लोग बिना बताए संचार के लिए कर रहे एआई का इस्तेमाल, लेकिन क्या यह नैतिक रूप से गलत है?
लोग बिना बताए संचार के लिए कर रहे एआई का इस्तेमाल, लेकिन क्या यह नैतिक रूप से गलत है?
(सियावोश साहेबी और थॉमस मोंटेफियोर, मैक्वेरी विश्वविद्यालय द्वारा)
सिडनी, छह जून (द कन्वरसेशन) कल्पना कीजिए कि आपने किसी बैठक के दौरान अपनी पुस्तिका में दर्ज किये गये नोट्स को व्यवस्थित करने के लिए चैटजीपीटी जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरण का इस्तेमाल किया है। आपका सहकर्मी टिप्पणी करता है कि ये नोट्स कितने स्पष्ट हैं जबकि आप यह नहीं बताते कि इन नोट्स को बेहतर बनाने का काम आपने नहीं, बल्कि एआई ने किया है।
अब एक अलग स्थिति पर विचार करें। आप अपनी मां के अंतिम संस्कार में हैं। उनकी वर्षों पुरानी सबसे अच्छी दोस्त भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं और एक शोक संदेश भेजती है। लेकिन बाद में आपको पता चलता है कि उनकी दोस्त ने वास्तव में वह शोक संदेश नहीं लिखा था – बल्कि एआई ने लिखा था।
इन दोनों स्थितियों में एआई का उपयोग छिपाकर करना कपटपूर्ण है। लेकिन क्या यह नैतिक रूप से गलत है?
शोध में पाया गया कि लोग एआई के उपयोग का खुलासा न करने के लिए दृढ़ता से प्रेरित हो सकते हैं क्योंकि यह उनके संबंधों को प्रभावित कर सकता है और इस प्रश्न पर विस्तार से विचार करना उचित है।
इसका कारण यह है कि लोग सामान्यत: एआई द्वारा तैयार किए गए परिणामों को कम महत्वपूर्ण मानते हैं। जो लोग इस तकनीक का उपयोग करते हैं, उन्हें कम सक्षम समझा जाता है।
सामान्य शब्दों में कहें तो यदि आप किसी ‘‘कपटपूर्ण कृत्य’’ में संलग्न हैं, तो आप किसी को ऐसी बात पर विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं जो आप जानते हैं कि यह झूठी है।
दार्शनिक जॉन डानाहर कृत्रिम बुद्धिमत्ता या रोबोट द्वारा भ्रमित किये जाने के विभिन्न रूपों के बीच अंतर करने के लिए एक उपयोगी ढांचा प्रदान करते हैं। यह ढांचा उपयोगी है क्योंकि जिस तरह रोबोट मानव व्यवहार की विश्वसनीय रूप से नकल कर सकता है, उसी तरह एआई तकनीकों के जरिये मनुष्य भी ऐसा कर सकते हैं।
भ्रमित करने के कुछ तरीकों में झूठ बोलना या बाहरी दुनिया को गलत तरीके से प्रस्तुत करना शामिल होता है। हम दूसरों को यह विश्वास दिलाने के लिए भी धोखा दे सकते हैं कि हमारे पास वे विचार, भावनाएं या क्षमताएं नहीं हैं जो वास्तव में हमारे पास हैं, जैसे कि किसी भाषा को न समझने का नाटक करना।
पहले उदाहरण पर वापस जाएं, तो आपने यह नहीं बताया कि आपने बैठक के नोट्स को व्यवस्थित करने के लिए एआई का उपयोग किया था। आपने अपने सहकर्मी को यह विश्वास करने दिया है कि आप यह काम करने में सक्षम हैं, जो शायद सच भी हो।
जब हम एआई का इस्तेमाल कर तैयार किये गये किसी दस्तावेज को अपना बताते हैं – और विशेष रूप से ऐसे दस्तावेज को जो हमारे बारे में कुछ प्रतिबिंबित कर सकता है – तो हम दूसरों को यह संकेत देते हैं कि हमने ही इसे बनाया है।
जब हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल किये जाने का खुलासा नहीं करते हैं, तो हम दूसरों को उस प्रकार की जानकारी से वंचित करते हैं जिसकी आवश्यकता उन्हें दुनिया और दूसरों के बारे में सही धारणाएं बनाने के लिए होती है।
हालांकि, शोक संदेश का उदाहरण यह दर्शाता है कि एआई के इस्तेमाल का खुलासा न करना – सभी पहलुओं पर विचार करते हुए – कभी-कभी स्वीकार्य हो सकता है।
उदाहरण के लिए, शायद मित्र इतना गहरे शोक में डूबा हुआ था कि अंतिम संस्कार के वक्त समय पर शोक संदेश तैयार कर पाना उसके लिए संभव नहीं था और उसने एआई का इस्तेमाल कर संदेश तैयार किया और इसे खुद के द्वारा तैयार किया हुआ बताया।
ऐसे मामलों में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग का खुलासा न करना स्वीकार्य हो सकता है, भले ही यह नैतिक रूप से निंदनीय हो।
तो, लोग एआई का इस्तेमाल नैतिक रूप से कैसे कर सकते हैं? अगर हम दूसरों को अनैतिक रूप से धोखा देने से बचना चाहते हैं, तो हमें महत्वपूर्ण मामलों में इसके इस्तेमाल का खुलासा करना चाहिए।
एआई के उपयोग के बारे में खुलकर बात करने से दूसरों को इस बारे में अधिक सटीक धारणाएं बनाने का अवसर मिलता है कि हम क्या संवाद कर रहे हैं।
(द कन्वरसेशन)
देवेंद्र माधव
माधव

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