देखभाल की जिम्मेदारियों के कारण 10 में से आठ महिलाएं नौकरी के लिए आवेदन नहीं करतीं: रिपोर्ट
देखभाल की जिम्मेदारियों के कारण 10 में से आठ महिलाएं नौकरी के लिए आवेदन नहीं करतीं: रिपोर्ट
मुंबई, 16 मई (भाषा) पारिवारिक देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारियां अब भी महिलाओं के करियर फैसलों को प्रभावित कर रही हैं। एक सर्वेक्षण में 83 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने कुछ पदों के लिए आवेदन करना छोड़ दिया क्योंकि उन्हें लगता था कि काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होगा। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
नौकरी के बारे में सूचना देने वाली वेबसाइट इंडीड की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 10 में से 8 महिलाओं ने देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों के कारण कुछ नौकरियों के लिए आवेदन न करने का विकल्प चुना है। यह महिलाओं के करियर विकल्पों पर देखभाल कार्य के निरंतर प्रभाव को बताता है।
रिपोर्ट में 83 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उन्होंने कुछ नौकरियों के लिए आवेदन इसलिए नहीं किया, क्योंकि उन्हें लगा कि काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होगा।
इंडीड इंडिया के प्रबंध निदेशक शशि कुमार ने कहा, “हालांकि कई परिवारों में देखभाल की जिम्मेदारियां साझा की जाती हैं, लेकिन भारत में महिलाएं अब भी करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेते समय इन जिम्मेदारियों को ध्यान में रखती हैं। महिलाएं महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन अब वे ऐसी नौकरियों को चुन रही हैं जो उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियों के अनुरूप हों। जो कंपनियां काम में वास्तविक लचीलापन और स्पष्ट अपेक्षाएं देती हैं, वे महिलाओं को आकर्षित करने और उन्हें लंबे समय तक बनाए रखने में बेहतर स्थिति में होंगी।”
इंडीड की यह रिपोर्ट देशभर की 1,141 महिलाओं की राय पर आधारित है। इनमें कामकाजी माताएं, नौकरी से विराम पर चल रहीं महिलाएं और विराम के बाद फिर से काम पर लौटी महिलाएं शामिल हैं। सर्वेक्षण में बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों को शामिल किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि नौकरी चुनते समय महिलाओं के लिए काम में लचीलापन सबसे महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। 53 प्रतिशत महिलाओं ने लचीले कामकाजी समय को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया, जबकि 48 प्रतिशत महिलाओं ने घर से काम या मिश्रित कार्य व्यवस्था को अहम माना।
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 10 में से आठ महिलाओं ने कहा कि वे बेहतर लचीलापन और कार्य-जीवन संतुलन के बदले कम वेतन स्वीकार करने या इस पर विचार करने को तैयार हैं। इनमें 45 प्रतिशत महिलाओं ने कम वेतन स्वीकार करने की बात कही, जबकि 34 प्रतिशत ने कहा कि वे इस पर विचार कर सकती हैं।
कामकाजी माताओं के लिए घर से काम और मिश्रित कार्य व्यवस्था विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनी हुई है। 37 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि यही बदलाव कामकाजी माताओं के लिए सबसे अधिक मददगार साबित हो सकता है।
वहीं 59 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों का मानना है कि कार्यस्थलों पर बढ़े लचीलेपन से भारत में महिलाओं के करियर अवसर वास्तव में बेहतर हुए हैं, जबकि 30 प्रतिशत ने कहा कि इससे कुछ हद तक मदद मिली है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे अधिक कंपनियां फिर से दफ्तर आधारित कामकाज की ओर लौट रही हैं, कार्यालय में उपस्थिति की अनिवार्यता नौकरी संबंधी फैसलों को प्रभावित कर रही है।
भाषा योगेश रमण
रमण

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