इस्पात क्षेत्र में हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की योजना लाएगी सरकार

इस्पात क्षेत्र में हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की योजना लाएगी सरकार

इस्पात क्षेत्र में हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की योजना लाएगी सरकार
Modified Date: June 29, 2026 / 04:28 pm IST
Published Date: June 29, 2026 4:28 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) सरकार इस्पात विनिर्माण प्रक्रिया में स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की एक योजना लाने की तैयारी कर रही है। एक सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि इस पहल का उद्देश्य घरेलू इस्पात उद्योग से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। ‘नेशनल स्ट्रैटेजी फॉर सस्टेनेबल सेकेंडरी स्टील’ नामक इस योजना को अगले तीन महीने में शुरू किए जाने की संभावना है।

मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘‘ इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है।’’

इस योजना का लाभ देश के सभी इस्पात उत्पादकों को मिलेगा। हालांकि, इसके तहत आवंटित धनराशि का बड़ा हिस्सा द्वितीयक इस्पात उत्पादकों के लिए निर्धारित किया जाएगा।

‘नेशनल स्ट्रैटेजी फॉर सस्टेनेबल सेकेंडरी स्टील’ का उद्देश्य इस्पात निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं में स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और वैकल्पिक सामग्रियों को बढ़ावा देना है, ताकि घरेलू इस्पात उद्योग से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सके।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और वह शुद्ध शून्य उत्सर्जन वाला देश बनने का लक्ष्य रखता है।

इस्पात क्षेत्र सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले उद्योगों में शामिल है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस्पात क्षेत्र दुनिया के सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले उद्योगों में शामिल है। भारत में इस क्षेत्र का देश के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 10-12 प्रतिशत हिस्सा है। देश में प्रति टन कच्चे इस्पात के उत्पादन पर 2.55 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जबकि वैश्विक औसत लगभग 1.9 टन है।

भाषा निहारिका अजय

अजय


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