भारत का कॉफी निर्यात जनवरी-अप्रैल में 27 प्रतिशत बढ़ा

भारत का कॉफी निर्यात जनवरी-अप्रैल में 27 प्रतिशत बढ़ा

भारत का कॉफी निर्यात जनवरी-अप्रैल में 27 प्रतिशत बढ़ा
Modified Date: May 5, 2026 / 08:04 pm IST
Published Date: May 5, 2026 8:04 pm IST

नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) देश का कॉफी निर्यात 2026 की जनवरी-अप्रैल अवधि में 26.6 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख टन रहा। इसकी मुख्य वजह रोबस्टा और इंस्टेंट कॉफी के निर्यात में हुई बढ़ोतरी है। सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।

पिछले साल इसी अवधि में देश ने 1.37 लाख टन कॉफी का निर्यात किया था। भारत अरेबिका और रोबस्टा किस्मों के साथ-साथ इंस्टेंट कॉफी का भी निर्यात करता है।

मूल्य के हिसाब से, कुल निर्यात एक साल पहले के 757.07 करोड़ रुपये से बढ़कर 936.57 करोड़ रुपये हो गया, जबकि प्रति टन औसत मूल्य (यूनिट वैल्यू रियलाइजेशन) 4,75,023 रुपये से बढ़कर 4,94,766 रुपये हो गया।

कॉफी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-अप्रैल में रोबस्टा का निर्यात 36 प्रतिशत बढ़कर 85,168 टन हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 62,736.92 टन था। वहीं, इंस्टेंट कॉफी का निर्यात 17,504 टन से बढ़कर 20,332 टन हो गई।

इंस्टेंट कॉफी का पुनः-निर्यात 30,274 टन से बढ़कर 38,169 टन हो गया।

हालांकि, अरेबिका का निर्यात 58 प्रतिशत घटकर 30,589 टन ​​रह गया, जो एक साल पहले 72,479 टन था।

भारत ने 2025 में 3.82 लाख टन कॉफी का निर्यात किया था।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत का कॉफी क्षेत्र वर्ष 2026 में नई गति के साथ प्रवेश कर रहा है। वैश्विक कॉफी अर्थव्यवस्था में देश की भूमिका अब केवल रोबस्टा आपूर्तिकर्ता की अपनी पारंपरिक पहचान से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान, बढ़ते निर्यात मूल्य, प्रसंस्करण के लिए बढ़ते आयात और घरेलू खपत में लगातार हो रही वृद्धि—ये सभी संकेत बताते हैं कि यह उद्योग अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।

कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया के वित्त वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए अनुमान के मुताबिक, उत्पादन रिकॉर्ड 4,03,000 टन रहने की उम्मीद है, जिसमें तीन मुख्य उत्पादक राज्यों – कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु – में बढ़ोतरी की संभावना है।

अरेबिका का उत्पादन बढ़कर लगभग 1,18,000 टन होने का अनुमान है, जबकि रोबस्टा का उत्पादन 2,84,000 टन से अधिक हो सकता है। इसकी मुख्य वजह बेहतर पैदावार और मिट्टी में नमी की अच्छी उपलब्धता है।

हालांकि, मौसम में उतार-चढ़ाव और जलवायु से जुड़े जोखिम इस क्षेत्र के लिए अभी भी चिंता का मुख्य विषय बने हुए हैं।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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