भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव की मजबूती दर्शाती है 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दरः प्रधानमंत्री मोदी

भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव की मजबूती दर्शाती है 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दरः प्रधानमंत्री मोदी

भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव की मजबूती दर्शाती है 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दरः प्रधानमंत्री मोदी
Modified Date: June 5, 2026 / 10:28 pm IST
Published Date: June 5, 2026 10:28 pm IST

दमन, पांच जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर यह दर्शाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव बेहद मजबूत है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा जताया कि देश अपने 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयासों के दम पर मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी खुद को संभालने में पूरी तरह सक्षम है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है।

मोदी ने शुक्रवार को घोषित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी वृद्धि 7.7 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी-मार्च तिमाही में यह 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई।

उन्होंने कहा, ‘आज जो आंकड़े सामने आए हैं, वे साफ करते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव कितनी मजबूत है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रशासित प्रदेश दमन में 2,970 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और हवाई अड्डे के नए टर्मिनल के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही।

उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘मेरे सामने आए आंकड़े मेरे वास्तव में बेहद खुशी देने वाले हैं। मैं इस खुशी को आपके साथ भी साझा करना चाहता हूं।’

प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में पिछले तीन महीनों से अधिक समय से जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान का हवाला देते हुए कहा कि वैश्विक संकट के इस कठिन दौर में भी भारत अपने 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से खुद को बेहतर तरीके से संभाल रहा है।

उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में केवल 60 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हो पाता था लेकिन आज यह आंकड़ा लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

उन्होंने संस्थागत प्रसव में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि अब देश में 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों का जन्म अस्पतालों में हो रहा है।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम

प्रेम


लेखक के बारे में