एक और भारतीय बना वैश्विक कंपनियों का अगुवा, कुणाल शाह संभालेंगे व्हाट्सएप की कमान

एक और भारतीय बना वैश्विक कंपनियों का अगुवा, कुणाल शाह संभालेंगे व्हाट्सएप की कमान

एक और भारतीय बना वैश्विक कंपनियों का अगुवा,  कुणाल शाह संभालेंगे व्हाट्सएप की कमान
Modified Date: June 22, 2026 / 10:24 pm IST
Published Date: June 22, 2026 10:24 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) कुणाल शाह के व्हाट्सएप का वैश्विक प्रमुख बनने के साथ दुनिया की प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों की अगुवाई करने वाले भारतीय मूल के कार्यकारियों की सूची में एक और नाम जुड़ गया है।

वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) मंच क्रेड के संस्थापक शाह, मेटा की वैश्विक लीडरशिप टीम में शामिल होकर इस बड़ी प्राद्योगिकी कंपनी के मैसेजिंग मंच को संभालेंगे। शाह के व्हाट्सएप से जुड़ने के साथ एक और नाम भारतीय परिवेश से निकलकर सिलिकॉन वैली के शीर्ष स्तर तक पहुंचने वालों की सूची में शामिल हो गया है।

इस बदलाव के साथ शाह उन खास पेशेवरों के समूह में शामिल हो गए हैं जो अरबों उपयोगकर्ता और खरबों डॉलर के बाजार मूल्यांकन वाले मंचों को संभालते हैं। इससे यह बात फिर साबित होती है कि वैश्विक डिजिटल सेवाओं की अगुवाई करने के लिए जरूरी रणनीतिक सोच के लिए भारतीय प्रतिभा की मांग बढ़ रही है।

उल्लेखनीय है कि 2026 की शुरुआत में, भारतीय मूल की आशा शर्मा को माइक्रोसॉफ्ट गेमिंग का सीईओ बनाया गया। उन्होंने फिल स्पेंसर की जगह ली थी।

पिछले साल अक्टूबर में, राहुल पाटिल एआई कंपनी एंथ्रोपिक में मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी के तौर पर शामिल हुए।

ये हाल की नियुक्तियां 2023 में नील मोहन के यूट्यूब के सीईओ और रवि कुमार एस के कॉग्निजेंट के सीईओ बनने के बाद हुई हैं।

शीर्ष स्तर पर पहुंचने के इस उभार की नींव सत्य नडेला और सुंदर पिचाई जैसी मशहूर हस्तियों ने रखी थी।

नडेला 2014 में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ बने। उन्हें क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई पर जोर देकर कंपनी की स्थिति को बेहतर बनाने का श्रेय दिया जाता है।

सुंदर पिचाई ने 2015 में गूगल और बाद में 2019 में इसकी मूल कंपनी अल्फाबेट की कमान संभाली।

इस सूची में शांतनु नारायण जैसे लंबे समय से नेतृत्व कर रहे लोग भी शामिल हैं। उन्होंने 2007 से एडोब की अगुवाई की। आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा भी इस सूची में शामिल हैं जिन्होंने अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी में अपने 35 साल के करियर के दौरान कई बड़े बदलाव किए हैं।

भाषा रमण अजय

अजय


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