बीते वित्त वर्ष 1.86 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत बजट का पूरा इस्तेमाल: रक्षा मंत्रालय
बीते वित्त वर्ष 1.86 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत बजट का पूरा इस्तेमाल: रक्षा मंत्रालय
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि उसने वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा सेवाओं के लिए निर्धारित 1.86 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत परिव्यय का पूरी तरह से उपयोग कर लिया है।
मंत्रालय ने बताया कि कुल 2.28 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 503 प्रस्तावों के लिए पूंजीगत खरीद अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए।
पूंजीगत व्यय के लिए मूल विनियोग 1.80 लाख करोड़ रुपये था। मंत्रालय ने कहा कि पहली दो तिमाहियों के दौरान रक्षा मंत्रालय द्वारा हासिल की गई खर्च की गति और ऑपरेशन सिंदूर के बाद आधुनिकीकरण तथा अन्य उद्देश्यों के लिए सेनाओं की बढ़ी हुई आवश्यकताओं को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने इसे और बढ़ाया।
बयान में कहा गया, ”खर्च का एक बड़ा हिस्सा विमानों और एयरो इंजन के अधिग्रहण के लिए है, जिसके बाद लैंड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर उपकरण, हथियार, जहाज निर्माण, विमानन स्टोर और प्रोजेक्टाइल का स्थान है।”
इसमें वायुसेना के लिए बहु-उद्देश्यीय लड़ाकू विमान, मध्यम ऊंचाई वाले लंबी दूरी के आरपीए (रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट), नौसेना के लिए माइन काउंटर मेजर वेसल्स, सेना के लिए क्विक रिएक्शन सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली और नाग मिसाइल प्रणाली मार्क-2 के अधिग्रहण के प्रस्ताव शामिल हैं।
सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के अलावा, खर्च का प्रभावी उपयोग सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास में भी मदद करेगा। रक्षा मंत्रालय ने 6.81 लाख करोड़ रुपये के 109 प्रस्तावों को प्रारंभिक मंजूरी दी, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में 1.76 लाख करोड़ रुपये के 56 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रक्षा मंत्रालय (सिविल), पेंशन सहित रक्षा बजट का कुल उपयोग अंतिम आवंटन के मुकाबले 99.62 प्रतिशत रहा।
भाषा पाण्डेय रमण
रमण

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