प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार का आर्थिक एवं प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण

प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार का आर्थिक एवं प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण

प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार का आर्थिक एवं प्रशासनिक विकेन्द्रीकरण
Modified Date: November 29, 2022 / 03:34 am IST
Published Date: May 12, 2020 11:13 am IST

प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार कांग्रेस नेतृत्व वाली यू.पी.ए. सरकार की अपेक्षाकृत राज्यो की आय को 14वें वित्त आयोग (2015-20) के अन्र्तगत वित्तीय विकेन्द्रीकरण एवं भारतीय संविधान की मूल भावना फेडरल सिस्टम आफ गर्वनेन्स को बहुत ज्यादा मजबूत किया है। कांग्रेस की नेतृत्व वाली यू.पी.ए. शासन काल मे केन्द्र को उपलब्ध  विभाजनीय ( डिवासीवल पुल ) केन्द्रिय टेक्स की राशि का ; जो प्रत्यक्ष करो के माध्यम से केन्द्र शासन द्वारा  एकत्रीत की जाती है द्ध केवल 32 प्रतिशत हिस्सा ही समस्त राज्यो को वितरित किया जाता था  किन्तु अब जबसे  आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी प्रधानमंत्री के  पद  पर आसिन हुए है तबसे विभाजनीय ( डिवासीवल पुल ) केन्द्रिय टेक्स की राशि 32 प्रतिशत के स्थान पर 42 प्रतिशत हिस्सा राज्यो को दिया जा रहा है। इसके अलावा केन्द्र सरकार  विभिन्न आर्थिक अनुदानो (ग्रान्टस) को भी राज्य सरकारेा को संघात्मक शासन के आर्थिक अनुबधेा के  अनुसार प्रदान करती है। आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने एक देश एक टेक्स के मूल मंत्र पर चलते हुए जी. एस. टी. सेन्ट्रल कौन्सिल का निमार्ण, संविधान के आर्टिकल 217 के अंर्तगत किया है, जिसे संसद के दोनो सदनों के द्वारा भारत को एक शक्ति शाली आर्थिक राष्ट्र निमार्ण करने हेतू ध्वनिमत से स्वीकृत किया और  जिसके पैरोकार रहे हमारे अत्यन्त कुशाग्र बु़द्धि के घनी स्वर्गीय आदरणी अरुण जेटली जी। जी. एस. टी. की स्वीकृति से हब ईज आफ डूईग बिजनेश का रास्ता प्रशस्त हुआ तथा व्यापार मे एवं ब्यूरोके्रसी मे होने वाले कालेधन उगाही का खेल जो  आजादी के बाद से खेला जा रहा था उसे पूर्ण पारदर्शिता वाले इलेक्ट्रानिक प्रशासन लागू कर बंद कर दिया गया । इससे ना सिर्फ ईमानदार व्यापारियो एवं उद्योगपतिओ को लाभ मिला बल्कि विदेशो से आने वाला  इन्वेस्टमेट भी हमारे देश की ओर आकर्षित हुआ तथा उपभोक्ताओ को भी गुणवत्ता-पूर्ण किफायती दाम पर वस्तुए उपलब्ध होने लगी। देश भर मे अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टेक्स) से एकत्रित किए जाने वाली  राशि का राज्यो केा वितरण पूर्ण पारदशर्ता एवं राजनैतिक भेदभाव के बीना, जी.एस.टी. के सेन्ट्रल कौसिल की देखरेख मे जिसके चेयरमेन देश की माननीय वित्तमंत्री जी तथा कौसिंल के सदस्य  सारे प्रदेशो के माननीय वित्तमंत्री होते है, एवं सर्वसम्मति से सारे निर्णय लेकर  जी.एस.टी. का वितरण  वित्तीय मापदण्डो के अनुसार किया जाता है देश मे जी.एस.टी. लागू होने के साथ उत्पादक प्रदेशो एवं उपभोग करने (कंन्जूम ) वाले प्रदेशो को पूर्व मे प्राप्त होने वाले अप्रत्यक्ष करो मे जी.एस.टी. लागू होने के बाद कोई नुकसान न हो इस लिए संविधान मे संशोधन करते हुए जी.एस.टी. संशोधन एक्ट 2017 के अन्र्तगत प्रदेश को 5 वर्षो (2017-2022) तक क्षतिपूर्ति राशि केन्द्र शासन द्वारा राज्यो को दिया जा रहा है ।

अभी संविधान की मूलभावना संघात्मक शासन व्यवस्था के अन्र्तगत वर्ष 2020 से 2025  के लिए 15वें वित्त आयोग का गठन किया है जो पूरे देश के हरेक प्रदेशो मे जाकर वहां की सरकार एवं प्रमुख राजनैतिक दलो एवं अधिकारियो से बैठक कर वित्तीय दस्तावेज का निर्माण कर रही है जो पुनः अर्थव्यवस्था को और ज्यादा विकेन्द्रीकृत करने की दिशा की ओर बढाने वाला होगा है। केन्द्र की सरकार की पूर्ण आस्था संविधान की फेडरल ढाचा को अत्यधिक शक्ति शाली बनाने के इसलिए केन्द्र शासन नीति आयोग के माध्यम से वित्त आयोग के माध्यम से केन्द्रिय अनुदानो के माध्यम से जी.एस.टी. कौसिल के माध्यम से पूर्ण उदारता से देश की अर्थव्यवस्था निरंतर आगे बढा रहे है। इस बात का प्रमाण केन्द्र सरकार की अभी 2020-21 के अनुमानित बजट के प्रावधानो से समझा जा सकता है ।

1 फरवरी 2020 को माननीय वित्तमंत्री जी ने हमारे देश का एस्टिमेटेड बजट  30,42,230 करोड का  संसद मे पारित करवाया है। इसमे से 13,90,666 करोड रुपये देशा के समस्त  राज्यो एवं केन्द्र शासित प्रदेशो को संवैधानिक आर्थिक नियमो के अनुसार वितरित किया जाएगा तथा टेक्स के केन्द्रीय शेयर मे से 7,84,181 करोड रुपये तथा 6,06,485 करोड रुपये ग्रान्टस (अनुदान) एवं कर्ज के रुप मे दिए जाने का प्रावधान है ।

छत्तीसगढ प्रदेश के साथ जो केन्द्र शासन का आर्थिक संबंधो ( संघ एवं राज्य) को हम छत्तीसगढ प्रदेश के वर्ष 2020-21 के अनुमानित बजट से  समझ सकते है कि किस प्रकार केन्द्र की वर्तमान सरकार, किस प्रकार फंडरल गर्वनमेंन्ट के सिस्टम का अक्षरसः पूरी संजीदगी के साथ पालन कर रहे है। प्रदेश के वर्ष 2020-21 के अनुमानित बजट के मुताबिक 83 हजार 831 करोड रुपये के राजस्व प्राप्ति का अनुमान है। इसमे से 35 हजार 370 करोड रुपये राज्य के संसाधन से प्राप्त  होना है तथा शेष लगभग 48 हजार करोड रुपये केन्द्र शासन से प्राप्त होना है। केन्द्र एवं राज्यो को अंर्तराष्ट्रीय मापदण्डों के अनुसार वित्तीय अनुशासन के अन्र्तगत अपनी आर्थिक गतिविधियो एवं बजट का प्रबंधन करना आवश्यक है, जिसके अनुसार राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत से ज्यादा न हो तथा ऋण केन्द्र शासन अपनी जी.डी.पी. का 40 प्रतिशत तथा राज्य अपनी जी.डी.पी. का 20 प्रतिशत ले सकती है किन्तु विशेष परिस्थितियो मे इसे 3 प्रतिशत तक और बढाया जा सकता है । हरेक वर्ष  एवं समय-समय पर अंर्तराष्ट्रीय मापक संसथाये जैसे स्टैण्डर्ड एण्ड पुअर तथा मुडी, अपने आर्थिक विश्लेषण (ग्रेडिंग) पूरे विश्व के देशो के सामने रखते है जिसके अनुसार देश की मौद्रिक स्थिति सावरेन (प्रभुसत्ता) आर्थिक सम्पत्ति की गणना की जाती है, जिसके अनुसार विश्व बाजार एवं अर्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष, वल्र्ड बैक तथा अन्य संवैधानिक वित्तीय संस्थान तथा विश्व बाजार मे देश की आर्थिक साख के अनुसार आर्थिक विकास की निरंतरता अवलंबित होती है। न सिर्फ हमारे देश के अर्थशास्त्री अपितु विश्व के आर्थिक विश्लेषक ये मानते है कि भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह संघात्मक व्यवस्था के अंर्तगत केन्द्र एवं राज्यो के बीच एक आदर्श स्थिति मे संचालित है एवं देश के आर्थिक विकास मे दोनो एक दूसरे की पूरक की भूमिका निभा रहे है।

11 मई को प्रधानमंत्री जी आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने सभी प्रदेशो के मुख्यमंत्रियो से कोविड-19 के लॅाकडाउन-3 और 17 मई के बाद की कोरोना के प्रसार के रोकथाम टेस्टिग, स्वास्थ्य सेवाओ की मजबूती एवं लॅाकडाउन की आगे की रणनीति के बारे मे 5वीं बार चर्चा की। इसी प्रकार विभिन्न प्रदेशो के मुख्यमंत्रियो ने आर्थिक एवं कोविड-19 के उनके प्रदेशो के असर का तथा उसके समाधान के लिए केन्द्र से, उनकी अपेक्षाओ के  बारे मे खुलकर बातचीत की।  केन्द्र राज्यो के इस प्रकार एक मंच मे आकर कोविड-19 से लडने की जंग एवं आर्थिक स्थिति को फिर से पटरी मे लाने के लिए एकजुट होकर आगे बढने पर विचार विमर्श किया गया इसलिए ये मानना कि कोविड-19 के दौरान  क्या केन्द्र शासन अधिनायक वाद की ओर अग्रसर हो रही है । ये घोर काल्पनिक प्रश्न के अलावा कुछ भी नही है।

संविधान निर्माताओ ने विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान का निर्माण हमारे देश के लिए किया है । इस पर देश वासियो की गहरी आस्था है। इसी लिए जब स्व श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने अपनी कुर्सीबचाने के लिए संविधान को कुचलकर प्रजातंत्र एवं संघात्मक व्यवस्था को कुचला था एवं विपक्ष के नेताओ को जेलो मे ठंूस दिया था । (मेरे बडे भाई स्व. डा. रमेश जी, जनसंघ नेता को 19 महीने मीसा मे जेल मे रखा ) जिसके परिणाम स्वरुप 1977 के चुनाव मे स्व श्रीमती इंदिरा गांधी की पार्टी को धूल चटा दिया था। इस देश की विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा प्रेस हमारे  संघात्मक व्यवस्था के आधार स्तंभ है जो किसी को भी अधिनायक नही बनने देंगे।

 

परेश बागबाहरा

भा.ज.पा. नेता एवं पूर्व विधायक

(लेखक के स्वयं के विचार)

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति IBC24 News उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार IBC24 News के नहीं हैं, तथा IBC24 News उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।


लेखक के बारे में

Shahnawaz Sadique is a digital marketing powerhouse with over 15 years of experience in the industry. His expertise encompasses a wide range of skills, from content writing and affiliate marketing to product launches and email campaigns. With 15 years of experience in social media, SMM, and SEO, he's an expert at helping businesses increase their online reach. From travel to business, education, media, tech, and cyber security, Shahnawaz has a proven track record of delivering results for clients across various sectors. Shahnawaz is also working as Sr. Digital Marketing Manager @ IBC24 News. He has a 9+ years of releveant experince in news industry as well. Want to take your media company to the next level? Look no further than Shahnawaz Sadique, He has been featured in top publications like FoxNews, Yahoo, MSN, WordStream, TastyEdits, LifeWire, SheFinds , Tech.Co and many more. the ultimate digital marketing pro.