भारत को ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत: नीति आयोग उपाध्यक्ष
भारत को ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत: नीति आयोग उपाध्यक्ष
नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अल्पकालिक आपूर्ति श्रृंखला की समस्या था, लेकिन इसने यह सिखाया है कि भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा जरूरतों के स्रोतों में विविधता लानी चाहिए।
‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ के आठवें संस्करण को जारी करते हुए लाहिड़ी ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत और अमेरिका जल्द ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देकर उस पर हस्ताक्षर करेंगे।
उन्होंने कहा कि नीति आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि जब भारत किसी देश या समूह के साथ मुक्त व्यापार समझौता करे, तो उसमें औषधीय उत्पादों पर एक अध्याय (चैप्टर) शामिल किया जाना चाहिए।
लाहिड़ी ने उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘ मान लीजिए आपको बुखार है, लेकिन अगर वह इन्फ्लूएंजा है तो आप ज्यादा चिंतित नहीं होंगे। तीन दिन में ठीक हो जाएगा, लेकिन अगर यह टाइफाइड या पीलिया हो, तो आप ज्यादा चिंतित होंगे। इसी तरह पश्चिम एशिया संकट इन्फ्लूएंजा जैसा साबित हुआ है।’’
पश्चिम एशिया में युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया और इसके जवाब में ईरान ने पलटवार किया, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हो गई। यह जलडमरूमध्य दुनिया का प्रमुख तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा आता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक अल्पकालिक समस्या थी, लेकिन इसने हमें कुछ सबक सिखाए हैं। सभी अंडे एक ही टोकरी में नहीं रखने चाहिए, इसलिए हमें अपने आयात और निर्यात दोनों के स्रोतों में विविधता लानी चाहिए।’’
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से पोत परिवहन गतिविधियां फिर शुरू हो गईं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 जून को ईरान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत ईरान अपने उच्च समृद्ध यूरेनियम भंडार को कम करेगा और अमेरिका समर्थित प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी, जिससे ईरान को अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति मिल गई।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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