एआई आधारित प्रौद्योगिकी से भगवद गीता के अनुवाद और भावनाओं का विश्लेषण |

एआई आधारित प्रौद्योगिकी से भगवद गीता के अनुवाद और भावनाओं का विश्लेषण

एआई आधारित प्रौद्योगिकी से भगवद गीता के अनुवाद और भावनाओं का विश्लेषण

: , May 12, 2022 / 04:55 PM IST

(रोहिताश चंद्रा, यूएनएसडब्ल्यू सिडनी)

सिडनी, 12 मई (द कन्वरसेशन) मशीन लर्निंग और अन्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) विधियों से वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यों में अपार सफलता मिली है। उदाहरण के लिए पूर्वानुमान लगाना कि प्रोटीन के अणु कैसे दोहरे होते हैं या भीड़ में चेहरों को कैसे पहचाना जाता है आदि। हालांकि, मानविकी के लिए इन विधियों के क्रियान्वयन का पूरी तरह से अन्वेषण बाकी है।

उदाहरण के लिए, एआई हमें दर्शन और धर्म के बारे में क्या बता सकता है? इस तरह की खोज के लिए एक प्रारंभिक बिंदु के रूप में, हमने भगवद गीता के तीन अंग्रेजी अनुवादों का विश्लेषण करने के लिए गहन एआई लर्निंग विधियों का उपयोग किया, जो मूल रूप से संस्कृत में लिखा गया एक प्राचीन हिंदू ग्रंथ है।

बीईआरटी नामक एक गहन शिक्षण-आधारित भाषा मॉडल का उपयोग करते हुए, हमने अनुवादों में भावनाओं और शब्दार्थ का अध्ययन किया। शब्दावली और वाक्य-विन्यास में भारी भिन्नता के बावजूद, हमने पाया कि भावना और अर्थ के स्वरूप मोटे तौर पर तीनों में समान थे।

यह शोध ग्रंथों की एक विस्तृत श्रृंखला में अनुवादों की तुलना करने और भावनाओं की समीक्षा करने के लिए एआई-आधारित प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मार्ग खोलता है।

ज्ञान की एक प्राचीन पुस्तक:

भगवद गीता हिंदुओं के पवित्र और दार्शनिक ग्रंथों में से एक है। 2,000 साल से अधिक समय पहले लिखे गये इस ग्रंथ का 100 से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है और 18वीं सदी से यह पश्चिमी दार्शनिकों की रुचि का केंद्र रहा है।

भगवग गीता महाकाव्य महाभारत का एक भाग है जिसमें पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कुरुक्षेत्र की धरती पर लड़े गये एक युद्ध का वर्णन है।

भगवद गीता में भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच का संवाद है। इसमें श्रीकृष्ण अपने उपदेशों में अर्जुन से कहते हैं कि एक योद्धा को नैतिकता और धर्म के लिए युद्ध में जाना चाहिए, भले ही दूसरी तरफ उसके करीबी मित्र और परिजन ही क्यों न हों।

विद्वानों ने भगवद गीता को मनोविज्ञान, प्रबंधन, नेतृत्व और संकटों का हल निकालने की पुस्तक भी कहा है।

अनगिनत अनुवाद:

भगवद गीता के अनगिनत अंग्रेजी अनुवाद हुए हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता को परखने के लिए बहुत काम नहीं हुआ है। गीतों और कविताओं के अनुवाद न केवल लय और तुकबंदी के स्वरूप को बिगाड़ते हैं, बल्कि इसके परिणामस्वरूप भावार्थ संबंधी जानकारी का नुकसान भी हो सकता है।

हमारे शोध में, हमने भगवद गीता (संस्कृत से अंग्रेजी में) के तीन चयनित अनुवादों का विश्लेषण करने के लिए गहन शिक्षण भाषा मॉडल का उपयोग किया है, जिसमें अर्थ और भावनाओं का विश्लेषण किया गया। इससे अनुवाद की गुणवत्ता के मूल्यांकन में मदद मिलती है।

हमने एक पूर्व-प्रशिक्षित भाषा मॉडल का उपयोग किया जिसे बीईआरटी के नाम से जाना जाता है और जिसे गूगल ने विकसित किया है। हमने ट्विटर पोस्ट आधारित मानव-वर्णित प्रशिक्षण डेटासेट का उपयोग करके मॉडल को आगे बढ़ाया, जो 10 अलग-अलग भावनाओं को पहचानता है।

ये भावनाएं (आशावाद, कृतज्ञता, सहानुभूति, निराशावाद, चिंता, दुख, कोप, इनकार, आश्चर्य और हास-परिहास) कोविड-19 महामारी की शुरुआत के दौरान सोशल मीडिया की भावाओं के हमारे पहले के अनुसंधान से ली गयी हैं।

भावनाओं के स्वरूप:

हमने जिन तीन अनुवादों का अध्ययन किया उनमें भिन्न शब्दावली और वाक्य-विन्यास का उपयोग किया गया, लेकिन भाषा मॉडल ने संबंधित अनुवादों के अलग-अलग अध्यायों में समान भावनाओं को पहचाना। हमारे मॉडल के अनुसार सबसे ज्यादा जो भावनाएं व्यक्त की गयीं, वो थीं आशावाद, कुपित होना और आश्चर्यचकित होना।

कुल मिलाकर मॉडल ने दर्शाया कि अर्जुन और भगवान कृष्ण के संवाद के दौरान किस तरह भावनाएं नकारात्मक से सकारात्मक हो जाती हैं।

हमारे मॉडल की एक सीमा है कि यह ट्विटर के डेटा के आधार पर तैयार किया गया है, इसलिए यह ‘हास-परिहास’ को सामान्य भावना के रूप में पहचानता है।

भावनाओं के विश्लेषण का उपयोग:

हमारा अनुसंधान अनेक प्रकार के ग्रंथों में अनुवादों की तुलना तथा भावनाओं की समीक्षा के लिए एआई-आधारित प्रौद्योगिकियों के उपयोग के तरीके को इंगित करता है।

इस प्रौद्योगिकी के उपयोग का विस्तार मनोरंजन मीडिया में अभिव्यक्त भावनाओं की समीक्षा के लिए भी किया जा सकता है। इसका एक और प्रभावी उपयोग फिल्मों तथा संगीत का विश्लेषण करने में हो सकता है ताकि अभिभावकों को बच्चों के लिए उचित विषय-वस्तु की जानकारी मिल सके।

(द कन्वरसेशन) वैभव नरेश

नरेश

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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