भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से एफडीआई को त्वरित मंजूरी के लिए 40 उप-क्षेत्र चिह्नित

भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से एफडीआई को त्वरित मंजूरी के लिए 40 उप-क्षेत्र चिह्नित

भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से एफडीआई को त्वरित मंजूरी के लिए 40 उप-क्षेत्र चिह्नित
Modified Date: May 5, 2026 / 06:18 pm IST
Published Date: May 5, 2026 6:18 pm IST

नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) सरकार ने भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले चीन एवं अन्य देशों के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्तावों को 60 दिनों के भीतर मंजूरी देने के लिए दुर्लभ खनिज चुंबक और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड समेत 40 उप-क्षेत्र चिन्हित किए हैं।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इन पड़ोसी देशों से एफडीआई प्रस्तावों को मंजूरी के लिए एक विस्तृत प्रक्रिया भी तय की है। मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान से आने वाले एफडीआई प्रस्तावों पर किया जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में निवेश प्राप्त करने वाली भारतीय कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी और नियंत्रण हर समय भारतीय नागरिकों या भारतीय स्वामित्व वाली इकाइयों के पास ही रहेगा।

एसओपी के लिए चिन्हित 40 उप-क्षेत्र पूंजीगत वस्तु विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं कलपुर्जा विनिर्माण, पॉलिसिलिकॉन एवं वेफर, उन्नत बैटरी घटक, दुर्लभ खनिज स्थायी चुंबक और इनके प्रसंस्करण से संबंधित हैं।

इन उप-क्षेत्रों में इन्सुलेशन सामग्री, ताप/जल/परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए कास्टिंग-फोर्जिंग, मशीन टूल्स, डिस्प्ले घटक (एलसीडी/एलईडी), कैमरा मॉड्यूल, इलेक्ट्रॉनिक कैपेसिटर, स्पीकर-माइक्रोफोन, लिथियम-आयन बैटरियां, वेयरेबल उपकरण और दुर्लभ धातु एवं चुंबक निर्माण शामिल हैं।

सरकार ने इन देशों से आने वाले निवेश के लिए रिपोर्टिंग नियम भी तय किए हैं। इसके तहत निवेश से जुड़ी जानकारी विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधनों के भुगतान और रिपोर्टिंग) विनियम, 2019 के अनुरूप दी जाएगी और यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को उपलब्ध होगी।

नियमों के मुताबिक, सूचना देने की जिम्मेदारी निवेश पाने वाली भारतीय कंपनी की होगी, जिसे निवेश से पहले संबंधित विवरण डीपीआईआईटी को देना होगा।

निवेशक को अपनी हिस्सेदारी संरचना, वास्तविक लाभार्थी, संगठनात्मक ढांचा, प्रवर्तक, निदेशक मंडल और प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिकों की जानकारी, उनकी नागरिकता और नियंत्रण अधिकारों का विवरण देना होगा।

वहीं, भारतीय कंपनी को अपने पंजीकरण और प्रस्तावित/मौजूदा हिस्सेदारी का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होगा।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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