बंबई उच्च न्यायालय ने आरबीआई अधिकारी की अनधिकृत अनुपस्थिति को गंभीर कदाचार माना, याचिका खारिज

बंबई उच्च न्यायालय ने आरबीआई अधिकारी की अनधिकृत अनुपस्थिति को गंभीर कदाचार माना, याचिका खारिज

बंबई उच्च न्यायालय ने आरबीआई अधिकारी की अनधिकृत अनुपस्थिति को गंभीर कदाचार माना, याचिका खारिज
Modified Date: June 14, 2026 / 01:41 pm IST
Published Date: June 14, 2026 1:41 pm IST

मुंबई, 14 जून (भाषा) अनधिकृत रूप से कार्य से अनुपस्थित रहना भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक अधिकारी द्वारा सार्वजनिक हित के खिलाफ और गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। बंबई उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी करते हुए सेवा से हटाए गए अधिकारी को राहत देने से इनकार कर दिया है।

न्यायमूर्ति आर. आई. चागला और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने 10 जून को पारित आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता अनिमेष बकुली आरबीआई में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे और लंबे समय तक अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहना उनके दायित्वों के विपरीत है।

अदालत ने कहा, “इस प्रकार की अनधिकृत अनुपस्थिति निस्संदेह सार्वजनिक हित के प्रतिकूल है और गंभीर कदाचार है, जिसके लिए सेवा से बर्खास्तगी उचित है।”

अदालत ने बकुली की याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरबीआई द्वारा उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय किसी प्रकार की त्रुटि से ग्रस्त नहीं है।

बकुली ने आरबीआई के फरवरी, 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें अनधिकृत अनुपस्थिति के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता 2013 से आरबीआई में कार्यरत थे और जनवरी, 2018 से वरिष्ठ सहायक के पद पर तैनात थे।

अदालत के अनुसार, बकुली ने कई बार कोलकाता स्थानांतरण की मांग की थी ताकि वे अपने माता-पिता के साथ रह सकें, लेकिन आरबीआई ने उनके अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया था।

अदालत ने पाया कि उन्हें कई अवसर दिए गए थे और किसी प्रकार के प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का मामला नहीं बनता।

पीठ ने कहा कि अनधिकृत अनुपस्थिति के कारण आरबीआई के पास अनुशासनात्मक कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

भाषा योगेश अजय

अजय


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