भारत में मेमोरी चिप निर्माण में बढ़ सकता है निवेश, उत्पादन बढ़ाएंगी मौजूदा कंपनियां:वैष्णव

भारत में मेमोरी चिप निर्माण में बढ़ सकता है निवेश, उत्पादन बढ़ाएंगी मौजूदा कंपनियां:वैष्णव

भारत में मेमोरी चिप निर्माण में बढ़ सकता है निवेश, उत्पादन बढ़ाएंगी मौजूदा कंपनियां:वैष्णव
Modified Date: June 14, 2026 / 02:14 pm IST
Published Date: June 14, 2026 2:14 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जून (भाषा) केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत में मेमोरी चिप के विनिर्माण के लिए नई कंपनियों द्वारा निवेश किए जाने की संभावना है, जबकि मौजूदा निवेशक भी इस क्षेत्र में आपूर्ति-मांग के अंतर को कम करने के लिए उत्पादन बढ़ाएंगे।

वैष्णव ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि मेमोरी कार्ड और उन्नत चिप की मजबूत मांग के कारण वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है और पिछले कुछ तिमाहियों में कीमतों में वृद्धि देखने को मिली है। इसके चलते विनिर्माता वैश्विक स्तर पर बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ा रहे हैं। चिप की कीमतों में वृद्धि ने स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की उत्पादन लागत भी बढ़ा दी है।

उन्होंने कहा, “निश्चित रूप से मेमोरी विनिर्माण इकाइयों में काफी अधिक निवेश आ रहा है और इसका कारण यह है कि सेमीकंडक्टर उद्योग जिस तेजी से बढ़ा है, उसमें पहली बार कुछ ऐसे कलपुर्जों की भारी कमी देखने को मिल रही है, जिनकी आवश्यकता कृत्रिम मेधा (एआई) डेटा सेंटर और हाई बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स में होती है।”

हाई बैंडविड्थ मेमोरी (एचबीएम) चिप एक उन्नत कंप्यूटर मेमोरी है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से एआई, सुपरकंप्यूटर, डेटा सेंटर और हाई-एंड ग्राफिक्स प्रोसेसिंग में होता है।

उन्होंने बताया कि भारत में डेटा सेंटर निवेश जल्द ही 200 अरब डॉलर को पार कर सकता है, जिसके लिए विशाल स्टोरेज क्षमता की आवश्यकता होगी।

मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन बना हुआ है, जिसे नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना से संतुलित किया जा रहा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उच्च बैंडविड्थ मेमोरी चिप का उत्पादन करने वाली कंपनियों की नई इकाइयों ने हाल में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया है, जिससे आपूर्ति स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेमोरी क्षेत्र में गंभीर आपूर्ति-मांग असंतुलन बना हुआ है।

यह पूछे जाने पर कि क्या इस क्षेत्र में नए निवेश आएंगे या मौजूदा कंपनियां उत्पादन बढ़ाएंगी, वैष्णव ने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों ही स्थितियां संभव हैं।”

उन्होंने कहा कि ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0’ के तहत लगभग 48 स्टार्टअप प्रौद्योगिकी उत्पादों पर काम कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 में डिजाइन सर्वोच्च प्राथमिकता होगी, जबकि दूसरी सबसे बड़ी प्राथमिकता सेमीकंडक्टर विनिर्माण में उपयोग होने वाली मशीनें होंगी। हम गंभीरता से इस पर विचार कर रहे हैं कि उपकरण निर्माता भारत में आकर उपकरणों का डिजाइन और निर्माण दोनों करें।”

मंत्री ने कहा कि दशकों के प्रयासों के बाद भारत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चिप विनिर्माताओं को देश में आकर्षित करने में सफल रहा है और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 घरेलू सेमीकंडक्टर उद्योग की मजबूत नींव रख रहा है।

भाषा योगेश अजय

अजय


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