भारत-ईयू एफटीए निर्यात, विनिर्माण को बढ़ावा देने में मददगार होगा: निर्यातक

भारत-ईयू एफटीए निर्यात, विनिर्माण को बढ़ावा देने में मददगार होगा: निर्यातक

भारत-ईयू एफटीए निर्यात, विनिर्माण को बढ़ावा देने में मददगार होगा: निर्यातक
Modified Date: January 27, 2026 / 05:30 pm IST
Published Date: January 27, 2026 5:30 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते के तहत यूरोपीय संघ द्वारा दी गई आयात शुल्क रियायतों से 27 देशों के समूह में देश के निर्यात को बढ़ावा मिलने के साथ घरेलू विनिर्माण को गति मिलेगी। निर्यातकों ने मंगलवार को यह कहा।

दोनों पक्षों ने मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए वार्ता के समापन की घोषणा की।

वित्त वर्ष 2024-25 में ईयू के साथ भारत का द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 136.53 अरब डॉलर रहा, जिसमें 75.85 अरब डॉलर का निर्यात और 60.68 अरब डॉलर का आयात शामिल है। इसके साथ ही ईयू भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार भागीदार बन गया।

ईयू बाजार भारत के कुल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जबकि भारत को ईयू का निर्यात उसके कुल विदेशी निर्यात का 9 प्रतिशत है।

इस समझौते के अगले वर्ष की शुरुआत में लागू होने की उम्मीद है।

निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक में तरजीही बाजार पहुंच खुलने से वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद और चमड़ा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निर्यात को गति मिलेगी।

रल्हन ने कहा, “यह समझौता निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा क्योंकि यह शुल्क बाधाओं को कम करेगा और विशेषकर श्रम-प्रधान और उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को शुल्क-लाभ वाली पहुंच प्रदान करेगा।”

उन्होंने निर्यातक समुदाय से अपील की कि वे एफटीए की पूरी संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाएं, कड़े नियामकीय मानकों का पालन करें और बड़ी, सटीक मांग वाले यूरोपीय बाजारों को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता का विस्तार करें।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर गुलजार दीदवानिया ने कहा कि व्यापार समझौते के तहत वाइन, स्पिरिट और वाहन पर शुल्क रियायतों को पारस्परिक बाजार पहुंच के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘शराब क्षेत्र में चरणबद्ध उदारीकरण से आयात को औपचारिक रूप देने में मदद मिलेगी। वहीं वाहन क्षेत्र में, खासकर कलपुर्जों और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए सीमित स्तर पर बाजार खोलने से निवेश आकर्षित करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।’

परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने कहा कि यह समझौता परिधान निर्यात को बड़ा बढ़ावा देगा, जिसके अगले तीन वर्षों में दोगुना होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, ‘ईयू बाजार में भारतीय परिधानों और कपड़ों को शून्य शुल्क पर पहुंच मिलने से भारत के पक्ष में समीकरण निर्णायक रूप से बदल जाएगा और यूरोपीय बाजार में हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।’

शक्तिवेल ने कहा कि उद्योग के अनुमानों के अनुसार एफटीए लागू होने के बाद भारतीय परिधान निर्यात में सालाना 20–25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जबकि ईयू बाजार में मौजूदा वृद्धि दर 3.01 प्रतिशत है।

ईयू विश्व का सबसे बड़ा परिधान आयातक है, जहां वित्त वर्ष 2024-25 में कुल परिधान आयात 202.8 अरब डॉलर रहा।

उन्होंने कहा कि जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे यूरोपीय संघ के कुछ प्रमुख परिधान आयातक देश भारत से काफी मात्रा में कपड़ा खरीदते हैं और इस सौदे से इन अर्थव्यवस्थाओं में हमारे परिधान निर्यात को और बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि ईयू भारत के कुल परिधान निर्यात का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा रखता है, लेकिन ईयू के परिधान बाजार में भारत की हिस्सेदारी केवल 2.9 प्रतिशत है।

शक्तिवेल ने कहा, ‘भारतीय परिधान उत्पादों पर शुल्क समाप्त होने से उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि इससे भारत को बांग्लादेश, तुर्किये और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर अवसर मिलेंगे, जिन्हें पहले से ईयू बाजार में शुल्क-मुक्त या रियायती पहुंच प्राप्त है।’

मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संतोष अय्यर ने मंगलवार को कहा कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारतीय वाहन क्षेत्र में प्रौद्योगिकी नवाचार और सतत वृद्धि को मजबूती से बढ़ावा देगा, लेकिन इस समझौते के बाद कंपनी की वाहनों की कीमतों में निकट भविष्य में कोई कमी होने की संभावना नहीं है।

भारत-ईयू एफटीए को भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए अय्यर ने कहा कि यह समझौता वैश्विक मंच पर भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती प्रासंगिकता को दोहराता है।

उन्होंने कहा, ‘एफटीए से भारतीय वाहन क्षेत्र के भीतर प्रौद्योगिकी नवाचार और टिकाऊ वृद्धि को मजबूती से आगे बढ़ाने की उम्मीद है, जिसमें भविष्य की गतिशीलता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एफटीए के अंतिम निहितार्थ केवल तभी निर्धारित किए जा सकते हैं जब समझौते की पूरी विस्तृत शर्तें उपलब्ध हों।’

वाहनों की कीमतों पर एफटीए के प्रभाव पर अय्यर ने कहा, ‘मर्सिडीज-बेंज भारत में अपनी 90 प्रतिशत से ज्यादा बिक्री स्थानीय रूप से बने ‘मेड इन इंडिया’ मॉडल के माध्यम से करती है, जबकि केवल पांच प्रतिशत बिक्री ईयू से आयातित पूरी तरह तैयार (सीबीयू) वाहनों की होती है। इसलिए, निकट भविष्य में एफटीए के कारण मर्सिडीज-बेंज वाहनों की कीमतों में कोई कमी आने की उम्मीद नहीं है।’

उन्होंने कहा, ‘हम स्थानीय उत्पादन और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण के माध्यम से ग्राहकों के लिए मूल्य संवर्धन पर अपना ध्यान केंद्रित करना जारी रखेंगे, जिससे भारतीय ग्राहकों के लिए भारत में विश्व स्तरीय वाहन बनेंगे।’

भाषा योगेश रमण

रमण


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