जीएसटी को उद्योग जगत की सराहना, तेज रिफंड और आसान ऑडिट की मांग: डेलॉयट सर्वेक्षण

जीएसटी को उद्योग जगत की सराहना, तेज रिफंड और आसान ऑडिट की मांग: डेलॉयट सर्वेक्षण

जीएसटी को उद्योग जगत की सराहना, तेज रिफंड और आसान ऑडिट की मांग: डेलॉयट सर्वेक्षण
Modified Date: June 23, 2026 / 05:26 pm IST
Published Date: June 23, 2026 5:26 pm IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को लेकर भारतीय उद्योग जगत का रुख काफी सकारात्मक रहा है। हालांकि, कारोबारियों ने रिफंड में देरी और ऑडिट संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर चिंता भी जताई है। डेलॉयट इंडिया ने एक सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला गया है।

जीएसटी को प्रभावी हुए एक जुलाई को नौ वर्ष पूरे होने वाले हैं। इससे पहले डेलॉयट इंडिया की ओर से जारी किए गए ‘जीएसटी 9’ सर्वेक्षण में कहा गया है कि अब सुधारों का अगला चरण केवल डिजिटलीकरण तक सीमित न रहकर कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित और आंकड़े-आधारित विवाद निपटान पर केंद्रित होना चाहिए।

यह सर्वेक्षण आठ प्रमुख क्षेत्रों के 1,096 उद्योग प्रतिनिधियों और कारोबारियों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है, जिसमें 99 प्रतिशत प्रतिभागियों ने जीएसटी के प्रति सकारात्मक या तटस्थ दृष्टिकोण व्यक्त किया। नकारात्मक राय रखने वालों में एक प्रतिशत से भी कम लोग थे।

जीएसटी को एक जुलाई, 2017 से लागू किया गया था। इसमें 17 स्थानीय करों और 13 उपकरों को समाहित किया गया था। जीएसटी करदाताओं की संख्या 2017 में 66.5 लाख थी और 2026 में यह बढ़कर लगभग 1.65 करोड़ हो गई है।

सर्वेक्षण के अनुसार, अगले चरण के सुधारों में 87 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कर प्रावधानों की स्पष्ट व्याख्या को प्राथमिकता दी। वहीं 61 प्रतिशत ने ऑडिट प्रक्रियाओं में एकरूपता और 36 प्रतिशत ने रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने की मांग की।

डेलॉयट दक्षिण एशिया के अध्यक्ष (कर) गोकुल चौधरी ने कहा कि जीएसटी ने कर अनुपालन और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार किया है। जीएसटी नेटवर्क देश के विश्वसनीय कर ढांचे के रूप में स्थापित हुआ है और जल्द ही एकीकृत तथा बुद्धिमान तकनीकी क्षमताएं वास्तविकता बनेंगी।

डेलॉयट इंडिया के अप्रत्यक्ष कर भागीदार और लीडर ने कहा कि जीएसटी के विकास के अगले चरण में कार्यशील पूंजी से जुड़ी चिंताओं को दूर करने का यह उपयुक्त समय है। उन्होंने इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं को भी उलट शुल्क संरचना के तहत रिफंड व्यवस्था में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

भाषा यासिर अजय

अजय


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