भारत, ब्रिटेन कार्बन कर मुद्दे पर कर रहे बातचीत: वाणिज्य सचिव
भारत, ब्रिटेन कार्बन कर मुद्दे पर कर रहे बातचीत: वाणिज्य सचिव
नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को कहा कि भारत और ब्रिटेन कार्बन कर नियम पर बातचीत कर रहे हैं।
ब्रिटेन सरकार ने दिसंबर, 2023 में घोषणा की थी कि वह 2027 से अपनी कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली (सीबीएएम) लागू करेगी।
आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, 2027 से लोहा और स्टील, एल्युमीनियम, उर्वरक और सीमेंट जैसे उत्पादों पर कार्बन कर लगाने के ब्रिटेन के फैसले से भारत के 77.5 करोड़ डॉलर के निर्यात पर असर पड़ सकता है।
अग्रवाल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘सीबीएएम एक ऐसा नियम है जिस पर अभी काम चल रहा है। यह अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। दोनों पक्ष सीबीएएम नियम पर चर्चा कर रहे हैं।’’
यूरोपीय संघ (ईयू) के बाद, ब्रिटेन दूसरा ऐसा देश होगा जो सीबीएएम लागू करेगा। वह इस कदम को ‘आयात कार्बन कीमत निर्धारण’ व्यवस्था कहता है। यह शुरू में लोहा, स्टील, एल्युमीनियम, उर्वरक, हाइड्रोजन, सिरेमिक, ग्लास और सीमेंट जैसे क्षेत्र पर ध्यान देगा।
उत्सर्जन कारोबार प्रणाली (ईटीएस) के तहत पूरी तरह से लागू होने की स्थिति में यह कर आयात मूल्य का 14 से 24 प्रतिशत तक हो सकता है।
भारत का 2025-26 में ब्रिटेन को लोहा और स्टील तथा उनसे बने उत्पादों का निर्यात 89.34 करोड़ डॉलर था। यह ब्रिटेन को कुल वस्तु निर्यात (13.4 अरब डॉलर) का एक बड़ा हिस्सा था।
भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत के दौरान सीबीएएम का मुद्दा भी उठा था। दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू होगा।
अग्रवाल ने कहा, ‘हम (घरेलू इस्पात क्षेत्र के लिए) मूल्य के मामले में बाजार पहुंच बनाए रखने में कामयाब रहे हैं, जिसका फायदा हमें अब तक मिलता रहा है…। ब्रिटेन के अन्य व्यापार भागीदारों की तुलना में इस्पात क्षेत्र में हमारा कोटा अधिक है।’’
भाषा रमण अजय
अजय

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