भारतीय एयरलाइन कंपनियां इन गर्मियों में 10 प्रतिशत कम उड़ानें करेंगी संचालित
भारतीय एयरलाइन कंपनियां इन गर्मियों में 10 प्रतिशत कम उड़ानें करेंगी संचालित
नयी दिल्ली/मुंबई, 26 मार्च (भाषा) भारतीय एयरलाइन कंपनियां 29 मार्च से शुरू होने वाले ग्रीष्मकालीन सत्र के दौरान प्रति सप्ताह 23,000 से कुछ अधिक घरेलू उड़ानें संचालित करेंगी। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत कम है।
विमानन नियामक डीजीसीए ने नौ एयरलाइन कंपनियों के लिए 29 मार्च से 24 अक्टूबर तक चलने वाला घरेलू उड़ानों का ग्रीष्मकालीन सत्र प्रकाशित किया है।
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को पीटीआई-भाषा से कहा कि एयरलाइंस 2026 के ग्रीष्मकालीन सत्र में पिछले साल की अवधि की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम उड़ानें संचालित करेंगी।
बीते वर्ष ग्रीष्मकालीन सत्र में प्रति सप्ताह 25,610 उड़ानों का संचालन किया गया था। इस बार 10 प्रतिशत की कमी का मतलब है कि उड़ानों की संख्या में 2,561 की कमी आएगी। यानी कुल उड़ानें लगभग 23,049 प्रति सप्ताह होंगी।
डीजीसीए ने अपनी वेबसाइट पर 2026 के लिए एयरलाइन कंपनियों के अनुसार घरेलू ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम जारी कर किया है। लेकिन इसमें पिछले ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम या मौजूदा शीतकालीन कार्यक्रम के साथ तुलनात्मक आंकड़े और समेकित जानकारी नहीं दी गई है।
इस साल ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम के दौरान उड़ानें संचालित करने वाली नौ एयरलाइन… एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो, अकासा एयर, स्पाइसजेट, अलायंस एयर, फ्लाई91, स्टार एयर और इंडियावन एयर…हैं।
एयरलाइन कंपनियों को 26 अक्टूबर, 2025 से 28 मार्च, 2026 तक चलने वाले मौजूदा शीतकालीन कार्यक्रम के तहत प्रति सप्ताह 26,495 उड़ानें संचालित करनी थीं। हालांकि, दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो में परिचालन संबंधी बाधाओं का असर पड़ा और डीजीसीए ने एयरलाइन की शीतकालीन उड़ानों में 10 प्रतिशत की कटौती कर दी।
इस बीच, 28 फरवरी से शुरू हुआ पश्चिम एशिया संघर्ष इस क्षेत्र में भारतीय एयरलाइन कंपनियों की उड़ान सेवाओं को काफी हद तक बाधित कर रहा है।
इस संदर्भ में, एयरलाइन के अधिकारियों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि अनिश्चितता का माहौल है और मौजूदा ग्रीष्मकालीन सूची में और कटौती की संभावना है।
एक अधिकारी ने बताया कि उड़ान कार्यक्रम मुख्य रूप से जनवरी और फरवरी में तैयार किया गया था। उस दौरान पश्चिम एशिया संघर्ष से संबंधित कोई जोखिम नहीं था। अब स्थिति पूरी तरह से बदल गई है और परिचालन संबंधी जटिलताएं बढ़ गई हैं।
भाषा रमण अजय
अजय

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