एयर इंडिया के बोर्ड की बैठक कल; लागत कटौती, सीईओ चयन के मुद्दे पर होगी चर्चा
एयर इंडिया के बोर्ड की बैठक कल; लागत कटौती, सीईओ चयन के मुद्दे पर होगी चर्चा
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) घाटे में चल रही एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया के निदेशक मंडल की बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक में वित्तीय स्थिति, लागत-बचत के उपाय, नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के चयन और अन्य मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
टाटा समूह के स्वामित्व वाली इस एयरलाइन को पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है।
सूत्रों ने बताया कि एयरलाइन के निदेशक मंडल की बैठक बृहस्पतिवार को दिल्ली में होगी।
उन्होंने बताया कि बैठक में 2025-26 के वित्तीय परिणाम, लागत-बचत के उपाय, सीईओ उत्तराधिकार योजना और अन्य मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
बैठक के एजेंडा के बारे में सटीक जानकारी नहीं मिल सकी है।
एयरलाइन एक महत्वाकांक्षी परिवर्तन योजना के बीच में है और नए सीईओ की तलाश कर रही है क्योंकि सिंगापुर एयरलाइंस समूह के अनुभवी कैंपबेल विल्सन इस साल के अंत में पद छोड़ देंगे।
एयर इंडिया के निदेशक मंडल की अध्यक्षता टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन कर रहे हैं। विल्सन, सिंगापुर एयरलाइंस के सीईओ गो चून फोंग, संजीव मेहता, एलिस वैद्यन, पी आर रमेश और पी बी बालाजी बोर्ड के सदस्य हैं।
पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण एयरलाइन को कई अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए लंबे मार्ग से जाना पड़ रहा है जिससे ईंधन की खपत भी बढ़ रही है।
इस बीच, विमान ईंधन की बढ़ती कीमत के बीच लागत बचत उपायों के तहत एयर इंडिया बिजनेस क्लास यात्रियों के लिए भोजन को टिकट से अलग करने और लाउंज की सुविधा बंद करने पर विचार कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि इस योजना के तहत, एयरलाइन उन यात्रियों के लिए एक अलग किराया श्रेणी पेश कर सकेगी जो भोजन नहीं लेना चाहते। इसी तरह, बिजनेस क्लास यात्रियों के पास लाउंज की सुविधा चुनने का विकल्प होगा।
विल्सन ने एक मई को कर्मचारियों से कहा था कि हवाई क्षेत्र और जेट ईंधन की कीमतों की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
उन्होंने एक संदेश में कहा था, ‘‘…जेट ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि, हवाई क्षेत्र बंद होने और लंबे उड़ान मार्गों के कारण हमारी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें अब आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक नहीं रह गई हैं।’’
भाषा अजय अजय रमण
रमण

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