क्या आप सही जीवनसाथी खोजने में एआई पर भरोसा करेंगे?

क्या आप सही जीवनसाथी खोजने में एआई पर भरोसा करेंगे?

क्या आप सही जीवनसाथी खोजने में एआई पर भरोसा करेंगे?
Modified Date: May 24, 2026 / 05:02 pm IST
Published Date: May 24, 2026 5:02 pm IST

(मैडिसन साइडेरिस, डीकिन विश्वविद्यालय)

मेलबर्न, 24 मई (द कन्वरसेशन) विभिन्न ऑनलाइन डेटिंग ऐप ने लोगों के एक-दूसरे से मिलने, डेट करने और प्यार में पड़ने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है।

इन ऐप की खासियत हमेशा से ‘स्वाइप लॉजिक’ रही है : उपयोगकर्ताओं को दूसरों की प्रोफाइल दिखाई जाती हैं और उन्हें सामने वाला पसंद है या नहीं, यह तय करने के लिए बाएं या दाएं ‘स्वाइप’ करने के लिए कहा जाता है।

जब ‘मैच ग्रुप’ ने 2012 में ‘टिंडर’ के माध्यम से पहली बार यह फीचर पेश किया, तो इसने डेटिंग के परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल दिया।

अब एक और बदलाव की संभावना है, क्योंकि ‘बंबल’ ने एआई-आधारित ऑनलाइन डेटिंग की ओर बढ़ने और ‘स्वाइप’ सिस्टम को बंद करने की योजना की घोषणा की है। इस कदम से डेटिंग के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

‘बी’ जीवनसाथी ढूंढने में मदद करेगा

मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) व्हिटनी वोल्फ हर्ड ने हाल में घोषणा की है कि इस साल के अंत तक ‘बंबल’ एक एआई-आधारित डेटिंग सहायक ‘बी’ (मधुमक्खी) पेश करेगा, जिसके ‘स्वाइप’ सिस्टम की जगह लेने की संभावना है।

‘बी’ पहले उपयोगकर्ताओं से बातचीत करके उन्हें ‘जानने’ का प्रयास करेगा, फिर संभावित मैच और अच्छे डेट आइडिया सुझाएगा।

‘बंबल’ एआई को केंद्र में रखकर अपने डिजाइन में बदलाव करने वाला पहला मुख्यधारा का डेटिंग ऐप है। लेकिन यह एआई का इस्तेमाल करने वाला पहला ऐप नहीं है।

पिछले कुछ वर्षों में कई डेटिंग ऐप ने एआई सुविधाएं पेश की हैं। उदाहरण के लिए ‘हिंज’ ने बातचीत शुरू करने में उपयोगकर्ताओं की मदद करने और उनकी प्रोफाइल पर प्रतिक्रियाएं आमंत्रित करने के लिए जनरेटिव एआई टूल शामिल किया है, वहीं बंबल ने 2024 में नकली और धोखाधड़ी वाली प्रोफाइल की पहचान करके उपयोगकर्ता सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक ‘एआई डिटेक्टिव’ सुविधा पेश की थी।

डेटिंग ऐप का पतन

डेटिंग ऐप आधुनिक डेटिंग का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। ये ऐप डेटिंग के लिए व्यापक विकल्प उपलब्ध कराते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें उम्र, यौन रुझान या स्थान के कारण सीमित विकल्प मिलते हैं। इन फायदों के बावजूद, शोध से पता चलता है कि इन ऐप का इस्तेमाल करने वाले लोग समय के साथ-साथ थकान और निराशा का शिकार होते जाते हैं। अधिकतर प्रमुख ऐप से जुड़े उपयोगकर्ताओं की संख्या और उनसे संबंधित डाउनलोड में गिरावट देखी जा रही है – यह गिरावट ‘स्वाइप’ करने से होने वाली थकान, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और ऑनलाइन नस्लवाद एवं लैंगिक भेदभाव के अनुभवों के कारण हो रही है।

जब 2014 में ‘बंबल’ लॉन्च हुआ, तो इसे ‘नारीवादी टिंडर’ के रूप में प्रचारित किया गया, क्योंकि बातचीत शुरू करने पर महिलाओं का नियंत्रण था।

हालांकि, तब से इसे कई आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। उदाहरण के लिए, 2018 में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट में तर्क दिया गया कि ऐप को ‘स्ट्रेट’, श्वेत और ‘सिसजेंडर’ महिलाओं के लिए सबसे अच्छा काम करने के लिए अनुकूलित किया गया था – जिसका अर्थ है कि उनके अनुभव दूसरों की तुलना में अधिक सहज या सकारात्मक होने की संभावना थी।

प्रेम का वस्तुकरण

शिक्षाविद 1990 के दशक के उत्तरार्ध से ही अंतरंगता के वस्तुकरण और डेटिंग पर लिखते आ रहे हैं। समाजशास्त्री जिगमुंट बाउमन ने सिद्धांत दिया कि हम ‘तरल प्रेम’ के युग में जी रहे हैं, जिसमें हम ‘प्रेम की खरीदारी’ कर रहे हैं और कम समय वाले अधिक लचीले संबंधों की तलाश में हैं।

एक अन्य विद्वान ईवा इलोउज ने 2011 में प्रकाशित अपनी किताब ‘व्हाई लव हर्ट्स’ में तर्क दिया कि आधुनिक डेटिंग विकल्पों की बहुतायत से प्रभावित है और संभावित साथियों की तुलना और मूल्यांकन करने का दबाव प्रतिबद्धता को और अधिक अनिश्चित बना सकता है।

डेटिंग ऐप इन चीजों को और तीव्र कर देते हैं। वे एक बाजार जैसी प्रणाली के माध्यम से अंतरंगता को ‘मंच’ पर लाते हैं, जहां लोगों के बजाय उनके प्रोफाइल को खंगालकर उनका मूल्यांकन और चयन किया जाता है। इस वातावरण में दूसरे व्यक्ति की इच्छाओं के बारे में अस्पष्टता का अनुभव करना आम बात है।

‘एआई मैचमेकिंग’ विकल्पों को सीमित करके और अधिक ‘अनुकूल’ साथी सुझाकर आधुनिक डेटिंग की अनिश्चितताओं को कम कर सकता है। या फिर यह महज अनिश्चितता का स्रोत ही बदल सकता है।

क्या भविष्य का मार्ग ‘एआई डेटिंग’ है

ऐसे समाज में जहां अकेलापन बढ़ रहा है और प्यार (स्पष्ट रूप से) संकट में है, क्या लोग एआई डेटिंग ऐप का इस्तेमाल करना चाहेंगे? ऐसा लगता नहीं है। शोध से पता चलता है कि लोग तेजी से अधिक ‘स्वाभाविक संबंध’ तलाश रहे हैं और हमने ‘रन क्लब’ से लेकर ‘सोशल नाइट’ और ‘स्पीड डेटिंग’ तक, आमने-सामने की डेटिंग गतिविधियों में तेजी देखी है।

‘मैचमेकिंग’ का काम एआई को सौंपने से प्यार और आत्मीयता (एक सार्वभौमिक मानवीय अनुभव) के मात्रात्मक और गणनात्मक वस्तु में तब्दील होने का खतरा है, जिससे इसका मानवीय पहलू छिन जाएगा।

साथ ही हमें यह भी याद रखना चाहिए कि लोगों का प्यार पाने के लिए बाहरी मदद लेने का लंबा इतिहास रहा है, चाहे वह स्थानीय बिचौलिये को पैसे देकर हो, अखबार में विज्ञापन देकर हो, किसी सलाहकार से सलाह लेकर हो या डेटिंग शो में उपस्थिति के रूप में हो। डेटिंग के भावनात्मक तनाव को संभालने के हमारे तरीके में एआई एक नया आयाम हो सकता है।

ऐसे में सवाल यही है कि क्या आप अपने लिए जीवनसाथी ढूंढ़ने के वास्ते एआई पर भरोसा करेंगे?

(द कन्वरसेशन) संतोष पारुल

पारुल


लेखक के बारे में