नासा के अंतरिक्ष यान ने मारी क्षुद्रग्रह को टक्कर, तस्वीरों में कैद हुए ‘डार्ट’ मिशन के अंतिम क्षण |

नासा के अंतरिक्ष यान ने मारी क्षुद्रग्रह को टक्कर, तस्वीरों में कैद हुए ‘डार्ट’ मिशन के अंतिम क्षण

नासा के अंतरिक्ष यान ने मारी क्षुद्रग्रह को टक्कर, तस्वीरों में कैद हुए ‘डार्ट’ मिशन के अंतिम क्षण

: , September 28, 2022 / 05:39 PM IST

(डेविड बर्नहर्ट, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफॉर्निया)

सैन फ्रांसिस्को, 28 सितंबर (द कन्वरसेशन) दुनिया में पहली बार, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के एक अंतरिक्ष यान ने परीक्षण के तहत एक क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) को सफलतापूर्वक टक्कर मारी है। ‘डबल एस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट’ (डार्ट) नामक अंतरिक्ष यान के जरिए किए गए इस परीक्षण से वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या पृथ्वी की तरफ आने वाले किसी उल्कापिंड को टक्कर मारकर उसकी दिशा बदली जा सकती है, ताकि धरती की रक्षा हो सके।

डेविट बर्नर्ट सदर्न कैलिफॉर्निया यूनिवर्सिटी में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रोफेसर और अंतरिक्ष इंजीनियरिंग अनुसंधान केंद्र के निदेशक हैं। उन्होंने नासा के इस सफल मिशन का सीधा प्रसारण देखा और अब तक जो मालूम हुआ है, उसका वर्णन किया है।

1. तस्वीरें क्या दर्शाती हैं? ‘डार्ट’ में लगे कैमरे से ली गई पहली तस्वीर में दोहरी क्षुद्रग्रह प्रणाली ‘डिडिमोस’ को दिखाया गया है, जिसका व्यास लगभग 2,500 फुट (780 मीटर) है। छोटे क्षुद्रग्रह ‘डिमोर्फोस’ इसकी परिक्रमा कर रहे हैं, जिनकी लंबाई लगभग 525 फुट (160 मीटर) है।

‘डार्ट’ में लगे एल्गोरिद्म के ‘डिमोर्फोस’ को टक्कर मारने के बाद, वह (डार्ट) उड़ान में संतुलन बिठाता है और दो छोटे क्षुद्रग्रहों की ओर बढ़ने लगता है। टक्कर मारने से 11 सेकेंड पहले और ‘डिमोर्फोस’ से मील (68 किलोमीटर) दूर से ली गई तस्वीर में इस क्षुद्रग्रह का बीच का हिस्सा दिखाई दिया है।

इसका मतलब है कि एल्गोरिद्म का निशाना काफी सटीक था और यान ने ‘डिमोर्फोस’ के बीच में टक्कर मारी।

दूसरी तस्वीर टक्कर से दो सेकेंड पहले ली गई। इस तस्वीर में ‘डिमोर्फोस’ की चट्टानी सतह और छोटी-छोटी छाया दिखाई दे रही हैं। ये छायाएं इसलिए दिलचस्प हैं क्योंकि इससे पता चलता है कि ‘डार्ट’ अंतरिक्ष यान पर लगा कैमरा ‘डिमोर्फोस’ की सीध में आगे बढ़ रहा था और सूर्य कैमरे के पीछे की ओर था।

इसका मतलब है कि ‘डार्ट’ अंतरिक्ष यान उस समय ‘डिमोर्फोस’ को टक्कर मारने के लिए अपनी सीधी दिशा में चल रहा था, लेकिन यह भी संभव है कि क्षुद्रग्रह धीरे-धीरे घूम रहा हो और उसी वक्त कैमरे ने उसे कैद किया हो।

अंतिम तस्वीर, टक्कर से एक सेकंड पहले ली गई। इसमें केवल एक छवि का सबसे ऊपरी हिस्सा दिख रहा है लेकिन यह अविश्वसनीय रूप से रोमांचक है। तथ्य यह है कि नासा को छवि का केवल एक हिस्सा प्राप्त हुआ है, इसका मतलब है कि कैमरे ने चित्र तो लिया, लेकिन लगभग 14,000 मील प्रति घंटे (22,500 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ्तार से आगे बढ़ रहा ‘डार्ट’ टक्कर से पहले पूरी तस्वीर को कैद नहीं कर पाया।

2. क्या होना था?

‘डार्ट’ मिशन का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या किसी क्षुद्रग्रह को टक्कर मारकर उसकी दिशा बदलना संभव है। नासा ने एक गोल्फ कार्ट से मिस्र के पिरामिड के एक किनारे को टक्कर मारी ताकि ‘डार्ट’ और दो क्षुद्रग्रहों में से एक ‘डिमोर्फोस’ के आकार में सापेक्षित अंतर का पता लगाया जा सके।

परीक्षण से पहले, ‘डिमोर्फोस’ लगभग 16 घंटे तक ‘डिडिमोस’ की परिक्रमा कर चुका था।

नासा को उम्मीद है कि इस टक्कर से ‘डिमोर्फोस’ की कक्षा लगभग 1 प्रतिशत छोटी हो गई होगी।

3. हम पहले से क्या जानते हैं?

टक्कर से ठीक पहले ‘डार्ट’ अंतरिक्ष यान से आए आंकड़े बताते हैं कि इस मिशन का सफल होना तय था। तथ्य यह है कि यान के लक्ष्य तक पहुंचने के बाद तस्वीरें आनी बंद हो गईं, इसका मतलब केवल यह हो सकता है कि टक्कर सफल रही।

एक ओर, ‘डार्ट’ द्वारा ली गई तस्वीरों से बहुत सी जानकारी मिलने की संभावना है, तो दूसरी ओर दुनिया को यह जानने के लिए इंतजार करना होगा कि क्या यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा।

परीक्षण से पंद्रह दिन पहले, ‘डार्ट’ ने एक उपग्रह को खुद से अलग किया, जिसपर कैमरा लगा हुआ था। इस कैमरे को पूरी टक्कर का दस्तावेजीकरण करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस छोटे उपग्रह के सेंसरों का काम चित्र लेना और जानकारी एकत्र करना था। हालांकि इसमें एक बड़ा एंटीना नहीं लगा हुआ था, जिसके देखते हुए ऐसा लगता है कि आने वाले हफ्तों में तस्वीरों को धीरे-धीरे एक एक करके प्रेषित किया जाएगा।

(द कन्वरसेशन) जोहेब माधव

माधव

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)