साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा के प्रति आम लोगा का भरोसा जरूरी: रिजर्व बैंक गवर्नर

साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा के प्रति आम लोगा का भरोसा जरूरी: रिजर्व बैंक गवर्नर

साइबर सुरक्षा, डेटा सुरक्षा के प्रति आम लोगा का भरोसा जरूरी: रिजर्व बैंक गवर्नर
Modified Date: November 29, 2022 / 08:20 pm IST
Published Date: December 16, 2020 3:12 pm IST

नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को कहा कि बैंकिंग प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के प्रति आम लोगों का विश्वास जीतने के लिये साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान होना चाहिये। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिये यह आवश्यक है।

दास एनसीएईआर द्वारा आयोजित एक वेबिनार में बोल रहे थे। यह ‘‘भारत में निवेशक शिक्षा में निवेश– आगे बढ़ने की प्राथमिकता’’ विषय पर थी। दास ने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी एक बड़ा साधन है लेकिन यह समाज के कुछ वर्गों को दूर करने का कारण भी बन सकती है।’’

रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि अब तक वंचित रही आबादी के बीच औपचारिक वित्तीय (प्रौद्योगिकी) सेवाओं को लेकर विश्वास कायम करना जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘उचित वित्तीय शिक्षा और जागरूकता के जरिये ग्राहक सुरक्षा और शिकायत निपटान, डेटा विश्वसनीयता, साइबर सुरक्षा और भ्रामक जानकारी के जरिये उत्पादों को बेचने जैसे मुद्दों के मामले में उपयुक्त सुरक्षोपाय किये जाने की आवश्यकता है। ये सभी मुद्दे वित्तीय शिक्षा प्रदाताओं के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है।’’

दास ने कहा कि देश में वित्तीय समावेश काफी तेज गति से बढ़ने जा रहा है। डिजिटल क्षेत्र के बारे में जानकारी रखने वाला युवा तेजी से इसके साथ जुड़ रहा है। सोशल मीडिया से शहरी- ग्रामीण क्षेत्र का फासला समाप्त होता जा रहा है और प्रौद्योगिकी अब नीतिगत हस्तक्षेप की तरह होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि बेहतर ग्राहक सुरक्षा के साथ साथ रिण उपलब्धता निरंतर जारी रखने, निवेश, बीमा और पेंशन उत्पादों की मांग की अड़चनों को दूर करने के लिये इनकी पैठ बढ़ाने की आवश्यकता है। वित्तीय के साक्षरता के क्षेत्र में सथानीय भाषाओं को बढ़ावा मिलना चाहिये। इसमें स्थानीय स्थिति के मताबिक लक्षित क्षेत्र को ध्यान में रखने की जरूरत है।

गवर्नर ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत जैसे बड़े देश में, जहां बड़ी संख्या में लोग अब भी सेवाओं के इंतजार में हैं, वित्तीय साक्षरता की जिम्मेदारी अकेले वित्तीय क्षेत्र के नियामक की नहीं हो सकती है।

भाषा

महाबीर मनोहर

मनोहर


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