‘एक दिन कलेक्टर बनकर रहूंगी’ सैलजा सिंह सेंगर दतिया
‘एक दिन कलेक्टर बनकर रहूंगी’ सैलजा सिंह सेंगर दतिया
वह मां की लाड़ली है तो शिक्षक पिता उसके आदर्श हैं। वह मां के हर सपने को पूरा होते हुए देखना चाहती है। उसने ठान रखा है कि एक दिन वह कलेक्टर बनकर रहेगी।
आईएएस अफसर बनने का सपना पाले मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की बारहवीं कक्षा में दतिया जिले में अव्वल आने वाली सैलजा सिंह सेंगर पढ़ाई लिखाई में शुरू से ही होशियार हैं। दतिया के टाउन हॉल बड़े बाजार निवासी सैलजा एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और उसके पिता शासकीय शिक्षक हैं। परिवार में माता-पिता और एक बड़ा भाई है, जो भोपाल में रहकर पढ़ाई कर रहा है। दतिया के डस्ठ कन्या स्कूल में पढ़ने वाली सैलजा बचपन से ही होशियार रही है। उसका कहना है कि उसे न तो फिल्में देखना ज्यादा पसंद है न ही, टीवी सीरियल्स। उसे पसंद है तो, अपनी सहेलियों के साथ बैडमिंटन खेलना और सायकिल चलाना। सैलजा का ज्यादातर समय पढ़ाई में ही बीतता है, वह अपने बाबा को ही अपना आदर्श मानती है। उसके आईएएस बनने के लक्ष्य पर उसके घरवाले यही कामना करते हैं कि सैलजा अपने लक्ष्य में कामयाब हो। और हां, सैलजा को जो काम सबसे ज्यादा पसंद है वह है, घर में अपनी मां के साथ अठखेलियां करना। सैलजा अपनी मां से न केवल बहुत प्यार करती है बल्कि उनके हर सपने को पूरा होते देखना चाहती है। सैलजा के माता-पिता को अपनी बेटी पर गर्व है।

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