मोदी को रोक कांग्रेस जीती या हारी?, उंगली कटाकर शहीद बनेंगे चन्नी? | The Sanjay Show

PM Modi Security Breach: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला रोककर पंजाब ने बता दिया है कि वहां खालिस्तानी जाग गए हैं और पूरा देश सो रहा है

: , January 8, 2022 / 05:23 PM IST

PM Modi Security Breach

आज हम बात करने वाले हैं देश की उस गहरी नींद की जो धमाके हुए बिना टूटती ही नहीं… और हम बात करेंगे धमाकेदार राजनीति की भी…. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला रोककर पंजाब ने बता दिया है कि वहां खालिस्तानी जाग गए हैं और पूरा देश सो रहा है….लेकिन इसकी बड़ी कीमत कांग्रेस की सरकार को चुकानी होगी और राजनीति ये कहती है कि कीमत चुकाने पर कांग्रेस को फायदा हो सकता है…

आज हम बात कर रहे हैं कि जिस तरह एक दिन पहले पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले को रोका गया है उससे उपजी राजनीति और परिस्थिति की…देखिए एक बात तो साफ है कि पंजाब की कांग्रेस सरकार इस जिम्मेदारी से बच ही नहीं सकती है …वह चाहे जो भी और जितनी भी दलील दे पर प्रधानमंत्री के काफिले के सामने गाड़ियों को अड़ाकर जाम लगाना और फिर 20 मिनट तक प्रधानमंत्री का फंसे रहना सुरक्षा में चूक ही माना जाएगा…कांग्रेस की दलील है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित थे… उनको कोई खतरा नहीं था… किसी ने एक कंकड़ भी उनकी तरफ नहीं फेंका… वो तो किसान थे जो शांति पूर्वक विरोध जता रहे थे…ब्ला ब्ला ब्ला….
देखिए कांग्रेस की पंजाब सरकार और कांग्रेस पार्टी जो भी सफाई देती रहे पर ये तो पक्का है कि इसकी सजा उनको मिलेगी…. और जरूर मिलेगी…यह सामान्य बात तो बिलकुल ही नहीं है । यह सबको पता है कि प्रधानमंत्री के लिए हेलीकॉफ्टर होने के बाद भी सड़क मार्ग का ऑप्शन भी रखा जाता है और उस तरह की व्यवस्था की जाती है….ठीक है बठिंडा से फिरोजपुर का लम्बा रास्ता होने से कुछ कमी रह सकती है पर फ्लाईओवर जैसी जगह पर तो खासकर सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए थे और इसमें कोई दलील मानी ही नहीं जा सकती है….जो भी सुरक्षा से जुड़े लोग हैं उनमें छोटे से छोटे कर्मचारी को भी पूछो कि कहां खास नजर रखनी है… तो वह भी बता देगा कि पुल पर ध्यान रखना है….
हममें से लगभग सभी ने अपने शहरों में कई बार प्रधानमंत्री और बड़े वीवीआईपी के काफिले को गुजरते देखा होगा…आपको पता होगा कि उस समय सड़क पर कर्फ्यू जैसा माहौल होता है…. लेकिन पुल पर गाड़ियां लाकर लगाना और रास्ता जाम करना और पुलिस का ढीला ढाला रवैया साफ करता है कि पंजाब के अंदर कुछ लोगों ने पहले तय कर लिया था कि किसी दिन सड़क पर प्रधानमंत्री को रोका जाए…..और इस प्लान को शासन प्रशासन में बैठे कुछ लोगों का समर्थन था….जब प्रधानमंत्री बठिंडा से निकले तो कम से कम एक घंटे तो उनके पास था ही कि वे अपने प्लान पर अमल कर लें…और उन्होंने करके दिखा दिया है….
किसान आंदोलन के समय से ही पूरे देश ने देखा है कि पंजाब में खालिस्तानियों का जोर बढ़ा है…पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपनी ताकत न सिर्फ पंजाब में बल्कि पूरे देश में बढ़ाई है….पाकिस्तान और चीन के सहयोग से ये सारा मूवमेंट चल रहा है पर पंजाब की सरकारों ने कभी भी कड़ा कदम नहीं उठाया बल्कि जिम्मेदार सोते रहे और खालिस्तानी जागते रहे….माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का काफिला रोकने में खालिस्तानी तत्वों का भी हाथ होगा। वे काफी दिनों से किसानों को भड़काते रहे हैं…और वोट के लिए कई राजनीतिक दल उनके साथ हो लिए हैं ये जरा चिंता की बात है….

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अब जरा हम इस पूरे प्लान और इसकी राजनीति को समझ लेते हैं….आपको याद होगा कि किसान आंदोलन के समय से ही आंदोलनकारी पूरी कोशिश करते रहे हैं कि किसानों पर बीजेपी सरकार गोली चला दे… चाहे दिल्ली में चलाए….चाहे हरियाणा में चाहे यूपी में…. और जब गोली नहीं चली तो वे लालकिले तक पर चढ़ गए लेकिन वहां भी मोदी सरकार उनके ट्रैप में नहीं फंसी। यूपी- पंजाब समेत कई राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और अगर किसानों पर गोली चल जाए तो पूरी दुनियां में मोदी सरकार को बदनाम किया जा सकता है…. और पंजाब हरियाणा और यूपी के चुनाव में बीजेपी को नुकसान पहुंचाया जा सकता है….
अब पंजाब में जो हुआ है वह उसी से आगे का कदम है…सबको पता है कि अगर प्रधानमंत्री की सुरक्षा को ही खतरे में डाल दिया जाए तो गोली चलने से कोई नहीं रोक सकेगा…तो इस बार ये काम किया गया…खबरें आ रही हैं कि प्रधानमंत्री की कार की ओर भी बढ़ने की कोशिश कुछ लोगों ने की थी…प्रदर्शनकारियों के हाथों में लाठियां भी थीं और हो सकता है जेबों में कोई और हथियार भी रहा हो….अगर प्रदर्शनकारी ज्यादा आगे बढ़ जाते तो मोदी के सुरक्षा कर्मियों की मजबूरी हो जाती कि वे गोली चलाएं….इसमें दस बीस लोगों की जान जा सकती थी….बस इतना होते ही पूरे पंजाब में हल्ला कर दिया जाता कि मोदी ने किसानों पर गोलियां चलवा दी….और चुनाव में किसानों को बीजेपी और उसके सहयोगियों के खिलाफ वोट करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है….पूरे देश में भी मोदी के खिलाफ प्रचार करने के लिए यह अच्छा मुद्दा हो जाता….

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अब दूसरा बड़ा गणित समझिए…ये राजनीति है और इसमें एक तीर निकालते हैं तो उससे कई शिकार किए जाते हैं….
ये तो लगभग तय दिख रहा है कि पंजाब में प्रधानमंत्री के काफिले को जिस तरह और जिस जगह रोका गया है वह भयंकर बड़ी चूक है और उसे माफ किया गया तो पूरे देश में विपक्षी दलों की सरकारें ऐसी लापरवाही कर सकती हैं….आज पूरा देश पंजाब सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर रहा है और लोग कह रहे हैं कि चुनावी फायदे के लिए मोदी कुछ ज्यादा ही सहनशील हो जाते हैं जबकि उनको सख्त कदम उठाने की जरूरत होती है….
अब सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस की सरकार ने लापरवाही जानबूझकर की है..? ऐसा करके उसे क्या फायदा होगा…? हम ये नहीं कह रहे हैं कि सरकार ने ये जानबूझकर किया है….पर जो होने वाला था या जो हुआ उसका फायदा उठाने की कोशिश कांग्रेस ने जरूर की है….देखिए पीएम की रैली जैसे बड़े इवेंट हो रहे हों तो शासन के बहुत सारे अंग उसमें शामिल रहते हैं और कहीं एक गलती हो जाए तो पूरे शासन को गलत नहीं कह सकते हैं…लेकिन कुछ ऐसे तथ्य हैं जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पंजाब सरकार को पूरी तरह निर्दोष कहना ठीक नहीं होगा …जैसे देखिए… मुख्यमंत्री चन्नी यह कहकर प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए नहीं गए कि उनके स्टॉफ में कोई कोरोना पॉजिटिव आ गया…लेकिन वही चन्नी प्रधानमंत्री के वापस जाने के बाद प्रेस कांफ्रेंस करने भीड़ के बीच आ गए…इतना ही नहीं आज खबर आई है कि वे लुधियाना में चुनावी सभा कर रहे हैं….यह भी खबर आई थी कि प्रधानमंत्री का काफिला जब फंस गया था तब CM चन्नी से बात करने की कोशिश की गई पर वे फोन पर नहीं आए… बताया जा रहा है कि पंजाब के चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी भी PM के स्वागत के लिए नहीं पहुंचे थे… और ये प्रोटोकॉल का उल्लंघन है…हो सकता है इन सबको पहले से पता रहा हो कि आगे क्या होने वाला है…
मतलब साफ है कि कल तक PM के लिए जान देने की बात करने वाले कांग्रेस की सरकार के मुखिया जानबूझकर ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी तरफ से प्रधानमंत्री की उपेक्षा की गई है…. ऐसे में पूछा जा सकता है कि ऐसा करके कांग्रेस की सरकार को क्या हासिल होगा…..तो आपको बता दें कि पंजाब में विधानसभा चुनावों के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है और उसके पुराने दिग्गज कैप्टन अमरिंदर कांग्रेस छोड़कर अलग पार्टी बना चुके हैं….राज्य में कांग्रेस सरकार और संगठन में टकराव की नौबत भी आ गई है। आम आदमी पार्टी ने अलग से कांग्रेस की नींव हिला रखी है….ऐसे समय में किसानों का मसीहा बनने की कोशिश करना राजनीति के हिसाब से गलत नहीं है… पर गलत तब है जब इस…. मसीहाई…. प्रयास से देश को नुकसान हो रहा है….अब केंद्र सरकार के पास पंजाब की सरकार को बर्खास्त करने के अलावा शायद दूसरा कोई विकल्प नहीं है….
तो सवाल ये उठता है कि पंजाब की सरकार ने फिर ऐसा क्यों किया कि उसे बर्खास्त कर दिया जाए…तो यहां भी राजनीति है जरा इसे समझें …पंजाब सरकार के कार्यकाल को एक दो महीने ही बचे हैं…एक महीने पहले सरकार चली गई तो कांग्रेस घूम घूमकर बताएगी कि किसानों के लिए उसने पंजाब की सरकार का बलिदान कर दिया है….तो अब किसानों के राज्य में उसको फिर से सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए….यानी सरकार गई तो उसे कुछ खास नुकसान नहीं होगा बल्कि कांग्रेस को उसकी सीटें बढ़ने की संभावना दिख रही है…..
अब जरा सोचें कि यदि पंजाब सरकार नहीं गई तो क्या होगा…? केंद्र सरकार की अब मजबूरी है कि वह ऐसा कुछ करे कि अगली बार कोई भी राज्य में ऐसी हरकत किसी भी PM के साथ न हो…इसके लिए उसे सख्त कदम उठाना ही होगा और राज्य सरकार को बर्खास्त करने से कम की सख्ती शायद मिसाल नहीं बने….
अगर केंद्र ने सरकार को नहीं हटाया तब भी CM चन्नी घूम घूमकर प्रचार करेंगे कि उनकी सरकार के रहते ही किसानों की आवाज दुनियां तक पहुंची और उनकी सरकार खतरे में पड़ी… पर उन्होंने किसानों का साथ दिया…इसलिए किसान अब उनका साथ दें….

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यानी कुल मिलाकर पंजाब में खेली गई राजनीति का सार क्या है …? सार यही है कि मोदी को पटखनी देने के लिए सालों से तरह- तरह के प्रयास करती रही कांग्रेस की आखिरकार जीत हो ही गई…

गीता का श्लोक याद करिए जिसमें कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं- “हतो वा प्राप्यसि स्वर्ग: जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम…” यानी मारे गए तो स्वर्ग… और जीत गए तो पृथ्वी पर राज करने का मौका…
कांग्रेस की सरकार रही तो काफिला रोकने का श्रेय उसे मिलेगा और सरकार गई तो बलिदानी बनकर घूमने का अवसर आएगा…कांग्रेस ने दोनों ही स्थिति में खुद को मजबूत कर लिया है…. अगर सिर्फ राजनीति की बात हो तो पंजाब सरकार के लिए यह उपलब्धि ही है….

अब जरा गणित नंबर तीन को समझें…..जिससे बीजेपी को नुकसान ही होगा… और खालिस्तानी मंसूबे पूरे होंगे…
गणित ये है कि पाकिस्तान लम्बे समय से कोशिश कर रहा है कि सिख्खों को बाकी समाजों से अलग किया जाए और उनको खासकर हिन्दू समाज के खिलाफ भड़काया जाए और हिन्दु जो सिख्खों को अपना भाई मानते हैं और सरदार कहकर सम्मान देते हैं उनको सिख्खों के खिलाफ भड़का दिया जाए… भारत को कमजोर करने के लिए ऐसे ही समाजों को एक दूसरे से लड़ाना जरूरी है…तो उसने खालिस्तानियों को आगे करके सिख्खों की छवि खराब करने का काम शुरू किया है…काफिला रोकने की बदनामी सिख्खों के ऊपर डालने की कोशिश पाकिस्तान कर सकता है….इससे सिख्खों की हिन्दुओं के साथ एकजुटता पर असर पड़ सकता है….जिसका राजनीतिक नुकसान बीजेपी को होगा…
देखना होगा कि सालों से विरोधियों को उनकी ही चाल से मात देते रहे PM मोदी अब क्या चाल चलेंगे….उनके लिए आगे कुआं और पीछे खाई जैसी स्थिति दिख रही है

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