मोदी ने ‘जलवायु न्याय’ और भारत-सेशेल्स के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान किया
मोदी ने ‘जलवायु न्याय’ और भारत-सेशेल्स के बीच मजबूत सहयोग का आह्वान किया
(तस्वीरों के साथ)
विक्टोरिया (सेशेल्स), 28 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की संसद को संबोधित करते हुए न्यायसंगत जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित किया और कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’, विशेष रूप से द्वीप राष्ट्र, जलवायु परिवर्तन का खामियाजा भुगत रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु कार्रवाई को ‘‘निष्पक्षता, जिम्मेदारी और समता’’ पर आधारित होना चाहिए।
उन्होंने समुद्री अर्थव्यवस्था और डिजिटल नवाचार के क्षेत्रों में भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया।
मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पहले से ही समुद्र तट, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, मौसम के पैटर्न और समुदायों पर दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी दोहराया कि जिन देशों ने जलवायु परिवर्तन में सबसे कम योगदान दिया है, उनपर इसके परिणामों का सबसे बड़ा बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।
मोदी ने कहा कि भारत सेशेल्स के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकासशील छोटे द्वीपीय देशों की चिंताओं पर उचित ध्यान दिया जाए।
उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स एक ऐसी दुनिया का दृष्टिकोण साझा करते हैं, जहां विकास अधिक समावेशी हो। उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
मोदी ने कहा, ‘‘यही वह भावना है जो ‘ग्लोबल साउथ’ को एकजुट करती है, और यही दृष्टिकोण है जो भारत और सेशेल्स मिलकर आगे बढ़ाते रहेंगे।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हिंद महासागर में भारत के लिए सेशेल्स एक विशेष स्थान रखता है। हिंद महासागर भारत और सेशेल्स को अलग नहीं करता, बल्कि यह हमें जोड़ता है।’’
उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली इस द्वीप राष्ट्र को द्वीपों के एक समूह से कहीं अधिक समझता है। मोदी ने इसे लगभग 14 लाख वर्ग किलोमीटर तक फैले समुद्री क्षेत्र के साथ ‘‘एक छोटा द्वीप देश नहीं, बल्कि एक बड़ा समुद्री देश’’ बताया।
मोदी ने मत्स्य पालन, समुद्री विज्ञान, तटीय प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने का भी प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा, ‘‘साथ मिलकर, हम मत्स्य पालन, समुद्री विज्ञान, तटीय प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन में साझेदारी बना सकते हैं।’’
सहयोग के एक और अहम क्षेत्र के तौर पर डिजिटल नवाचार का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने यह दिखाया है कि प्रौद्योगिकी किस तरह मौके बढ़ा सकती है, शासन को बेहतर कर सकती है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे सकती है तथा करोड़ों लोगों तक सेवाएं पहुंचा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब सेशेल्स अपने डिजिटल बदलाव की दिशा में आगे बढ़ेगा, तो भारत को अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करके खुशी होगी।
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि भारत सेशेल्स का भरोसेमंद साथी बना रहेगा, उसकी उम्मीदों का समर्थन करेगा और एक दोस्त के तौर पर उसके साथ खड़ा रहेगा।
भाषा शफीक सुरेश
सुरेश

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