सरकार ने बारिश की कमी और संभावित सूखे की स्थिति की समीक्षा की, तालमेल के निर्देश जारी
सरकार ने बारिश की कमी और संभावित सूखे की स्थिति की समीक्षा की, तालमेल के निर्देश जारी
नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद कहा कि सरकार देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और संभावित सूखे की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
शाह ने सभी केंद्रीय विभागों को सतर्क रहने और खरीफ फसलों की बुवाई के बारे में किसानों को सही सलाह देने के लिए राज्यों के साथ तालमेल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, शाह ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ‘अल नीनो के कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और उसके असर की समीक्षा की।’
बैठक में मंत्रियों ने किसानों को पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने, सभी जलाशयों में जल स्तर पर बारीकी से नजर रखने और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया।
जून के दौरान पूरे भारत में बारिश में लगभग 40 प्रतिशत की कमी देखी गई, जिसमें मध्य भारत सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ, जहां 50.4 प्रतिशत की कमी रही। जुलाई में भी मासिक औसत बारिश सामान्य से कम रहने की उम्मीद है।
कम बारिश के कारण 25 जून तक खरीफ फसलों की बुवाई 23 प्रतिशत घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर रह गई।
शाह ने कहा, ‘‘सरकार अल नीनो के कारण देश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और संभावित सूखे की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।’’
उन्होंने कृषि मंत्रालय तथा अन्य मंत्रालयों को मौजूदा स्थिति के बारे में सतर्क रहने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे राज्य सरकारों के साथ तालमेल बिठाएं और किसानों को सही फसलें बोने की सलाह दें।
बैठक में गृह और कृषि सचिवों के साथ-साथ विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
इस बैठक में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प विभाग, उपभोक्ता मामले विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय; पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव भी शामिल हुए।
बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य और डिवीजन प्रमुख, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान तथा राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) सहित कई अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
प्रेम

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