भाकपा (माले) लिबरेशन ने नीट अभ्यर्थी मौत मामले में सीबीआई जांच की मांग की
भाकपा (माले) लिबरेशन ने नीट अभ्यर्थी मौत मामले में सीबीआई जांच की मांग की
पटना, 27 जनवरी (भाषा) भाकपा (माले) लिबरेशन के महिला और छात्र संगठनों ने मंगलवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की एक अभ्यर्थी की मौत के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने की मांग की और कहा कि वे चार फरवरी से जहानाबाद से पटना तक 10 दिवसीय ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ निकालेंगे।
पार्टी के महिला संगठन ‘ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेंस एसोसिएशन’ (एआईपीडब्ल्यूए) और छात्र संगठन ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) ने इस मामले में पटना उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की भी मांग की।
जहानाबाद की रहने वाली 18 वर्षीय युवती, जो चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट की तैयारी कर रही थी, छह जनवरी को पटना के एक महिला छात्रावास में अपने कमरे में बेहोश हालत में मिली थी। कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को एक निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी।
यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे, लेकिन पुलिस ने शुरू में उन्हें खारिज कर दिया था, हालांकि बाद में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कहा कि छात्रा के कपड़ों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में वीर्य के अंश पाए गए हैं।
इसके अलावा, मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके निजी अंगों पर चोट के निशान और शरीर पर नाखूनों से खरोंच के निशान होने की बात सामने आई है।
एआईपीडब्ल्यूए की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे कोई कारण नजर नहीं आता कि पीड़िता के परिवार की सीबीआई जांच की मांग को क्यों नहीं माना जा रहा है। हम इस मांग के साथ हैं। हम पटना उच्च न्यायालय से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हैं।’’
तिवारी ने घोषणा की कि एआईपीडब्ल्यूए और आइसा जहानाबाद से 10 दिवसीय ‘बेटी बचाओ न्याय यात्रा’ निकालेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम चार फरवरी को जहानाबाद के मखदुमपुर से यात्रा शुरू करेंगे, जो 13 फरवरी को पटना में राज्य विधानसभा के सामने विरोध प्रदर्शन के साथ समाप्त होगी।’’
तिवारी ने सरकार पर जांच प्रक्रिया में ‘‘जानबूझकर देरी’’ कर अपराध के सबूतों को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
आइसा के प्रदेश सचिव कुमार दिव्यम ने कहा कि इस यात्रा का दोहरा उद्देश्य न्याय और सुरक्षा है।
उन्होंने दावा किया, ‘‘कोई नियामक निकाय नहीं है। किसी को नहीं पता कि पटना में कितने निजी छात्रावास संचालित हो रहे हैं। सरकार के पास इसका कोई समुचित आंकड़ा नहीं है। इसके अलावा, पटना में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी है।’’
भाषा कैलाश शफीक
शफीक


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