नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम देने से अंजाम देने वाला दोषमुक्त नहीं हो जाता: भारत
नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम देने से अंजाम देने वाला दोषमुक्त नहीं हो जाता: भारत
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, नौ जून (भाषा) भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए ‘‘व्यापार और पारगमन को बाधित करने वाली उसकी गतिविधियों’’ तथा अफगानिस्तान पर सैन्य हवाई हमलों की निंदा की। साथ ही पाकिस्तान के ‘‘फितना अल-हिंदुस्तान’’ निर्देश को धार्मिक शब्दावली में लिपटी ‘‘आधिकारिक रूप से प्रायोजित दुष्प्रचार’’ करार दिया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने सोमवार को ‘अफगानिस्तान की स्थिति’ पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान पाकिस्तान पर तीखा हमला किया।
पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान के सैन्य हवाई हमलों के अभियान से बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हो रहे हैं और अफगान जनता को भारी पीड़ा झेलनी पड़ रही है…हिंसा के ऐसे निंदनीय कृत्य अफग़ानिस्तान की संप्रभुता पर खुला हमला हैं और क्षेत्र की शांति एवं स्थिरता के लिए खतरा हैं।’’
अफगान धरती पर हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए भारत ने कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राज्य संप्रभुता के सिद्धांत का घोर उल्लंघन हैं।
पर्वतनेनी ने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) की जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि इस साल के पहले तीन महीनों में ही 372 नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए हैं; इनमें से अधिकतर लोगों की मौत रमजान के महीने के दौरान हुईं जो शांति, दया और चिंतन का समय होता है जिससे यह कृत्य और भी निंदनीय हो जाता है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की बैठक में कहा, ‘‘कोई भी धर्म, कोई भी कानून और कोई नैतिकता ऐसे कृत्यों को उचित नहीं ठहरा सकती।’’
पाकिस्तान की मौजूदगी में भारत ने दृढ़ता से दोहराया कि ‘‘किसी भी नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम देने से इसे अंजाम देने वाला दोषमुक्त नहीं हो जाता। नागरिकों की हत्या, उनका अंग भंग करना और उन्हें अनाथ कर देना आतंकवाद विरोधी कार्रवाई नहीं है।’’
पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘पवित्र रमजान के महीने में बेरहमी से हवाई हमले करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के उच्च सिद्धांतों और इस्लामी एकजुटता की बात करना पाखंड का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘अपनी असफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है। दुनिया को गुमराह करने का यह प्रयास विफल होगा।’’
पाकिस्तान ने अपनी सीमा के भीतर सक्रिया विद्रोही समूहों और संगठनों को ‘फितना अल हिंदुस्तान’ कहने का निर्देश दिया है जिसे पर्वतनेनी ने दृढ़ता से खारिज करते हुए इसे भारत के खिलाफ ‘‘नफरत की एक संगठित फैक्टरी’’ का परिणाम बताया।
पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘आधिकारिक अधिसूचनाएं जारी करना, पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों को अपनी सीमाओं के भीतर के विद्रोही समूहों को ‘फितना अल हिंदुस्तान’ कहना शुरू करने का निर्देश देना धार्मिक शब्दावली में लिपटी आधिकारिक रूप से प्रायोजित गलत सूचना और दुष्प्रचार के अलावा और कुछ नहीं है।’’
भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘27वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से सेना द्वारा किया गया वास्तविक तख्तापलट इसका सबसे हालिया उदाहरण मात्र है।’’
पर्वतनेनी पिछले वर्ष नवंबर में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यकाल में पारित 27वें संवैधानिक संशोधन का जिक्र कर रहे थे, जो पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को किसी भी कानूनी अभियोजन से आजीवन छूट प्रदान करता है।
इसके अलावा, भारत ने पाकिस्तान द्वारा अफगान व्यापारियों को निशाना बनाने वाली ‘व्यापार और पारगमन को बाधित करने वाली गतिविधियों की भी निंदा की और इसे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मानकों का उल्लंघन बताया।
अफगान निर्यात का प्रमुख गंतव्य भारत, अफगान वस्तुओं को भारतीय बाजारों में बिना किसी शुल्क के प्रवेश की सुविधा प्रदान कर रहा है और भारत-अफगानिस्तान के बीच एक समर्पित हवाई माल ढुलाई गलियारा भी शुरू कर चुका है।
पर्वतनेनी ने कहा कि भारत अफगान व्यापारियों को सैकड़ों मुफ्त दीर्घकालिक व्यापार वीजा जारी करके भी उनका समर्थन कर रहा है जो पाकिस्तान द्वारा ‘‘व्यापार के लिए मार्ग से इनकार’’ किए जाने के कारण पीड़ित हैं।
भाषा सुरभि अमित
अमित

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