नयी बिजली योजनाएं बदल सकती हैं स्थिति |

नयी बिजली योजनाएं बदल सकती हैं स्थिति

नयी बिजली योजनाएं बदल सकती हैं स्थिति

: , September 23, 2022 / 03:55 PM IST

(स्टेफ़नो गैलेली, सिंगापुर यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड डिज़ाइन)

सिंगापुर, 23 सितंबर (36 इन्फो) मेकांग क्षेत्र में विकासशील देशों को लंबे समय से सस्ती, सुलभ बिजली और टिकाऊ नदी प्रबंधन के बीच चयन करना पड़ा है। अब ऐसा जरूरी नहीं है कि ऐसा लंबे समय तक किया जाए।

मेकांग में विकासशील देशों को कठिन व्यापार का सामना करना पड़ता है। उनके समुदायों को जीवन की गुणवत्ता और आर्थिक विकास के लिए सस्ती ऊर्जा तक अधिक पहुंच की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें जलवायु परिवर्तन संबंधी कार्रवाई की भी आवश्यकता है।

कई देशों को मेकांग के बड़े नदी बेसिन और कार्बन मुक्त, सस्ती बिजली के स्रोत पनबिजली के लिए इसकी अप्रयुक्त क्षमता को लेकर समझौते की स्थिति का सामना करना पड़ा है। बड़े बांधों में संग्रहित, बिजली जनरेटर से जुड़े टर्बाइन को स्पिन करने के संबंध में बहते पानी का उपयोग कर विद्युत उत्पन्न की जाती है।

अकेले निचले बेसिन में अब 90 से अधिक जलविद्युत बांध हैं। जलविद्युत न केवल जीवाश्म ईंधन की तुलना में कम कार्बन डाईऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन करती है, बल्कि बिजली उत्पादन में उपयोग किया जाने वाला पानी बाद में नदी में वापस आ जाता है।

हालांकि, बांध नदियों के जीवनरक्त कहे जाने वाले प्राकृतिक प्रवाह को बदल देते हैं और कभी-कभी इसे रोक देते हैं तथा तलछट और पोषक तत्वों के परिवहन को सीमित कर देते हैं। जलविद्युत बांध भी मत्स्य पालन उत्पादकता को कम करते हैं, स्थानीय समुदायों की अर्थव्यवस्थाओं को बाधित या नष्ट करते हैं।

इसे लगातार एक आवश्यक समझौते के रूप में लिया गया है: विकासशील देशों के पास या तो सुलभ बिजली हो सकती है, या एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र हो सकता है, लेकिन दोनों नहीं।

नए अनुसंधान ने समीकरण बदल दिया है। मेकांग देशों- थाईलैंड, लाओस और कंबोडिया के लिए भविष्य में बिजली की मांग और सीओ2 उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ठोस अवसर मौजूद हैं, बिना उतने जलविद्युत बांधों की आवश्यकता के, जैसा कि वर्तमान में योजना बनाई गई है।

सौर और पवन ऊर्जा जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों की घटती लागत के संबंध में कोई समझौता समाधान देने में सक्षम नहीं है। मेकांग में प्रचुर मात्रा में फोटोवोल्टिक क्षमता है, जिसका अर्थ है कि इसमें ऐसी तकनीक का उपयोग करने की क्षमता है जो प्रकाश को सीधे बिजली में बदल सकती है।

इसका दोहन करने से व्यवसाय और निवेशक पर्यावरण की दृष्टि से कम टिकाऊ जलविद्युत व्यवस्था से दूसरे विकल्प पर जा सकते हैं।

सौर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल को ग्रेटर मेकांग क्षेत्र के किसी भी प्रांत में मापनीय और तैनाती योग्य होने का भी फायदा है, जिसका अर्थ है कि लंबी दूरी के बिजली हस्तांतरण को लागू करने के लिए कम लागत आएगी।

देशों के बीच क्षेत्रीय रूप से समन्वित बिजली खरीद समझौते भी जलविद्युत बांधों को कम आवश्यक बनाने में मदद कर रहे हैं। केंद्रों के बीच बिजली के पुनर्वितरण समझौते प्रत्येक विकासशील देश पर व्यक्तिगत बोझ को कम करने में मदद करते हैं, अमीर देशों को मेकांग के पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में सहायता करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिससे सभी पक्ष लाभान्वित होते हैं। वितरित उत्पादन संसाधनों के एकीकरण का समर्थन करने में, यह साझेदारी एक स्थायी दीर्घकालिक बिजली केंद्र बनाने में मदद करती है।

इन कार्यों को करने से देशों को कई विकल्प मिलने चाहिए: वे जलविद्युत बांधों से पूरी तरह से दूर हो सकते हैं, जो योजना बनाई गई है उसके केवल एक अंश का निर्माण कर सकते हैं या कम निर्माण के साथ आगे बढ़ सकते हैं। यदि देश अक्षय ऊर्जा-आधारित समाधान को अपनाते हैं, तो अभी भी बनाए जा रहे योजनाबद्ध बांधों के 82 प्रतिशत हिस्से के साथ सीओ2 लक्ष्यों को पूरा किया जा सकता है।

उपरोक्त में से कोई भी दृष्टिकोण मेकांग के नदी बेसिन, जैव विविधता के वैश्विक हॉटस्पॉट को सुरक्षित करने में मदद करेगा, और बिजली की कीमत पर बड़े प्रभाव के बिना ऐसा करेगा।

(360इन्फो.ओआरजी)

नेत्रपाल मनीषा

मनीषा

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)