25 मई की वो मनहूस रात

25 मई की वो मनहूस रात

25 मई की वो मनहूस रात
Modified Date: November 29, 2022 / 06:40 pm IST
Published Date: May 25, 2018 9:05 am IST

आज से ठीक पांच साल पहले यानी सन 2013 के मई महीने की 25 तारीख, दिन शनिवार। शाम के करीब 4 बज रहे होंगे। मैं मॉर्निंग शिफ्ट में था। खबरों का हैंडओवर इवनिंग शिफ्ट को देकर घर जाने की तैयारी में था कि जगदलपुर रिपोर्टर नरेश मिश्र ने नक्सली हमले से जुड़ी एक खबर ब्रेक कराई। ब्रेकिंग जीरम घाटी में कांग्रेस के काफिले पर हमले से जुड़ी थी। आए दिन होने वाले नक्सली हमलों के परिप्रेक्ष्य में ये ब्रेकिंग भी सामान्य ही लगी। अचानक ध्यान आया कि आज ही तो सुकमा में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा निकल रही है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल,महेंद्र कर्मा, अजीत जोगी जैसे तमाम दिग्गज नेता शरीक हैं। मन में खटका हुआ कि कही परिवर्तन यात्रा पर ही तो हमला नहीं हुआ है? लिहाजा स्वाभाविक उत्सुकतावश मैं रुक गया। 

करीब 15 मिनट बाद ही नरेश मिश्र ने नक्सली हमले में कांग्रेस के 2 कार्यकर्ताओं के घायल होने और उन्हें एंबुलेंस से लाने की दूसरी खबर ब्रेक कराई। न्यूज रूम अपने स्वाभाविक अलर्ट मोड में आ चुका था। मन कुशंका में घिरा ही था कि नरेश ने 5-10 मिनट बाद ही खबर ब्रेक कराई कि ये हमला कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा पर हुआ है। न्यूज रूम में हलचल बढ़ चुकी थी। इस समय तक चूंकि घटना के कोई फुटेज नहीं आए थे, लिहाजा फाइल फुटेज के साथ खबर को ब्रेकिंग के साथ ऑन एयर करने का सिलसिला जारी था। न्यूज रूम में अफरा-तफरी का माहौल था। इस बीच हमारे जांबाज पत्रकार नरेश मिश्र अपनी जान जोखिम में डालकर ग्राउंड जीरो में पहुंच चुके थे। इसके बाद एक ऐसी ब्रेकिंग आई जिसने न्यूज रूम में मौजूद हर शख्स को हिलाकर रख दिया। ये ब्रेकिंग बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा के मौत से जुड़ी थी। हमले में कई और नेताओं के मौत की भी अपुष्ट खबर थी। 

हर पल के साथ आती नई ब्रेकिंग के साथ न्यूज रूम में हाहाकार सी स्थिति बन चुकी थी। हमले में पूर्व केंद्रीय मंत्री और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के दिग्गज नेता विद्याचरण शुक्ल के गंभीर रूप से घायल होने की खबर ब्रेक हो चुकी थी। काफिले में शामिल राजनांदगांव के पूर्व विधायक उदय मुदलियार के भी जान गंवाने की खबर आ चुकी थी। हमले में 25 से ज्यादा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के मौत की भी खबर थी। चूंकि घटना स्थल पर केवल एकमात्र रिपोर्टर नरेश मिश्र ही मौजूद थे इसलिए ये सारी सनसनीखेज खबरें सबसे पहले हमारे चैनल IBC24 पर ही ब्रेक हो रही थी। इस सबके बीच कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल को लेकर कुछ पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही थी। अपुष्ट खबर थी कि नक्सलियों ने उनका अपहरण कर लिया है। 

अब बेसब्री से इंतजार फुटेज आने का था। रात करीब 8 बजे नरेश मिश्र ने घटना स्थल का पहला फुटेज भेजा। मंजर देखकर रूह कांप गई। जीरम घाटी की सड़क पर बेतरतीब वाहनों की कतार लगी थी। सड़क पर कारों के शीशे टूटकर बिखरे पड़े थे। शाम ढल चुकी थी और लगातार गहराते अंधेरे के साए में चारों तरफ मौत और दहशत की खामोशी पसरी थी। दहशत में लिपटी इस खामोशी के बीच बेपनाह दर्द में डूबी एक कराह उभरती है..। आह ! पानी…। अपनी कार का सहारा लेकर जमीन पर खून से लथपथ बैठे ये विद्याचरण शुक्ल थे। एक पैर सीधा सामने फैला हुआ, दूसरा घुटने से मुड़ा। दोनों हाथों को कमर के पीछे पंजों के सहारे जमीन पर टिकाए हुए। चेहरे पर दर्द की गहरी लकीरें। 84 साल के इस बुजुर्ग को नक्सलियों ने तीन गोली मारी थी। गोलियां बूढे शरीर में अंदर धंसी थी, जिससे रिसते खून से कुर्ता पसीज गया था। वेदना में डूबी आवाज फिर गुहार लगाती है, पानी…। नरेश मिश्र उन्हें सहारा देकर पानी पिलाते हैं और किसी तरह कार में बैठाने की कोशिश करते हैं। विद्या भैया को इस हाल में देखकर दिल चीत्कार कर उठा।

आगे कुछ ही दूरी पर महेंद्र कर्मा का पार्थिव शरीर औंधे मुंह पड़ा था। शरीर गोलियों से छलनी। नक्सलियों की दहशतगर्दी को ललकार कर जवाब देने वाला बस्तर का टाइगर गहरी नींद में सो चुका था। कुछ ही दूरी पर कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल की कार मौजूद थी, लेकिन उनका पता नहीं था। नरेश ने बताया कि कयास लगाए जा रहे हैं कि नक्सली उनको अगवा करके अपने साथ ले गए हैं।

इस घटना के फर्स्ट विजुवल आने के साथ ही न्यूज रूम की उत्तेजना अपने चरम पर पहुंच चुकी थी। देश-विदेश के तमाम नामी चैनलों में IBC24 के विजुवल चल रहे थे। रायपुर से लेकर दिल्ली तक सरगर्मी बढ़ चुकी थी। बैठकों का दौर जारी था। घायलों को अस्पताल लाना शुरू हो चुका। राज्यपाल को हालात की जानकारी देने के लिए अजीत जोगी राजभवन पहुंच गए थे। चारों तरफ से खबरों का प्रवाह अपने तीव्रतम वेग के साथ जारी था।

जरूरी पारिवारिक काम से मुझे शाम को शहडोल निकलना था। रात 8.30 बजे की ट्रेन में रिजर्वेशन था और रात 12 बजे मैं न्यूज रूम में था। नाइट शिफ्ट के साथी आ चुके थे। हैंडओवर के नाम पर पूरा रायता फैला था। खबरों और विजुवल के सैकड़ों स्लग। खबरों और विजुवल का प्रवाह अब भी कम नहीं हुआ था। सुबह करीब 4 बजे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी रायपुर पहुंच चुके थे। अगले दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया  गांधी भी पहुंचने वाली थीं। शाम 4 से सुबह के 4 कैसे बज गए पता ही नहीं चला। सनसनी से सनी रात बीत चुकी थी और भोर की पहली किरण फूट पड़ी थी। लेकिन जो रात बीती वो छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे स्याह रात थी।

शहडोल जाना जरूरी था, लिहाजा आनन-फानन में रायपुर स्टेशन पहुंचा। प्लेटफार्म पर अखबार का हाकर लगभग चीखने के अंदाज में हाका लगा रहा था- छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा नक्सली हमला…। महेंद्र कर्मा समेत छत्तीसगढ़ के 25 से ज्यादा नेता शहीद…। विद्याचरण शुक्ल गंभीर रूप से घायल…। कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल लापता…।

ट्रेन बिलासपुर से आगे बढ़ी ही थी कि साथी अनिल तिवारी ने सूचना दी, भाई! नंदकुमार पटेल भी नहीं रहे। नरेश मिश्र को नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश की डेडबॉडी जंगल में मिल गई है। खबर को सुनकर दिल बैठ गया। हे ईश्वर! छत्तीसगढ़ की तकदीर में अब कभी 25 मई 2013 ना लिखा जाए।

 

 

 

सौरभ तिवारी, असिस्टेंट एडिटर, IBC24

 

 


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