मांडविया राष्ट्रव्यापी नि:शुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल की करेंगे शुरुआत
मांडविया राष्ट्रव्यापी नि:शुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल की करेंगे शुरुआत
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया नए श्रम संहिताओं के तहत प्रस्तावित 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी नि:शुल्क ‘वार्षिक स्वास्थ्य जांच पहल’ की शुरुआत बृहस्पतिवार को करेंगे।
श्रम मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस पहल का औपचारिक उद्घाटन नयी दिल्ली में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (बसईदारापुर) से किया जाएगा।
देश भर में 11 अन्य ईएसआईसी अस्पतालों में भी एक साथ उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें संबंधित राज्यों के श्रम मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।
यह पहल ‘श्रमेव जयते’ के व्यापक ढांचे के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप है जो श्रम की गरिमा एवं श्रमिकों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा पर जोर देता है।
यह कार्यान्वयन चार नए श्रम संहिताओं के माध्यम से लाए गए परिवर्तनकारी सुधारों पर आधारित है। इन संहिताओं में 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित किया गया है।
इन सुधारों का उद्देश्य अनुपालन को सरल बनाना और सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार करना है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 असंगठित और ऑनलाइन मंच के लिए काम करने वाले श्रमिकों को शामिल करती है। साथ ही इसमें एक सामाजिक सुरक्षा कोष स्थापित करने का प्रावधान है और ईएसआईसी लाभों के दायरे का विस्तार करती है।
नई श्रम रूपरेखा के तहत एक प्रमुख प्रावधान 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों के लिए अनिवार्य वार्षिक स्वास्थ्य जांच है।
ईएसआई योजना के लाभार्थियों के लिए ये जांच ईएसआईसी के व्यापक अस्पताल नेटवर्क के माध्यम से की जाएंगी जिनमें प्रारंभिक निदान, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सतत स्वास्थ्य निगरानी पर ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा, खतरनाक या जोखिमपूर्ण कार्यों में लगे श्रमिकों के लिए आयु पर गौर किए बिना स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होगी।
यह पहल स्वास्थ्य अभिलेखों के व्यवस्थित रखरखाव और समय-समय पर निगरानी की भी परिकल्पना करती है, ताकि श्रमिकों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित किया जा सके।
यह राष्ट्रव्यापी पहल व्यावसायिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने, भारत के श्रमिकों के लिए व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने और ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भाषा निहारिका रमण
रमण

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