बाहरी झटकों के बावजूद घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत : आरबीआई रिपोर्ट
बाहरी झटकों के बावजूद घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत : आरबीआई रिपोर्ट
मुंबई, 30 जून (भाषा) घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत बैंक और गैर-बैंकिंग इकाइयों के बही-खाते के बल पर मजबूत बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मंगलवार को जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में यह बात कही गई।
रिपोर्ट के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (एससीबी) मजबूत पूंजी, नकदी के पर्याप्त भंडार, परिसंपत्ति गुणवत्ता में निरंतर सुधार और स्थिर मुनाफे के कारण पूरी तरह सुरक्षित और सुदृढ़ स्थिति में हैं।
रिपोर्ट कहती है कि वृहद दबाव परीक्षण के नतीजे बताते हैं कि बैंकिंग प्रणाली संभावित झटकों को सहने के लिए मजबूत स्थिति में है। अन्य प्रकार की प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए भी समग्र पूंजी अनुपात के नियामकीय मानकों से पर्याप्त ऊपर बने रहने का अनुमान है।
इसमें कहा गया कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) भी मजबूत पूंजीकरण, बेहतर लाभप्रदता और परिसंपत्ति की गुणवत्ता में सुधार के जरिये वित्तीय रूप से सुदृढ़ स्थिति में बनी हुई हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि साइबर खतरों के दृष्टिकोण से कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित साइबर हमले निकट अवधि की सबसे महत्वपूर्ण चुनौती हैं।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली दो प्रमुख शक्तियों बढ़ते भू-राजनीतिक विभाजन और कृत्रिम मेधा (एआई) में तीव्र तकनीकी प्रगति से उत्पन्न व्यवधान के कारण पुनर्गठित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि जारी संघर्षों और लगातार आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, जिसका आंशिक कारण एआई आधारित संभावित उत्पादकता लाभों को लेकर आशावाद है। हालांकि, तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच निकट भविष्य का दृष्टिकोण अनिश्चित बना हुआ है।
मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली ने बड़े पैमाने पर बाहरी झटकों के बावजूद उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। मजबूत वृद्धि, कम मुद्रास्फीति, वित्तीय और गैर-वित्तीय कंपनियों के मजबूत बही-खाते और पर्याप्त ‘बफर’ ने देश की व्यापक आर्थिक-वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने में मदद की है।
उन्होंने कहा कि फिर भी, हम बदलते बाहरी और घरेलू जोखिमों के प्रति सतर्क हैं और उन सुरक्षा ढांचों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो हमारी अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली को संभावित झटकों से बचाते हैं।
गवर्नर ने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक यह स्वीकार करता है कि प्रतिकूल बाहरी झटकों का जोखिम बढ़ गया है, जिसमें भू-राजनीतिक संघर्ष और वैश्विक विभाजन नीति-निर्माताओं के लिए प्रमुख चुनौतियों के रूप में उभरे हैं।
भाषा योगेश अजय
अजय

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