GST on Petrol and Diesel Latest News: GST के दायरे में आएगा पेट्रोल-डीजल? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर सकती हैं आम जनता को राहत देने वाला ऐलान, पेट्रोलियम मंत्री ने भी दिए संकेत
GST on Petrol and Diesel Latest News: GST के दायरे में आएगा पेट्रोल-डीजल? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर सकती हैं आम जनता को राहत देने वाला ऐलान, पेट्रोलियम मंत्री ने भी दिए संकेत
GST on Petrol and Diesel Latest News: GST के दायरे में आएगा पेट्रोल-डीजल? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कर सकती हैं आम जनता को राहत देने वाला ऐलान /Image: IBC24 Customized
- दिल्ली हो या रायपुर, पेट्रोल की कीमतें लगभग एक समान हो जाएंगी
- राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई
- उपभोक्ताओं को पता होगा कि वे केवल जीएसटी चुका रहे हैं
नई दिल्ली: GST on Petrol and Diesel Latest News वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार यानी एक फरवरी को अपना रिकॉर्ड नौवां बजट पेश करेंगी जिनमें दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं। बजट 2026 को लेकर जहां एक ओर आम जनता को राहत की उम्मीद है तो दूसरी ओर देशभर के लोग सरकार की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं कि बजट 2026-27 में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ी राहत मिल सकती है। कहा जा रहा है कि मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। बता दें कि साल 2017 में जीएसटी का सिस्टम पूरे देश में लागू हुआ था। तब पेट्रोल और डीजल को इसके दायरे से बाहर रखा गया था। लेकिन, बाद में इन्हें भी जीएसटी के तहत लाने का प्लान था।
बजट 2026 में हो सकती है बड़ी घोषणा
GST on Petrol and Diesel Latest News मिली जानकारी के अनुसार देश के अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल-डीजल का रेट अलग-अलग है, लेकिन औसतन देखा जाए तो पेट्रोल के दाम करीब 95 रुपए से लेकर 105 रुपए के बीच है। जबकि 88 रुपए से लेकर 96 रुपए के बीच है। हालांकि पेट्रोलियम पदार्थों में केंद्र सरकार के अलावा राज्य सरकार भी वैट टैक्स लगाती है जो ईंधन के दाम को प्रभावित करती है। ऐसे में अगर पेट्रोलियम पदार्थ जीएसटी के दायरे में आ जाता है तो आम जनता को बड़ी राहत मिल सकती है।
जीएसटी के दायरे में आएगा पेट्रोल-डीजल
वहीं, अगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 206 यानि कल पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की घोषणा करती है तो आम जनता को सीधा राहत पहुंचेगा। पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने से जनता को इसलिए फायदा होगा क्योंकि जीएसटी के दायरे में आने के बाद वैट खत्म हो जाता है। यानि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत पर सीधे केंद्र सरकार का कंट्रोल रहेगा, राज्यों की ओर से लगने वाला वैट टैक्स खत्म हो जाएगा। बता दें कि अभी जीएसटी के तहत तीन तरह के स्लैब हैं। इनमें 5 फीसदी, 18 फीसदी और 40 फीसदी का स्लैब है।
पेट्रोलियम मंत्री भी दिए संकेत
पेट्रोलियम मंत्री ने हरदीप सिंह पुरी ने एक नामी मीडिया संस्थान से बात करते हुए कहा था कि ”सरकार उपभोक्ताओं पर बोझ कम रखने को लेकर संवेदनशील है- कच्चे तेल की कीमत, टैक्स और राजस्व, तीनों के बीच संतुलन जरूरी है। बजट जैसे मौकों पर नीतिगत फैसलों की गुंजाइश रहती है। सबसे अहम बात यह है कि उन्होंने आम आदमी की उम्मीदों को समझते हुए कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि आगे तेल कंपनियां इस पर (कीमतों में राहत पर) विचार करेंगी।” यह एक इशारा हो सकता है कि अगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार स्थिर रहा, तो आने वाले समय में राहत मिल सकती है।
इस वजह से हर राज्य में अलग-अलग होते हैं दाम
- बेसिक कीमत: इसमें फ्यूल की उत्पादन लागत और ढुलाई खर्च शामिल होता है
- डीलर का कमीशन: दूसरे नंबर पर डीलर का कमीशन आता है
- एक्साइज ड्यूटी: केंद्र सरकार फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी लगाती है
- वैट: राज्य सरकारें फ्यूल पर वैट लगाती हैं। राज्य सरकारों के वैट के रेट्स अलग-अलग हैं
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