एसईजेड इकाइयों को शुल्क राहत का फैसला सीमित समय के लिए, नीति में बदलाव नहींः सूत्र
एसईजेड इकाइयों को शुल्क राहत का फैसला सीमित समय के लिए, नीति में बदलाव नहींः सूत्र
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में मौजूद विनिर्माण इकाइयों को घरेलू बाजार में बिक्री के लिए सीमित शुल्क रियायत देने का सरकार का फैसला एकबार दी गई राहत है और इसे नीति में स्थायी बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि एसईजेड का मूल रूप से ध्यान निर्यात पर ही बना रहेगा।
सरकार ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एसईजेड में मौजूद विनिर्माण इकाइयों को राहत देने के लिए अधिसूचित उत्पादों की घरेलू बाजार में बिक्री पर मार्च, 2027 तक एक वर्ष के लिए शुल्क रियायत दी है।
सूत्रों ने कहा, “यह एक सीमित समय वाला और लक्षित अल्पकालिक उपाय है। इसका उद्देश्य एसईजेड इकाइयों के सामने मौजूद तात्कालिक चुनौतियों का समाधान करना है। यह एसईजेड रूपरेखा में कोई व्यापक या स्थायी बदलाव नहीं है।”
इस प्रावधान के तहत एसईजेड इकाइयों को अपने निर्यात कारोबार का अधिकतम 30 प्रतिशत तक घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है।
सूत्रों ने कहा कि यह सीमा व्यवस्था को संतुलित और नियंत्रित बनाए रखने के लिए तय की गई है, ताकि एसईजेड का निर्यात-केन्द्रित स्वरूप बरकरार रहे।
इसके अलावा, न्यूनतम मूल्य संवर्धन की शर्त यह सुनिश्चित करती है कि लाभ वास्तविक विनिर्माण गतिविधियों को ही मिले, न कि कम मूल्य के व्यापार को।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को इस शुल्क राहत से बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
रियायती शुल्क दरें इस तरह निर्धारित की गई हैं कि घरेलू शुल्क क्षेत्र (डीटीए) की इकाइयों के साथ समान प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
सूत्रों ने कहा, “यह रियायत एसईजेड में स्थित इकाइयों को अतिरिक्त लाभ देने के लिए नहीं, बल्कि उनके मौजूदा कर लाभों को संतुलित करने के लिए है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक व्यवधान और निर्यात मांग में कमजोरी जैसे बाहरी कारकों के कारण उठाया गया है, ताकि एसईजेड इकाइयां अपनी उत्पादन क्षमता के करीब संचालन जारी रख सकें।
सूत्रों ने कहा कि इस उपाय को केवल एक बार दी गई राहत के रूप में ही देखा जाना चाहिए और इससे घरेलू बाजार में एसईजेड की भूमिका के विस्तार का कोई संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

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