स्टेनलेस स्टील उत्पादन में देश को अग्रणी बनाने के लिए क्षमता विस्तार, मूल्य संवर्धन अहम

स्टेनलेस स्टील उत्पादन में देश को अग्रणी बनाने के लिए क्षमता विस्तार, मूल्य संवर्धन अहम

स्टेनलेस स्टील उत्पादन में देश को अग्रणी बनाने के लिए क्षमता विस्तार, मूल्य संवर्धन अहम
Modified Date: June 27, 2026 / 08:43 pm IST
Published Date: June 27, 2026 8:43 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) भारत को क्षमता विस्तार, प्रौद्योगिकी नवाचार और मूल्य संवर्धित उपयोग वैश्विक स्तर पर स्टेनलेस स्टील उत्पादन में अग्रणी बनाने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। उद्योग के एक प्रमुख कार्यकारी ने यह बात कही।

जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने कहा कि भारतीय स्टेनलेस स्टील उद्योग इस समय एक निर्णायक मोड़ पर है। क्षमता विस्तार, प्रौद्योगिकी प्रगति, उत्पाद नवाचार और मूल्य संवर्धित अनुप्रयोगों में सतत निवेश के साथ भारत में वैश्विक स्टेनलेस स्टील विनिर्माण केंद्र बनने की क्षमता है।

उद्योग निकाय इंडियन स्टेनलेस स्टील डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईएसएसडीए) के अनुसार, देश का स्टेनलेस स्टील उत्पादन 51.6 लाख टन है, जबकि वैश्विक उत्पादन 642 करोड़ टन है। वहीं वैश्विक औसत छह किलोग्राम के मुकाबले भारत में प्रति व्यक्ति स्टेनलेस स्टील खपत लगभग 3.4 किलोग्राम है।

आईएसएसडीए के अध्यक्ष राजमणि कृष्णमूर्ति ने कहा कि केवल बुनियादी ढांचा, मेट्रो और रेलवे, निर्माण और रियल एस्टेट ही नहीं, बल्कि स्टेनलेस स्टील के उपयोग हरित हाइड्रोजन, खाद्य प्रसंस्करण और दवा जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों के सतत विकास में भी योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टेनलेस स्टील उपभोक्ता बन रहा है, उद्योग जगत विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को तेज करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

कृष्णमूर्ति ने कहा, “उपभोग वृद्धि से आगे बढ़कर भारत के पास स्टेनलेस स्टील और इसके अनुप्रयोगों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और नवाचार केंद्र बनने का अवसर है।”

भाषा योगेश रमण

रमण


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