(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, आठ जून (भाषा) अमेरिका ने सोमवार को कहा कि उसने गंभीर अपराधों के आरोपी एक भारतीय प्रवासी सहित 17 लोगों की नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
न्याय विभाग ने बताया कि न्यूजर्सी स्थित प्लेसमेंट फर्म ‘मैग्नाविजन एलएलसी’ के मालिक नीरज शर्मा (50) पर आरोप है कि उन्होंने 11 फर्जी एच-1बी वीजा आवेदन पर हस्ताक्षर करते हुए दावा किया कि संबंधित व्यक्ति एक वैश्विक वित्तीय संस्थान में काम करेंगे।
विभाग के मुताबिक, शर्मा की ओर से एच1बी वीजा आवेदनों के लिए सहायक दस्तावेज के तौर पर जमा किए गए पत्रों में कथित तौर पर वैश्विक वित्तीय संस्थान के अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर थे।
विभाग ने बताया कि शर्मा ने 2017 में नागरिकता के लिए आवेदन किया था। उसने आरोप लगाया कि शर्मा ने नागरिकता के लिए हुए साक्षात्कार के दौरान अपने पिछले आपराधिक आचरण के बारे में झूठ बोला था।
विभाग के अनुसार, शर्मा को दिसंबर 2017 में अमेरिकी नागरिकता मिल गई। बाद में उसे अप्रैल 2015 से अप्रैल 2017 के बीच धोखाधड़ी और वीजा के दुरुपयोग का दोषी ठहराया गया।
गृह सुरक्षा विभाग के प्रमुख मार्कवेन मुलिन ने एक बयान में कहा, “अमेरिकी नागरिकता एक विशेषाधिकार है और इसे ईमानदारी से हासिल किया जाना चाहिए। अगर आप यहां आते हैं, हमारे कानूनों को तोड़ते हैं और आव्रजन संबंधी कार्यवाही के दौरान झूठ बोलते हैं, तो आप यह विशेषाधिकार खो देते हैं।”
अमेरिका में आव्रजन और नागरिकता अधिनियम के तहत, अगर किसी व्यक्ति ने गैर-कानूनी तरीके से, जरूरी जानकारी छिपाकर या जानबूझकर गलत जानकारी देकर अमेरिकी नागरिकता हासिल की है, तो उसकी नागरिकता छीनी जा सकती है।
शर्मा के अलावा जिन 16 लोगों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, उनमें बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोपी हैती का एक व्यक्ति, 15 साल से कम उम्र के बच्चे के यौन शोषण का दोषी यूगोस्लावियाई व्यक्ति, नाबालिगों की अश्लील तस्वीरें रखने के मामले में दोषी करार दिया गया मैक्सिको का एक प्रवासी, बच्चों के यौन शोषण का आरोपी कोलंबिया का एक पूर्व पादरी और बच्चों के साथ यौन अपराध का जुर्म कबूलने वाला फिलिपीन का एक व्यक्ति शामिल है।
भाषा पारुल नरेश
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