उपभोक्ताओं के आंकड़ों को गोपनीय रखने से डिजिटल मंचों की विश्वसनीयता पर उठते हैं सवाल

उपभोक्ताओं के आंकड़ों को गोपनीय रखने से डिजिटल मंचों की विश्वसनीयता पर उठते हैं सवाल

: , May 18, 2022 / 02:45 PM IST

(फेबियो मोरिले, ऑकलैंड विश्वविद्यालय)

ऑकलैंड, 18 मई (360 इंफो) डिजिटल मंच प्रायः हमारी पसंद की सामग्री का सुझाव देते हैं। सुविधा की दृष्टि से यह वरदान है लेकिन डेटा संकलन को गोपनीय रखना कई प्रकार का सवाल खड़े करता है। करोड़ों लोगों को डिजिटल मंचों से सुझाव प्राप्त होते हैं जिससे उनकी दैनिक चर्या प्रभावित होती है। वे अगली श्रृंखला कौन सी देखें, छुट्टियां मनाने कहां जाएं, उनकी पसंद का अगला गाना कौन सा हो इत्यादि सुझाव डिजिटल मंचों के एल्गोरिदम से तय होते हैं।

इन मंचों को इस प्रकार के सुझाव देने के लिए अपने उपभोक्ताओं के अधिक से अधिक आंकड़े एकत्र करने की जरूरत होती है। मगर कंपनियां जिस बड़ी मात्रा में आंकड़े एकत्र करती हैं और उसका इस्तेमाल करती हैं वह अब भी एक रहस्य है। हाल के अनुसंधान में पाया गया है कि ‘स्पॉटीफाई’ और ‘टिंडर’ बड़े स्तर पर अपने उपभोक्ताओं के आंकड़े जुटा रही हैं।

इन मंचों की इस्तेमाल की शर्त और निजता की नीतियों के संस्करणों के विश्लेषण के जरिये पता चला है कि ‘स्पॉटीफाई’ अपने उपभोक्ताओं की तस्वीरें, लोकेशन, आवाज के आंकड़े और भुगतान के विवरण जैसे निजी आंकड़े एकत्र करता है।

दोनों कंपनियां अपने उपभोक्ताओं से प्राप्त आंकड़ों को स्पष्ट रूप से नहीं बतातीं। स्पॉटीफाई कहता है कि वह “विपणन, प्रोमोशन और विज्ञापन के लिए” डेटा एकत्र करता है। सवाल उठता है के स्पॉटीफाई जैसा डिजिटल मंच आवाज के आंकड़े क्यों जुटाता है?

कंपनी की वेबसाइट पर विभिन्न प्रकार के आंकड़े जुटाने के लिए कई प्रकार के कारण बताए गए हैं लेकिन अन्य मंचों की तरह ये भी स्पष्ट नहीं हैं और इनकी अलग-अलग व्याख्या की जा सकती है। लेकिन अगर कारण बताए भी गए होते तो यह जानने का कोई तरीका नहीं था कि जो बताया जा रहा है वह सच है या नहीं।

इस एल्गोरिदम के पीछे के ‘कोड’ को सुरक्षित रखा जाता है और डिजिटल मंचों को इन्हें जाहिर करने के लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। स्पॉटीफाई ने 2021 की अपनी नीति में कहा था कि उसके सुझावों में कुछ उपभोक्ताओं के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है।

उपभोक्ताओं की पसंद के बारे में “निष्कर्ष निकालने” का कंपनी के पास अधिकार है और उसका कहना है कि पसंद की सामग्री केवल उपभोक्ताओं के आंकड़ों नहीं बल्कि तीसरे पक्ष से साथ स्पॉटीफाई के व्यावसायिक करार से भी तय होती है।

स्पॉटीफाई जिसे उपभोक्ता विशेष की रुचि की सामग्री कह कर उसका प्रचार करती है वह चीजें उपभोक्ता द्वारा सुनी गई सामग्री के आंकड़े से अलग चीजों से भी प्रभावित होता है जिसमें कलाकारों और संगीत एल्बम से किया गया करार शामिल है। यह दो चरणों में अपनाई गई एक शोषणकारी रणनीति है जिससे उपभोक्ता की पसंद, विकल्प और पहचान बताने के साथ ही उसकी निजता और अधिकारों का हनन किया जाता है।

पहले चरण में उपभोक्ताओं का जितना हो सकता है आंकड़ा एकत्र किया जाता है। एक बार इस आंकड़े को व्यवस्थित करने के बाद, उपभोक्ता के ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यवहार का आकलन किया जाता है। जिस अपारदर्शी तरीके से डिजिटल मंच उपभोक्ता के आंकड़े जुटाते और इस्तेमाल करते हैं उससे पता चलता है कि तकनीक की सहायता से किस प्रकार ताकत का प्रयोग कर गोपनीय ढंग से व्यक्ति के व्यवहार को दिशा दी जा सकती है।

साइबर जगत की नियम रहित दुनिया में डिजिटल मंचों को अपने क्रियाकलाप साझा करने की बाध्यता नहीं होती। कानूनी बाध्यताओं से मुक्त रहने के साथ ही जो कंपनियां आंकड़े एकत्र करती हैं वे अपनी ताकत को कई प्रकार से मजबूत करती हैं। कंपनियां खुद ही अपनी शर्तें और निजता की नीतियां तय करती हैं और इन्हें कभी भी बदला जा सकता है।

साइबर जगत को और लोकतांत्रिक बनाने के लिए नियामक हस्तक्षेप ही एकमात्र रास्ता हो सकता है। यूरोपीय संघ ने इस दिशा में कदम उठाए हैं। यूरोपीय संसद और परिषद ने 22 मार्च 2022 को ‘डिजिटल सेवा कानून’ को मंजूरी दी ताकि एक सुरक्षित और उत्तरदायी ऑनलाइन वातावरण तैयार किया जा सके।

(360 इंफो) यश नेत्रपाल

नेत्रपाल

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)