IBC24 Swarn Sharda Scholarship 2022 : 12वीं टॉपर लक्ष्मी अग्रवाल बोलीं- संयुक्त परिवार हो तो पढ़ाई में कभी नहीं आती बाधा.. मैंने किया साबित
IBC24 Swarn Sharda Scholarship 2022 : 12वीं टॉपर लक्ष्मी अग्रवाल बोलीं- संयुक्त परिवार हो तो पढ़ाई में कभी नहीं आती बाधा.. मैंने किया साबित
IBC24 Swarn Sharda Scholarship 2022: Success Story of 12th Topper Laxmi agrawal
रायपुर। IBC24 Swarn Sharda Scholarship 2022 : अपने सामाजिक सरोकारो को निभाते हुए IBC24 समाचार चैनल हर साल स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप सम्मान से जिले की टॉपर बेटियों को सम्मानित करता है। इस साल भी IBC24 समाचार चैनल की ओर से स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप दिया जा रहा है। IBC24 की ओर से दी जाने वाली स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप केवल टॉपर बेटियों को ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक संभाग के टॉपर बेटों को भी दी जाएगी। कवर्धा जिले की लक्ष्मी अग्रवाल ने जिले का मान बढ़ाया है। 12वीं परीक्षा में 469 अंक हासिल किया। लक्ष्मी अग्रवाल ने सरस्वती शिशु मंदिर, कवर्धा में अपना पढ़ाई पूरी की है।
लक्ष्मी अग्रवाल ने कहा कि “संयुक्त परिवार का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि आप अपनी पढ़ाई पर फोकस कर पाते हो। इसमें कभी दबाव या तनाव नहीं होता। यह मेरे परिवार से मुझे मिला।“
सीए बनकर लक्ष्मी बनाना चाहती है अपनी जिंदगी
लक्ष्मी अग्रवाल की जुबानी.. पढ़ाई को लेकर मेरा समर्पण सदा से ही रहा है। आठवीं तक मैंने गांव में ही पढ़ाई की है। मेरा गांव कवर्धा के पास उड़िया खुर्द है। नवमीं से मैं कवर्धा आ गई। कवर्धा में पापा, चाचा का अच्छा बिजनेस है। आर्थिक संघर्ष नहीं है। हम सब संयुक्त परिवार में रहते हैं। पापा-चाचा के मिलाकर हम सब 8 भाई-बहन हैं। घर में हंसी-मजाक का अच्छा माहौल रहता है। इससे मुझे पढ़ाई को बिना तनाव करने में मदद मिली। मैं अपनी पढ़ाई को ऐसे डिजाइन किया ताकि कहीं कोई कमजोर कड़ी न रहे। जैसे मेरे लिए इकॉनॉमिक्स कमजोर कड़ी लग रहा था। मैंने इस पर अलग से पढ़ा। और बेहतर समझने के लिए यूट्यूब चैनल का सहारा लिया। यूट्यूब से टर्म्स, सबजेक्ट डिटेल को ठीक से समझा। सरल ढंग से समझकर फिर तैयारी की। मेरे दसवीं में भी अंक अच्छे थे। स्कूल खुलने के बाद रोज 2 घंटे अतिरिक्त पढ़ाई करती थी। परीक्षा जब नजदीक आ गई तो इसे और बढ़ा दिया। घर में सारे भाई-बहनों ने सहयोग किया। मैं बिना डिस्टर्ब किए पढ़ पाई। घर में कोई जिम्मेदारी भी नहीं दी। घर के सारे काम-काज से मुझे दूर रखा गया। मैंने कभी ट्यूशन, कोचिंग का सहारा नहीं लिया। सेल्फ स्टडी मोड पर ही रही। इसका फायदा ये होता है कि हम अधिक गहराई से पढ़ सकते हैं। खाली समय में मुझे मेहंदी लगाना अच्छा लगता है। मैं सीए बनकर अपना भविष्य संवारना चाहती हूं। इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। आईबीसी-24 की ओर से स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है।

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