता के अपने आरोप के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया है।

यह स्पष्ट नहीं है कि क्या ये अधिक हिंसक लोग दुकानों को लूटने और तोड़फोड़ करने के लिए तबाही का फायदा उठाने वाले व्यक्ति थे, या वे बड़े राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित संगठित समूहों का हिस्सा थे।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी रैलियों के महत्व को किसी तरह कमतर कर दिया गया और फिर सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की। तोकायेव ने कहा है कि अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं किया।

हालांकि विरोध ईंधन की ऊंची कीमतों को लेकर शुरू हुआ, लेकिन प्रदर्शनों का दायरा और एजेंडा तेजी से विस्तारित हुआ। ऊर्जा संपन्न राष्ट्र में तीन दशकों से अधिक समय से सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने वाली सरकार के तहत लगातार बिगड़ती स्थिति और बढ़ती असमानता के चलते हताशा और निराशा में भीड़ प्रमुख शहरों में उमड़ पड़ी।

ज्यादातर यह सब देश के लंबे समय तक शासक रहे नूरसुल्तान नज़रबायेव के अधीन हुआ जिन्होंने 2019 में अपने उत्तराधिकारी तोकायेव के पक्ष में पद छोड़ दिया लेकिन पर्दे के पीछे से अपना प्रभाव बनाए रखा।

मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं लिबर्टी फाउंडेशन के अध्यक्ष गालिम एगेलुओव का कहना है, ‘लोगों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वे हैं जो अधिकारियों के प्रति अपना रवैया व्यक्त करने के लिए अपने दिल की आवाज पर आए, क्योंकि वे निराश हुए हैं, क्योंकि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि राज्य उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है।’

तोकायेव ने शुरू में ईंधन की कीमतों में वृद्धि पर 180 दिन की रोक की घोषणा करके और नज़रबायेव को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख के रूप में पद से हटाकर भीड़ को शांत करने की कोशिश की। उनके इस कदम को व्यापक रूप से सत्ता को मजबूत करने के क्रम में पूर्व नेता के संरक्षण को समाप्त करने के प्रयास के रूप में देखा गया।

लेकिन विरोध जारी रहा और अल्माटी में शांतिपूर्ण रैलियों के बीच हिंसा बढ़ गई।

बेज़शान नाम के एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि पांच जनवरी को हथियारबंद लोगों ने भीड़ में मौजूद युवाओं से संपर्क किया और उन्हें एक थाने पर धावा बोलने में मदद करने तथा हथियार देने की बात कही।

बेकेन नाम के एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि उसने उस दिन रैली में ‘उकसाने वाले लोग’ भी देखे जिन्होंने पुलिस पर हमले करने को कहा।

उसने कहा, ‘हमने उन्हें जितना हो सका, रोकने की कोशिश की और कहा कि हमें हथियारों की जरूरत नहीं है, हम शांतिपूर्ण रैली के लिए निकले हैं।’

छह जनवरी को सुरक्षाबलों की गोलीबारी में दर्जनों प्रदर्शनकारी मारे गए और कम से कम 12 अधिकारियों के भी मारे जाने की खबर है। अगले दिन, तोकायेव ने घोषणा की कि उन्होंने हिंसक अशांति को रोकने के लिए सुरक्षाबलों को गोली चलाने के आदेश दिए थे।

अल्माटी पुलिस की प्रवक्ता साल्टिनत अज़ीरबेक ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमलावरों ने कोई मांग नहीं रखी। वे जानबूझकर चीजों को नष्ट करने और हत्या करने आए थे।’

रक्तपात के बीच, तोकायेव ने सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (छह पूर्व सोवियत राज्यों के रूस के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन) से सैनिकों को भी बुलाया, जिन्होंने व्यवस्था बहाल करने में मदद की।

मराट नाम के एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि पड़ोसी किर्गिस्तान के जाने-माने जैज पियानोवादक विक्रम रुजाखुनोव की अत्यधिक प्रचारित गिरफ्तारी को छोड़कर अधिकारियों ने ‘अब तक हमें एक भी आतंकवादी नहीं दिखाया है।’

संगीतकार अपनी गिरफ्तारी के बाद कज़ाक टेलीविजन पर दिखाई दिए जिनके चेहरे पर बड़े घाव थे। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए उन्हें पैसे देने का वादा किया गया था।

किर्गिस्तान के अधिकारियों ने रुज़ाखुनोव की गिरफ्तारी का विरोध किया और उनकी रिहाई की मांग की। कुछ ही समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया और किर्गिस्तान लौटने पर उन्होंने कहा कि कज़ाक टीवी पर उनका बयान झूठा था। उन्होंने कहा कि सच यह है कि वह अल्माटी में एक दोस्त से मिलने गए थे।

एपी नेत्रपाल उमा

उमा